Azamgarh News:विश्व नदी दिवस की पूर्व संध्या पर ‘नदी की बात-जन-जन के साथ’ कार्यक्रम सम्पन्न

आजमगढ़ बलरामपुर /पटवध से बबलू राय

विश्व नदी दिवस की पूर्व संध्या पर ‘नदी की बात-जन-जन के साथ’ कार्यक्रम सम्पन्न

आजमगढ़ की 25 नदियों के पवित्र जल को ‘वरुण कुम्भ’ में किया गया संकलित, नदी एवं जलस्रोतों के संरक्षण का दिया संदेश

हमारी नदी-हमारा दायित्व’ के मूल संदेश के साथ जल संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर

आजमगढ़ जल-अभिलेख-2026’ एवं ‘आजमगढ़ जल एटलस’ विकसित करने का लिया गया संकल्प

आजमगढ़, 26 सितंबर 2026। विश्व नदी दिवस की पूर्व संध्या पर लोक दायित्व न्यास, आजमगढ़ द्वारा ‘नदी की बात-जन-जन के साथ’ कार्यक्रम का आयोजन नेहरू हाल में मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण, संवर्धन तथा जल संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में जनपद आजमगढ़ में प्रवाहित होने वाली छोटी-बड़ी 25 नदियों के पवित्र जल का संकलन कर मंच पर स्थापित ‘वरुण कुम्भ’ में अर्पित किया गया। इस प्रतीकात्मक आयोजन के माध्यम से नदियों के प्रति सम्मान और उनके संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। वन विभाग, बाढ़ एवं सिंचाई विभाग, जल निगम तथा भूगर्भ जल विभाग द्वारा जल संरक्षण आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, नदी एवं जलस्रोतों के संरक्षण से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की गई।

नदी संरक्षण को जनजीवन और भावी पीढ़ियों से जोड़ना आवश्यक- सीडीओ

मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने कहा कि कार्यक्रम का मूल संदेश ‘हमारी नदी-हमारा दायित्व’ है। नदी एवं जलस्रोतों का संरक्षण केवल पर्यावरणीय विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध जनजीवन, कृषि, भूजल, जैव-विविधता, लोकसंस्कृति तथा भावी पीढ़ियों के भविष्य से है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रति समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। विद्यालयों, पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, युवाओं, विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से नदी एवं जल संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के प्रयासों को जनभागीदारी से मजबूत करने पर जोर दिया।

आजमगढ़ की जल-स्मृति, वर्तमान जल-स्थिति और भविष्य की जल-दृष्टि को एक मंच पर लाने का प्रयास

जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह ने कहा कि यह आयोजन मात्र एक दिवस का औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ‘आजमगढ़ की जल-स्मृति, वर्तमान जल-स्थिति और भविष्य की जल-दृष्टि’ को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय जलस्रोतों, नदियों, जल संरक्षण से जुड़ी परंपराओं, स्थानीय अनुभवों एवं वर्तमान जल-स्थिति से संबंधित जानकारी को संकलित करने पर विशेष जोर दिया गया है। इस प्रकार के स्थानीय अनुभव और जानकारी भविष्य में जल संरक्षण की दिशा में उपयोगी आधार तैयार कर सकते हैं।

नदी घाटियां सभ्यताओं की पालना होती हैं- जिला सूचना अधिकारी

संगोष्ठी में जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने कहा कि नदी घाटियां सभ्यताओं की पालना होती हैं। विश्व नदी दिवस के अवसर पर जब हम वैश्विक स्तर पर नदियों के महत्व को देखते हैं तो नील नदी को मिस्र का वरदान, गंगा नदी को उत्तर भारत का वरदान तथा सिंधु नदी को हड़प्पा सभ्यता के विकास का आधार माना जाता है। उन्होंने कहा कि नदियां केवल जलधारा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, संस्कृति, कृषि, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन की आधारशिला रही हैं। वर्तमान समय में विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है। सतत एवं समावेशी विकास की अवधारणा को अपनाते हुए हमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं के लिए भी जल एवं प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखना होगा।

जल संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास- डॉ. पवन कुमार

लोक दायित्व न्यास, आजमगढ़ के केंद्रीय संयोजक डॉ. पवन कुमार ने बताया कि विश्व नदी दिवस-2026 के अवसर पर ‘नदी की बात-जन-जन के साथ’ अभियान के अंतर्गत व्यापक नदी एवं जल-संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम तथा प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से आमजन को नदियों, तालाबों, पोखरों, कुओं एवं अन्य जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ जल संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है।

आजमगढ़ जल-अभिलेख-2026’ एवं ‘आजमगढ़ जल एटलस’ विकसित करने का संकल्प

कार्यक्रम संयोजक डॉ. पवन सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त स्थानीय अध्ययन, जन-सुझाव एवं जलस्रोतों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को संकलित कर भविष्य में ‘आजमगढ़ जल-अभिलेख-2026’ एवं ‘आजमगढ़ जल एटलस’ के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे जनपद की जल-संपदा, जलस्रोतों की स्थिति तथा जल संरक्षण से जुड़े स्थानीय प्रयासों का व्यवस्थित दस्तावेज तैयार करने में सहायता मिलेगी और स्थानीय जल-परंपराओं तथा वर्तमान जल-स्थिति को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध होगा।

संगोष्ठी में विशेषज्ञ उद्बोधन के दौरान लोक दायित्व के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. दुर्गा प्रसाद अस्थाना ने ‘तमसा की यात्रा और आजमगढ़ की नदियां’ विषय पर अपना बौद्धिक लेख प्रस्तुत किया। इसके साथ ही अरविन्द सिंह, दिनेश सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी नवनीत चौबे, श्रीकृष्णपाल, जय सिंह, रवि अभ्युदय सहित अन्य बुद्धिजीवियों ने नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में अपने लेख एवं विचार प्रस्तुत किए।

वक्ताओं ने कहा कि जल संरक्षण आज की आवश्यकता होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। स्थानीय नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण के लिए जन-जागरूकता के साथ सामूहिक सहभागिता आवश्यक है।

नदी की बात-जन-जन के साथ’ को प्रभावी जनभागीदारी अभियान बनाने पर जोर

कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ‘नदी की बात-जन-जन के साथ’ अभियान को जनपद में नदी एवं जल संरक्षण के लिए प्रभावी जन-जागरूकता एवं जनभागीदारी अभियान के रूप में विकसित किया जाए। इसके माध्यम से जलस्रोतों के संरक्षण के प्रति लोगों में स्वामित्व एवं दायित्व की भावना को मजबूत करने तथा स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण के प्रयासों को गति देने पर बल दिया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, प्रबुद्धजनों एवं जनमानस ने सामूहिक जल-संकल्प लिया। संकल्प में कहा गया कि आजमगढ़ की धरती पर उपस्थित नागरिक, विद्यार्थी, शिक्षक, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं जल-प्रहरी जल को जीवन का आधार मानेंगे तथा उसकी प्रत्येक बूंद का सम्मान करेंगे।

 

संकल्प में जल का अनावश्यक अपव्यय न करने, परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल एवं समाज को जल के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित करने तथा नदी, तालाब, पोखर, कुआं एवं अन्य जलस्रोतों में कचरा, गंदा पानी अथवा अन्य प्रदूषक न डालने और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकने के लिए जागरूक करने का संकल्प लिया गया।

 

इसके साथ ही स्थानीय नदियों एवं जलस्रोतों को केवल सरकारी संपत्ति न मानकर साझा प्राकृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करने, गांव, नगर एवं विद्यालयों के जलस्रोतों की पहचान, स्वच्छता, संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए यथासंभव श्रम, समय एवं सहयोग देने का संकल्प लिया गया।

 

संकल्प में वर्षाजल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, वृक्षारोपण एवं नदी तटों की हरित सुरक्षा को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों, युवाओं, ग्राम पंचायतों, सामाजिक संस्थाओं एवं प्रशासन के साथ मिलकर जल संरक्षण की जनभागीदारी को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की गई।

 

जलस्रोतों से संबंधित प्रदूषण, अतिक्रमण, कचरा निस्तारण एवं जल की बर्बादी जैसी समस्याओं को संबंधित संस्थाओं एवं प्रशासन के संज्ञान में लाकर उनके समाधान में सहयोग करने तथा जल संरक्षण के इस संकल्प को केवल एक कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन एवं सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाने का संकल्प भी लिया गया।

“हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, अविरल, निर्मल और जीवनदायिनी नदियों एवं जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का हर संभव प्रयास करेंगे। हमारा संकल्प—जल बचाएंगे। नदी बचाएंगे। जलस्रोत बचाएंगे। प्रकृति बचाएंगे। भविष्य बचाएंगे। हमारी नदी-हमारा दायित्व।”

कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं जनपदवासियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।

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