Azamgarh News:देर रात तक चला निजामाबाद का मेला सुरक्षा की थी जबरदस्त व्यवस्था।
देर रात तक चला निजामाबाद का मेला सुरक्षा की थी जबरदस्त व्यवस्था।
प्रेम प्रकाश दुबे की रिपोर्ट
निजामाबाद आजमगढ़।अधर्म ,अन्याय,असत्य, व अत्याचार पर धर्म न्याय सत्य और सदाचार की शाश्वत जीत का प्रतीक दशहरा पर्व अपने अंदर की बुराइयों को त्याग कर सद्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।निजामाबाद का ऐतिहासिक बहुचर्चित मेला बुधवार को परंपरागत तरीके से धूमधाम से मनाया गया।इसके लिए पूरे बाजार में रंगीन झालरों से आकर्षक सजावट की गई थी वही देवी पंडालों में सजावट के साथ ही प्रतिमाओं के पट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए। हर पूजा पंडाल में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ मची थी।मेला को शांति व सौहार्द के साथ निपटाने के लिए पुलिस ने खासा इंतजाम किए थे। मेले में सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए कई थानों के पुलिस बल के साथ महिला पुलिस और पीएसी के जवान लगाए गए थे।इस मेले को देखने के लिए क्षेत्र ही नही सुदूर से भी लोग आते हैं। शाम होते ही पंडालों में स्थापित की गई दुर्गा प्रतिमाओं को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।दुर्गा पूजा समिति के कार्यकर्ता भी मेले को सकुशल कराने में पूरी तन्मयता से जुटे नजर आए।मूर्ति पंडालों के पास की गई आकर्षक विद्युत सजावट अलग छठा बिखेर रही थी।मेले में दोपहर से ही भीड़ जुटनी शुरू हुई जो शाम होते ही ज्यादा होती गई।पूरे कस्बे में दूर दूर से दुकानदार आए हुए थे और तरह तरह की दुकानें सजी हुई थी।मेले में कही गुब्बारे तो कही जिलेबियां तो कही खिलौने छोले पकौड़े आदि की दुकानें लगी हुई थी।सबसे ज्यादा भीड़ महिलाओं की चाट फुल्की की दुकानों पर थी। फरहाबाद शिव मंदिर से हाथी और रथ पर सवार होकर गाजे बाजे के साथ श्रीराम बानरी सेना के साथ लंका पर चढ़ाई करने के लिए आते है।रावण को जब पता चलता है कि श्री राम अपनी बानरी सेना के साथ लंका में प्रवेश करते है तो वह अपनी चतुरंगिनी सेना लेकर युद्ध भूमि में पहुंचकर श्रीराम को युद्ध के लिए ललकारता है प्रभु श्रीराम कहते है कि हे लंकेश सीता को वापस कर हमारी शरण में आ जाओ,आप की लंका नगरी तभी सुरक्षित रहेगी।यह सुनकर रावण युद्ध के लिए राम को ललकारता है लंका का प्रतीक शिवाला घाट रामलीला मैदान में राम रावण के बीच युद्ध छिड़ जाता है।राम रावण युद्ध में राम के बाणों का प्रभाव नहीं पड़ता है तब विभीषण राम के पास जाकर बताते हैं कि रावण की नाभि में अमृत है,इसके बाद राम अग्नि वाण से रावण की नाभि में प्रहार कर वध कर देते हैं। रावण के मारे जाने के बाद रावण का पुतला दहन होते ही लंका का प्रतीक शिवाला रामलीला मैदान जय श्री राम के जयकारों से गूंज उठा।उपजिलाधिकारी निजामाबाद आई ए एस अयान जैन ने इलेक्ट्रिक बटन दबाकर रावण के विशाल पुतला का दहन किया।रावण के पुतला दहन के बाद मेला का समापन हो जाता है।



