खर दूषण वध होते ही जय श्री राम के लगे जयकारे

रिपोर्ट: राहुल पांडे
गंभीरपुर/ आजमगढ़।विकासखंड मुहम्मदपुर के ग्राम सभा गंभीरपुर में स्थित सन 1965 से अनवरत चली आ रही रामलीला मे सातवें दिन स्थानीय ग्रामीणों द्वारा दशरथ मरण, सुनी अयोध्या,चित्रकूट में भरत मिलाप, लक्ष्मण द्वारा सूर्पनखा का नाक कान काटना, खर दूषण वध, सीता हरण का मंचन किया गया।सातवें दिन की रामलीला में मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदेश कार्य समिति सदस्य डॉ कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा द्वारा प्रभु श्री राम व लक्ष्मण का माल्यार्पण कर आरती की गई।इस मौके पर रामलीला के संरक्षक पंडित पद्माकर मिश्रा, अध्यक्ष विजय गुप्ता, विजय मिश्रा, शशिकांत उपाध्याय, संजय गुप्ता समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। मंचन कार्यक्रम में जब सुमंत बिना राम लक्ष्मण सीता के अयोध्या पहुंचते हैं तो यह सुनते ही दशरथ को एक आघात पहुंचता है और उनकी मृत्यु हो जाती है। उसके बाद ननिहाल गए भरत को बुलवाकर उनका अंतिम संस्कार किया जाता है उसके उपरांत भरत माता कैकेई, कौशल्या,सुमित्रा गुरु वशिष्ठ, राजा जनक के साथ राम को वनवास से वापस लाने के लिए जाते हैं लेकिन राम वापस आने से मना कर देते हैं तब गुरु वशिष्ठ द्वारा सुझाव दिया जाता है कि जब तक राम वन से वापस ना आये तब तक अयोध्या का सिंहासन खाली ना रहे जिसके लिए श्री राम का चरण पादुका सिंहासन पर रखा जाए और भारत अयोध्या का राज का संभालेंगे और राम के वापस आने के बाद उन्हें राज्य वापस दे देंगे। उसके बाद मंचन मे रावण की बहन सूर्पनखा का नाक और कान लक्ष्मण द्वारा काटने पर सूर्पनखा द्वारा सर्वनाश सर्वनाश कहते हुए जंगल में रह रहे अपने भाई खर दूषण के पास जाती है और अपनी व्यथा सुनाती है। जिस पर खर दूषण द्वारा बहन के अपमान का बदला लेने के लिए भयंकर युद्ध होता है जिसमें श्री राम द्वारा खर दूषण का वध किया जाता है। उसके बाद सूर्पनखा रावण के पास जाती है जिसपर रावण साधु के वेश में जाकर सीता का हरण करता है।



