AZAMGARH News:प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सार्थक एवं प्रभावी प्रयासों से अब उन्नत खेती व खुशहाल किसान
अन्नदाता किसानों के उत्थान व उनके स्वालंबन हेतु निरंतर प्रयासरत केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार

आजमगढ़ 01 मई 2026:आज के दौर में खेती केवल पारंपरिक जीविका का साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह एक लाभकारी और आधुनिक व्यवसाय के रूप में उभर रही है। अन्नदाता किसानों के उत्थान व उनके स्वालंबन हेतु निरंतर प्रयासरत हैं केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार। बदलते समय के साथ यदि किसान नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। प्रदेश में कृषि की असीमित संभावनाओं से कृषकों को अधिकाधिक लाभान्वित करने और अर्थव्यवस्था को गति देने हेतु योगी सरकार ने इस क्षेत्र में सक्रिय प्रयास किए हैं। उच्च गुणवत्ता वाले बीज, हाइब्रिड किस्में और जैविक बीजों ने फसल की उपज और उत्पादकता को बढ़ावा दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के प्रभावी प्रयासों व नवाचारों के फलस्वरुप कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व परिणाम प्राप्त हुए हैं जिससे कृषकों को प्रत्यक्ष रूप से अधिक उपज एवं आय प्रदान करने के साथ ही कृषि क्षेत्र की राष्ट्रीय उत्पादन में हिस्सेदारी बढ़ी है।जिलाधिकारी आजमगढ़ रविंद्र कुमार के कुशल मार्गदर्शन व निर्देशन में कृषि व उद्यान विभाग नवाचार प्रयोगों की तरफ तेजी से अग्रसर हुआ है। जिलाधिकारी द्वारा समय-समय पर समीक्षा बैठक कर तथा फील्ड भ्रमण के दौरान कृषकों को उद्यान व कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर योजनाओं से आच्छादित कर लाभान्वित करने का सतत प्रयास किया जाता है।ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है जनपद आजमगढ़ के विकास खंड अजमतगढ़ के ग्राम मेघई खास निवासी कृषक मनोहर सिंह की, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और नई तकनीकों को अपनाकर खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।मनोहर सिंह, जो स्नातक शिक्षित हैं, ने 1.50 हेक्टेयर कृषि भूमि पर उन्नत खेती अपनाया। पहले वे भी अन्य किसानों की तरह पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। उनकी खेती पूरी तरह परंपरागत तरीकों से होती थी, जिसमें अधिक श्रम, अधिक लागत और कम लाभ जैसी समस्याएं आम थीं। सिंचाई के लिए अधिक पानी और श्रम की आवश्यकता पड़ती थी, वहीं रोपाई और निराई-गुड़ाई में भी काफी खर्च आता था। इन सभी कारणों से खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही थी, जबकि उत्पादन और मुनाफा अपेक्षाकृत कम था।
समस्याओं से संघर्ष का दौर
मनोहर सिंह बताते हैं कि पहले खेती करना उनके लिए एक चुनौती से कम नहीं था। पारंपरिक सिंचाई व्यवस्था के कारण पानी की बर्बादी होती थी और समय पर सिंचाई न होने से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। इसके अलावा, कीट और रोगों का प्रकोप भी फसलों को नुकसान पहुंचाता था, जिससे उत्पादन में कमी आती थी। बाजार में भी उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। इस कारण खेती से मिलने वाली आय इतनी नहीं थी कि परिवार की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सके।श्रम लागत भी एक बड़ी समस्या थी। मजदूरों की उपलब्धता और बढ़ती मजदूरी के कारण खेती का खर्च और बढ़ जाता था। इन सब समस्याओं के चलते मनोहर सिंह को कई बार यह महसूस होता था कि खेती छोड़कर कोई अन्य कार्य किया जाए, लेकिन अपनी जमीन और खेती से जुड़ाव के कारण उन्होंने हार नहीं मानी।
औद्यानिकी खेती से आया बदलाव
मनोहर सिंह के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें जिलाधिकारी आजमगढ़ रविंद्र कुमार के कुशल मार्गदर्शन व निर्देशन में उद्यान विभाग,आजमगढ़ द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनाओं की जानकारी मिली। एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एम आई डी एच) योजना अंतर्गत उद्यान विभाग द्वारा संचालित योजनाएं-नवीन दिशा निर्देश में उच्च मूल्य वाली फसलें जैसे-ड्रैगन फ्रूट,स्टाबेरी,खजुर को सम्मिलित करते हुए कास्ट नार्मस संसोधित कर सुगन्धित फसलों, औषधीय फसलों ,पुष्प तथा बीज वाले मसाले, शंकर शाक भाजी में हरी मटर एवं युरोपियन सब्जियों की खेती पर लाभ दिया जाता है । कास्ट नॉर्मस/अनुदान में वृद्धि की गई हैं।कृषक मनोहर ने योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की और उन्हें अपनाने का निर्णय लिया। यही निर्णय उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।उन्होंने सबसे पहले “पर ड्रॉप, मोर क्रॉप माइक्रो इरिगेशन योजना” से ड्रिप सिंचाई प्रणाली को अपनाया। इस तकनीक के माध्यम से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधों को पर्याप्त नमी मिलती है। इस प्रणाली से लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हुई। साथ ही, खाद भी सीधे जड़ों तक पहुंचने लगी, जिससे पौधों का विकास बेहतर हुआ।इसके अलावा, उन्होंने उन्नतशील बीजों का प्रयोग शुरू किया। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई। उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ टमाटर, विभिन्न सब्जियां, फल और औषधीय पौधों की खेती भी शुरू की। यह विविधता उनके लिए लाभकारी साबित हुई।
आधुनिक तकनीकों का समावेश
मनोहर सिंह ने केवल नई फसलें ही नहीं अपनाईं, बल्कि आधुनिक कृषि तकनीकों को भी अपने खेत में लागू किया। उन्होंने मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार की वृद्धि कम होती है। इससे श्रम की आवश्यकता कम हुई और लागत में कमी आई।उन्होंने स्वयं पौध उत्पादन की लोटनल विधि अपनाई, जिससे उन्हें बाहरी स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। इससे उनकी लागत और कम हुई तथा पौधों की गुणवत्ता पर उनका नियंत्रण बढ़ा। फसल रोपण में उन्होंने वैज्ञानिक दूरी का पालन किया, जिससे पौधों को पर्याप्त स्थान मिला और उनका विकास बेहतर हुआ। इससे उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।
लागत और आय का विश्लेषण
मनोहर सिंह की सफलता को उनके आर्थिक आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। उन्होंने अपनी फसल उत्पादन में कुल लगभग 2 लाख रुपये की लागत लगाई। आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के कारण उन्हें लगभग 150 कुंतल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उन्हें कुल लगभग 9 लाख रुपये की आय हुई। यदि लागत को घटाया जाए, तो उनकी शुद्ध आय लगभग 7 लाख रुपये रही। यह आय पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।
बहु-फसली खेती का लाभ
मनोहर सिंह का एक महत्वपूर्ण निर्णय था – बहु-फसली खेती अपनाना। उन्होंने एक ही खेत में अलग-अलग समय पर विभिन्न फसलों का उत्पादन करना शुरू किया। इससे उन्हें कई लाभ मिले।पहला, बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हुआ। यदि किसी एक फसल का मूल्य कम भी हुआ, तो अन्य फसलों से इसकी भरपाई हो जाती थी। दूसरा, साल भर आय का स्रोत बना रहा, जिससे आर्थिक स्थिरता आई।फल, सब्जियां और औषधीय पौधों की खेती से उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में 3 से 5 गुना अधिक लाभ मिला। कम भूमि में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता ने उनकी आय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
स्थानीय बाजार में सफलता
मनोहर सिंह अपनी उपज को स्थानीय मंडी में बेचते हैं। उनकी फसल की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण उन्हें अच्छा मूल्य मिलता है। नियमित तुड़ाई और बाजार में समय पर आपूर्ति से उनकी विश्वसनीयता भी बढ़ी है।उनकी सफलता को देखकर आसपास के किसान भी उनसे प्रेरणा ले रहे हैं और उनकी तकनीकों को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं।
परिणाम और प्रभाव
आज मनोहर सिंह एक सफल और प्रगतिशील किसान के रूप में जाने जाते हैं। उनकी खेती न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बन रही है.उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि सही जानकारी, उचित मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।
अन्य किसानों के लिए संदेश
मनोहर सिंह अन्य किसानों से अपील करते हैं कि वे परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को भी अपनाएं। वे कहते हैं कि उद्यान विभाग से संपर्क कर उन्नत बीज, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। वे यह भी कहते हैं कि किसान को नई चीजें सीखने और अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर खेती को आधुनिक बनाया जा सकता है।मनोहर सिंह की कहानी यह दर्शाती है कि खेती में सफलता केवल भूमि या संसाधनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही सोच, नवीन तकनीकों को अपनाने की इच्छा और निरंतर प्रयास पर आधारित होती है। उन्होंने अपनी मेहनत और सूझबूझ से न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि खेती को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया। उनकी यह सफलता कहानी अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत है और यह संदेश देती है कि बदलाव संभव है, बस सही दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।यह कहानी केवल एक कृषक की सफलता नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो सही नीतियों, प्रशासनिक सक्रियता और अन्नदाताओं की मेहनत से जन्म लेता है। आजमगढ़ जनपद आज एक ऐसे मॉडल के रूप में उभर रहा है, जहां उन्नत खेती, खुशहाल किसान केवल परंपरा नहीं, बल्कि प्रगति और समृद्धि का माध्यम बन रही है। आने वाले समय में यह परिवर्तन और व्यापक होगा और देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।कृषक मनोहर सिंह मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम हो, तो कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता हैअंततः, यह कहा जा सकता है कि कृषक की सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता, प्रशासनिक सहयोग और अन्नदाता शक्ति के सामर्थ्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ऐसी प्रेरणादायक कहानियां समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और अन्य लोगों को भी आगे बढ़ने का हौसला देती हैं।



