भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं की कथा का कराया रसपान, पंडित घन्श्यामानंद ओझा ।

विनय मिश्र ,जिला संवाददाता।
देवरिया में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के मर्मज्ञ घनश्याम ओझा जी
महाराज ने कहा कि भगवान को माखन इसलिए अच्छा लगता हैं क्यूकि माखन भक्त का प्रतीक है। उन्होंने कथा में प्रवचन में समुन्द्र में कालीय नाग कि कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कालीय नाग बृज में समुन्द्र में रहता था कोई समुन्द्र में जाता तो उससे वह मार देता था ।
उन्होंने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया की 7 कोस लंबे चौड़े कालिकाल के देवता गोवर्धननाथ को 7 वर्ष के कन्हैया ने अपने सबसे छोटी उगली में 7 दिनरात अपनी अंगुली पर रखा। भगवान धारण किए रहे इंद्र देव का अभिमान तोड़ा। इस लिए जीव को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए और कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए,जिससे कर्म करोगे तो फल मिलेगा इसलिए भगवान ने भी कर्म को प्रधान बताते हुए कहा कर्म करना जीव का धर्म है फल देना मेरा काम है। राजेश्वर तिवारी हैप्पी शुक्ला राम रतन गुप्ता अशोक आशुतोष डॉक्टर गोविंद जी शुक्ला तारकेश्वर शुक्ला विजय लक्ष्मी शुक्ला डॉक्टर और किशोर शुक्ला पत्रकार जय बाबू दुर्गेश्वर सिंह माखन जी इत्यादि उपस्थित रहे।



