Azamgarh News:साहित्यकार पंकज कुमार राय का दोहा संग्रह ‘हम अगस्त्य की जात’ प्रकाशित, सामाजिक सरोकारों को मिली शब्दों की धार
आजमगढ़ बलरामपुर/ पटवध से बबलू राय
साहित्यकार पंकज कुमार राय का दोहा संग्रह ‘हम अगस्त्य की जात’ प्रकाशित, सामाजिक सरोकारों को मिली शब्दों की धार
आजमगढ़ जिले के वरिष्ठ साहित्यकार एवं सेवानिवृत्त राज्य कर अधिकारी पंकज कुमार राय की साहित्यिक कृति ‘हम अगस्त्य की जात’ दोहा संग्रह के रूप में पाठकों के बीच उपलब्ध है। इस संग्रह में रचनाकार ने अपनी साहित्यिक संवेदना के माध्यम से समाज, जीवन-मूल्यों, मानवीय सरोकारों और समकालीन परिस्थितियों को दोहों के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। पुस्तक का प्रकाशन डिस्काउण्ट ग्रुप ऑफ पब्लिकेशन, गोरखपुर द्वारा किया गया है। पुस्तक का मूल्य 300 रुपये निर्धारित है और यह अमेजन तथा फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध है।
पंकज कुमार राय का जन्म 28 दिसंबर 1962 को आजमगढ़ में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय राज कुमार राय और माता स्वर्गीया गुलाइची देवी थीं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से हिंदी में एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि छात्र जीवन से ही रही। उन्होंने यूजीसी की जेआरएफ प्राप्त की तथा ‘नरेन्द्र कोहली के पौराणिक उपन्यास’ विषय पर एम.ए. में लघु शोध-प्रबंध तैयार किया। इसके बाद ‘हिन्दी के पौराणिक उपन्यास’ विषय पर शोध-प्रबंध किया।
सरकारी सेवा के क्षेत्र में भी पंकज कुमार राय का लंबा अनुभव रहा है। उनका चयन उत्तर प्रदेश में डिप्टी जेलर के पद पर हुआ। इसके बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित होकर उन्होंने राजकीय महाविद्यालय कांकेर तथा राजकीय महाविद्यालय कसडोल में हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में लगभग चार वर्षों तक अध्यापन किया। सितंबर 1997 से जनवरी 1998 तक वह उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद में खंड विकास अधिकारी बड़ांव के पद पर भी कार्यरत रहे। बाद में उन्होंने राज्य कर विभाग में सेवाएं दीं और दिसंबर 2022 में डिप्टी कमिश्नर (राज्य कर), वाराणसी के पद से सेवानिवृत्त हुए।
साहित्यिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता निरंतर बनी रही। उनकी ग़ज़लें राजेश मिश्र द्वारा संपादित ‘ग़ज़लें नयी सदी की’ में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा उनका ग़ज़ल संग्रह ‘समुन्दर ख़्वाहिशों के’ अप्रकाशित है। वह नई कविता, ग़ज़ल और दोहा विधा में लगातार सृजन करते रहे हैं। देश की विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं, जिनमें नवनीत, चांद, संस्मृति सुधा, मंजरी, रेल रश्मि और दिव्य प्रभा आदि शामिल हैं, में उनके आलेख और कविताएं प्रकाशित होती रही हैं।
‘हम अगस्त्य की जात’ के माध्यम से पंकज कुमार राय ने दोहा जैसी पारंपरिक काव्य विधा को समकालीन जीवन के अनुभवों और सामाजिक चिंताओं से जोड़ने का प्रयास किया है। साहित्यप्रेमियों के बीच इस कृति को लेकर रुचि देखी जा रही है। आजमगढ़ की साहित्यिक परंपरा में उनकी यह कृति स्थानीय रचनाकारों की सृजनात्मक सक्रियता को भी रेखांकित करती है।



