Azamgarh news:सीडीओ ने जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव-2026 का किया शुभारम्भ, पशुपालकों को आधुनिक डेयरी तकनीकों की दी जानकारी
देशी नस्ल की गायों का पालन बढ़ाएँ, डेयरी व्यवसाय को बनाएं अधिक लाभकारी- मुख्य विकास अधिकारी

आजमगढ़, 05 अगस्त 2026/:दुग्धशाला विकास विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के तहत जनपद में डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने तथा दुग्ध उत्पादकों एवं पशुपालकों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक दिवसीय जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव-2026 का शुभारम्भ मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, दुग्ध संग्रहण एवं विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने, पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने तथा उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक पशुपालक इस मिशन से जुड़कर विभागीय योजनाओं का लाभ उठाएं और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन अपनाकर अपनी आय में वृद्धि करें।मुख्य विकास अधिकारी ने विशेष रूप से देशी नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल देते हुए कहा कि देशी नस्ल की गायों का दूध अधिक गुणवत्तापूर्ण एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है। उन्होंने कहा कि देशी गायों के गोबर एवं गोमूत्र का उपयोग प्राकृतिक एवं जैविक खेती में अत्यंत उपयोगी है। इनके प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होती है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि गोमूत्र का फसलों में छिड़काव करने से अनेक प्रकार के कीट एवं रोगों से बचाव में सहायता मिलती है तथा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। देशी नस्ल की गायों से प्राप्त दूध के साथ-साथ दही, घी, पनीर एवं अन्य दुग्ध उत्पाद भी उच्च गुणवत्ता के होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। उन्होंने कहा कि किसान यदि वैज्ञानिक ढंग से देशी नस्ल की गायों का पालन करें तो उनकी आय में निरंतर वृद्धि होगी तथा कृषि एवं पशुपालन दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए डेयरी क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए अनेक महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित कर रही है। जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों एवं कृषकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, वैज्ञानिक पशुपालन, गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, उन्नत तकनीकों तथा विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपने डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी एवं आत्मनिर्भर बना सकें।उन्होंने कहा कि डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। यदि पशुपालक वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन करें, संतुलित एवं पोषक पशु आहार का उपयोग करें, समय-समय पर टीकाकरण एवं कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाओं का लाभ लें तथा पशुओं के स्वास्थ्य का नियमित परीक्षण कराएं, तो दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन द्वारा संचालित सभी विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जाए तथा पात्र पशुपालकों एवं कृषकों को योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से उपलब्ध कराया जाए, जिससे अधिकाधिक लोग डेयरी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक एवं नोडल अधिकारी, नन्द बाबा दुग्ध मिशन, आजमगढ़ ने जनपद के समस्त कृषकों, पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने सभी पशुपालकों से आह्वान किया कि वे शासन की योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाकर अपने डेयरी व्यवसाय को आधुनिक तकनीकों से सशक्त बनाएं तथा आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएं।कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक डेयरी प्रबंधन, वैज्ञानिक एवं संतुलित चारा प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, दुग्ध प्रसंस्करण, दुग्ध मूल्य संवर्धन, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, पशु बीमा, दुग्ध विपणन तथा दुग्धशाला विकास विभाग एवं पशुपालन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से पशुपालकों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए तथा डेयरी व्यवसाय को लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर बल दिया।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से समाधान किया गया। साथ ही पशुपालकों को विभागीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया, आवेदन की विधि तथा तकनीकी सहायता के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई।इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता, जिला युवा कल्याण अधिकारी सुल्तान सिंह, वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक एवं नोडल अधिकारी, नन्द बाबा दुग्ध मिशन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, डेयरी क्षेत्र से जुड़े प्रगतिशील कृषक, दुग्ध उत्पादक तथा बड़ी संख्या में पशुपालकों ने प्रतिभाग किया।



