Jabalpur news:खाकी के शिकंजे से छूटे, पर शिक्षा विभाग के संरक्षण में मौज! नाबालिग की मौत के जिम्मेदार शिक्षक पर मेहरबानी का काला खेल

Jabalpur News: Escaped from the clutches of the police, yet enjoying the protection of the Education Department! A dark game of favoritism is being played against the teacher responsible for the death of a minor.

जबलपुर के बरगी चौकी अंतर्गत शहजपुरी में चोरी के झूठे आरोप, पंचायत की घिनौनी प्रताड़ना और वीडियो वायरल कर एक मासूम नाबालिग किशोरी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले कुकृत्य ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने 17 अगस्त को मुख्य आरोपी शिक्षक संतोष पटेल और उसके तीन भाइयों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा था, लेकिन महज 10 दिन के भीतर ही ये चारों जमानत पर बाहर आ गए। हैरान करने वाली और प्रशासनिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा मारने वाली बात यह है कि एक मासूम की जान लेने के आरोपी और जेल की हवा खा चुके इस शिक्षक पर शिक्षा विभाग इतना मेहरबान है कि वह आज भी बेखौफ होकर स्कूल में मजे से पदस्थ है।

मेडिकल लीव का ढकोसला और प्राचार्य की शर्मनाक दलाली

नियमों के मुताबिक, कोई भी शासकीय सेवक यदि 48 घंटे से ज्यादा जेल में रहता है, तो उसका निलंबित होना तय है। लेकिन शातिर शिक्षक ने 20 अगस्त को बीमारी का फर्जी चोला पहनकर मेडिकल लीव का पैंतरा चला और 3 सितंबर को लौटते ही एक नया नाटक रच दिया। उसने स्कूल में आवेदन देकर खुद को ‘झूठे प्रकरण’ में फंसाए जाने का बेतुका राग अलापा, जिसे विद्यालय की प्राचार्या ने बिना एक पल गंवाए सीधे शिक्षा विभाग को फॉरवर्ड कर दिया। बड़ा सवाल यह है कि न्यायालय के विचाराधीन गंभीर आपराधिक मामले में प्रमाण पत्र बांटने वाली यह प्राचार्य आखिर किसकी शह पर शिक्षक को बचाने के इस गंदे खेल में शामिल है?

डीईओ के खोखले वादे और 25 दिनों से विभाग की आपराधिक चुप्पी

इस गंभीर मामले में डीईओ गौतम वर्बे ने जांच और वैधानिक कार्रवाई का ढोल तो पीटा, लेकिन 3 सितंबर को आवेदन पहुंचने के बाद बीते 25 दिनों से अधिक का वक्त गुजर जाने के बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है। डीईओ साहब की यह चुप्पी और विभाग का ढुलमुल रवैया इस बात का खुला सबूत है कि खाकी की पकड़ से बचने के बाद यह आरोपी शिक्षक शिक्षा विभाग के भ्रष्ट तंत्र की मजबूत छत्रछाया में खुलेआम घूम रहा है। आखिर एक मासूम की मौत के बाद भी इस रसूखदार शिक्षक पर मेहरबानी की यह आंधी कब तक चलती रहेगी?

जबलपुर से वाजीद खान की रिपोर्ट

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