Azamgarh News:संसार की मोह-माया से विरक्त हुए बाबू प्रमोद कुमार सिंह, संन्यास की ओर बढ़ते कदमों ने अपनों को किया भावुक

संसार की मोह-माया से विरक्त हुए बाबू प्रमोद कुमार सिंह, संन्यास की ओर बढ़ते कदमों ने अपनों को किया भावुक
पत्नी, बच्चों और रिश्तों से ऊपर ईश्वर को बताया सत्य, अचानक मन में जागे वैराग्य से परिवार और गांव के लोग चिंतित
आजमगढ़। कभी-कभी जीवन में ऐसे क्षण आते हैं, जब इंसान संसार की चकाचौंध, रिश्तों की उलझनों और मोह-माया से दूर होकर आध्यात्मिक शांति की तलाश में निकल पड़ने का मन बना लेता है। कुछ ऐसा ही भावनात्मक मोड़ भटौली इब्राहिमपुर, थाना कोतवाली जीयनपुर निवासी बाबू प्रमोद कुमार सिंह के जीवन में देखने को मिल रहा है। संसार की नश्वरता और जीवन की सच्चाई पर विचार करते हुए उन्होंने अपने सगे-संबंधियों के सामने वैराग्य की भावना व्यक्त की है। उनके संन्यासी जीवन अपनाने की बात से परिवार के लोग और गांव के शुभचिंतक भावुक हो उठे हैं।
बाबू प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि यह दुनिया नश्वर है और यहां सब कुछ अस्थायी है। पत्नी, बच्चे, दोस्त, इष्ट-मित्र और सांसारिक रिश्ते एक दिन पीछे छूट जाते हैं। उनके अनुसार, यदि कुछ शाश्वत और सत्य है, तो वह परमात्मा है। इसी विचार से प्रभावित होकर उन्होंने संसार की मोह-माया से दूर होने, ईश्वर की भक्ति में मन लगाने और एकांत में किसी मंदिर में रहकर साधना करने की इच्छा जताई है। उन्होंने अपने करीबियों से कहा कि अब उनका मन सांसारिक जीवन से विरक्त होकर संन्यास की राह अपनाने की ओर बढ़ रहा है।
उनकी इस अचानक व्यक्त हुई वैराग्य की भावना ने परिवार और गांव के लोगों को चिंता में डाल दिया है। गांव के भास्कर सिंह, मनोज सिंह, उदयभान सिंह, हरिशंकर उपाध्याय, राणा सिंह, संदीप सिंह उर्फ टिंकू, रणजीत सिंह, ओनिंदर सिंह, अभिषेक सिंह उर्फ संटू, रोशन सिंह सहित अन्य लोग उन्हें समझाने-बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। सभी की कोशिश है कि वे जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें और अपने मन की बात अपनों के साथ साझा करते हुए शांति से विचार करें।
बताया जाता है कि बाबू प्रमोद कुमार सिंह की चार बेटियां और एक बेटा हैं तथा सभी की शादी हो चुकी है। परिवार में उनका सबसे अधिक स्नेह अपने इकलौते पौत्र के प्रति बताया जाता है। पौत्र के प्रति उनका यह लगाव और दूसरी ओर संसार से विरक्त होकर संन्यास अपनाने की इच्छा, दोनों ही बातें उनके करीबियों के लिए भावनात्मक स्थिति पैदा कर रही हैं।
फिलहाल उनके मन में उठे वैराग्य के भाव ने पूरे परिवार और परिचितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जहां एक ओर प्रमोद कुमार सिंह ईश्वर की भक्ति और आध्यात्मिक शांति की राह तलाशने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके अपने उन्हें परिवार के बीच रहकर जीवन के इस पड़ाव को समझदारी और धैर्य के साथ पार करने के लिए मनाने में जुटे हैं। अब देखना यह है कि विचारों के इस गहरे मंथन के बाद वे क्या निर्णय लेते हैं।



