कारगिल युद्ध : ऑपरेशन सफेद सागर के तहत दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में हासिल की थी विजय
Kargil War: Victory was achieved in the world's highest battlefield under Operation Safed Sagar
नई दिल्ली, 14 जुलाई। भारतीय वायुसेना के पास अपने वीर वायु योद्धाओं के साहस और बलिदान की एक गौरवशाली विरासत है। एक ऐसी ही गौरवशाली विरासत वर्ष 1999 का कारगिल युद्ध है, जो अदम्य साहस से लड़ा गया था। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना का ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ काफी महत्वपूर्ण रहा।
ऑपरेशन सफेद सागर, 16,000 फीट से अधिक की खड़ी ढलान और चक्करदार ऊंचाइयों की चुनौतियों का सामना करने की भारतीय वायुसेना की सैन्य क्षमता का प्रमाण है। ये खड़ी ढलान और चक्करदार ऊंचाइयां युद्ध में दुश्मन को निशाना बनाने में अद्वितीय परिचालन बाधाएं हैं। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में लड़े गए इस युद्ध को जीतने के लिए वायु शक्ति के अपने उपयोग में तेजी से किए गए तकनीकी संशोधनों और ऑन-द-जॉब-ट्रेनिंग ने भारतीय वायुसेना का स्थान श्रेष्ठ रहा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक कारगिल युद्ध के दौरान कुल मिलाकर, भारतीय वायुसेना ने लगभग 5,000 स्ट्राइक मिशन, 350 टोही/ईएलआईएनटी मिशन और लगभग 800 एस्कॉर्ट उड़ानें भरीं। भारतीय वायुसेना ने घायलों को निकालने और हवाई परिवहन कार्यों के लिए 2,000 से अधिक हेलीकॉप्टर उड़ानें भी भरीं। 152 हेलीकॉप्टर यूनिट, ‘द माइटी आर्मर’ ने कारगिल युद्ध में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
28 मई 1999 को 152 एचयू के स्क्वाड्रन लीडर आर पुंडीर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट एस मुहिलान, सार्जेंट पीवीएनआर प्रसाद और सार्जेंट आरके साहू को टोलोलिंग में दुश्मन के ठिकानों पर लाइव स्ट्राइक के लिए ‘नुबरा’ फॉर्मेशन के रूप में उड़ान भरने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस हवाई हमले को सफलतापूर्वक करने के बाद, उनके हेलीकॉप्टर को दुश्मन की स्टिंगर मिसाइल ने टक्कर मार दी, जिसमें चार वीर सैनिकों ने प्राणों का बलिदान दिया। असाधारण साहस के इस कार्य के लिए, उन्हें मरणोपरांत वायु सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया गया। उनके सर्वोच्च बलिदान ने सुनिश्चित किया कि उनका नाम हमेशा के लिए भारतीय वायुसेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।
कारगिल युद्ध में विजय के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, भारतीय वायुसेना 12 जुलाई से 26 जुलाई 2024 तक वायुसेना स्टेशन सरसावा में ‘कारगिल विजय दिवस रजत जयंती’ का आयोजन कर रही है। इसमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को सम्मानित किया जाता है। वायुसेना स्टेशन सरसावा की 152 हेलीकॉप्टर यूनिट, ‘द माइटी आर्मर’ की ऑपरेशन सफेद सागर में महत्वपूर्ण भूमिका थी।
13 जुलाई को वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर. चौधरी ने वरिष्ठ गणमान्य अधिकारियों, बहादुरों के परिवारों, दिग्गजों और सेवारत भारतीय वायुसेना अधिकारियों के साथ स्टेशन युद्ध स्मारक पर राष्ट्र की सेवा में अपने प्राणों की बलिदान देने वाले सभी वायु सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की। इस आयोजित कार्यक्रम के दौरान वायु सेना प्रमुख ने उनके परिजनों को सम्मानित किया और उनसे बातचीत की। यहां एक शानदार एयर शो का आयोजन किया गया, जिसमें आकाश गंगा टीम द्वारा प्रदर्शन और जगुआर, सुखोई एसयू-30 एमकेएल और राफेल लड़ाकू विमानों द्वारा हवाई प्रदर्शन शामिल थे।
शहीद नायकों की पुण्य स्मृति में एमआई-17 वी5 द्वारा “मिसिंग मैन फॉर्मेशन” ने उड़ान भरी। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों जैसे एमआई-17 वी5, चीता, चिनूक का स्थिर प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर एयर वॉरियर ड्रिल टीम और वायुसेना बैंड ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी। इस कार्यक्रम को 5,000 से अधिक दर्शकों ने देखा, जिनमें स्कूली बच्चे, सहारनपुर क्षेत्र के स्थानीय निवासी, पूर्व सैनिक, गणमान्य नागरिक और रुड़की, देहरादून और अंबाला के रक्षा बलों के कार्मिक गण शामिल थे।



