Azamgarh News:राम-केवट संवाद ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर, भरत-मिलाप के दृश्य में छलक पड़े सैकड़ों लोगों के आंसू

आजमगढ़ बलरामपुर /पटवध से बबलू राय

भरत के आने की सूचना पर लक्ष्मण के क्रोध ने जगाया वीर रस, राम-भरत मिलन ने भाईचारे और त्याग की मिसाल से भावुक किया जनसमूह

आजमगढ़। सगड़ी तहसील के अजमतगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा भटौली इब्राहिमपुर में चल रही ऐतिहासिक रामलीला में राम-केवट संवाद और राम-भरत मिलाप का ऐसा भावुक एवं अद्भुत मंचन हुआ कि दर्शक भावविभोर हो उठे। भगवान राम और केवट के बीच प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से भरे संवाद ने जहां लोगों का मन मोह लिया, वहीं भरत-मिलाप के दृश्य ने उपस्थित महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की आंखें नम कर दीं। रामलीला देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

राम-केवट संवाद के दौरान केवट की भक्ति और भगवान राम के प्रति उसकी अगाध श्रद्धा का कलाकारों ने बेहद सुंदर चित्रण किया। केवट के किरदार में उत्तम सिंह तथा मांझी की भूमिका में जगदीश उपाध्याय ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। दोनों कलाकार ग्राम सभा के पुराने और अनुभवी रामलीला कलाकार हैं, जो वर्षों से विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से मंचन को जीवंत करते आ रहे हैं।

इसके बाद राम-भरत मिलाप का दृश्य शुरू हुआ। जैसे ही लक्ष्मण को सूचना मिली कि भरत भगवान राम से मिलने आ रहे हैं, उनका क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। लक्ष्मण के किरदार में अंश सिंह ने अपने ओजस्वी संवाद और वीर रस से भरे अभिनय से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। लक्ष्मण का राम से भरत को रोकने की अनुमति मांगना और भरत के प्रति अपने आक्रोश को व्यक्त करना दृश्य को अत्यंत प्रभावशाली बना गया। वहीं भगवान राम ने धैर्य और प्रेम के साथ लक्ष्मण को समझाया।

इसके बाद जब भरत का आगमन हुआ और भगवान राम तथा भरत का मिलन हुआ तो पूरा वातावरण भावनाओं से भर गया। दोनों भाइयों के प्रेम, त्याग, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का दृश्य देखकर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग अपने आंसू नहीं रोक सके। कई महिलाओं की आंखों से वास्तविक रूप में आंसू छलक पड़े। कुछ क्षणों के लिए पूरा रामलीला परिसर भावुकता में डूब गया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

राम की भूमिका में छोटू सिंह, लक्ष्मण के रूप में अंश सिंह, भरत के रूप में आदित्य सिंह, विश्वामित्र के रूप में अर्जुन गौड़, निषादराज के रूप में राजेश सिंह दादा, केवट के रूप में उत्तम सिंह तथा मांझी की भूमिका में जगदीश उपाध्याय ने शानदार अभिनय किया। इनके साथ अन्य छोटे-बड़े कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं से मंचन को यादगार बनाया।

उल्लेखनीय है कि भटौली इब्राहिमपुर में पिछले 40 से 50 वर्षों से रामलीला का मंचन निरंतर किया जा रहा है। गांव की यह परंपरा आज भी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कार और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ रही है। रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भाईचारे, त्याग, प्रेम और पारिवारिक मर्यादा का संदेश देने वाला जीवंत मंच बन गई है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button