अखिलेश से फोटो के 5 हजार, हाथ मिलाने के 10 हजार! राजभर के आरोप से यूपी की राजनीति गरम
अखिलेश से फोटो के 5 हजार और हाथ मिलाने के 10 हजार!' राजभर का बड़ा दावा, सपा पर लगाए गंभीर आरोप, राजनीतिक गलियारों में मचा बवाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर लगातार तेज होता जा रहा है। सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।राजभर ने इस बार सोशल मीडिया पर एक खुला पत्र जारी करते हुए ऐसा दावा किया है, जिसने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ता स्वयं उनके पास पहुंचे और उन्होंने शिकायत की कि अखिलेश यादव से मिलने, उनके सुरक्षा घेरे तक पहुंचने, फोटो खिंचवाने और हाथ मिलाने तक के लिए कथित तौर पर हजारों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।राजभर ने अपने पत्र में इन आरोपों का विस्तार से उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव को सलाह दी कि यदि इस तरह की व्यवस्था वास्तव में चल रही है तो उसे तत्काल बंद कर देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले चुनावों में इसका गंभीर राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर लिखा खुला पत्र
ओम प्रकाश राजभर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए पत्र में कहा कि कुछ लोग, जो खुद को समाजवादी पार्टी के समर्पित यादव कार्यकर्ता बताते हैं, उनसे मिलने पहुंचे थे। उनके अनुसार इन कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचना अब आम कार्यकर्ताओं के लिए बेहद कठिन हो गया है।राजभर ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं ने उनसे कहा कि अखिलेश यादव से मुलाकात करने या उनके सुरक्षा घेरे तक पहुंचने के लिए कथित रूप से पैसे देने पड़ते हैं। उन्होंने लिखा कि कार्यकर्ताओं ने उनसे आग्रह किया कि वे मंत्री होने के नाते यह बात अखिलेश यादव तक पहुंचाएं ताकि गरीब और समर्पित कार्यकर्ताओं को राहत मिल सके।
फोटो के लिए 5 हजार, हाथ मिलाने के लिए 10 हजार रुपये का दावा
अपने पत्र में ओम प्रकाश राजभर ने सबसे बड़ा आरोप यह लगाया कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि अखिलेश यादव के साथ एक फोटो खिंचवाने के लिए कथित तौर पर 5,000 रुपये तक लिए जाते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि हाथ मिलाने के लिए भी 8,000 से 10,000 रुपये तक की वसूली की जाती है।हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में राजभर ने कोई दस्तावेज, ऑडियो, वीडियो या अन्य सार्वजनिक प्रमाण साझा नहीं किया। वहीं, समाचार लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
धरतीपुत्र के पुत्र’ पर कसा तंज
ओम प्रकाश राजभर ने अपने पत्र में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए उन्हें ‘धरतीपुत्र के पुत्र’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसी वसूली वास्तव में हो रही है तो इसकी जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है।उन्होंने लिखा कि एक ऐसे नेता, जो किसानों, गरीबों और समाजवाद की राजनीति की बात करते हैं, उनके कार्यकर्ताओं को यदि अपने ही नेता से मिलने के लिए पैसे खर्च करने पड़ें तो यह गंभीर विषय है।राजभर ने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं की शिकायतें सही हैं तो यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक रूप से भी चिंताजनक स्थिति है।
संपत्ति को लेकर भी उठाए सवाल
पत्र में राजभर ने अखिलेश यादव की संपत्ति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि समय के साथ उनकी संपत्ति में लगभग 900 गुना तक वृद्धि हुई है।इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल किया कि यदि इतनी अधिक संपत्ति पहले से मौजूद है तो फिर कथित तौर पर इस प्रकार की अतिरिक्त आय जुटाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ रही है।हालांकि, राजभर ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या चुनावी हलफनामे का उल्लेख नहीं किया।
चुनावी नुकसान की दी चेतावनी
अपने पत्र में राजभर ने अखिलेश यादव को राजनीतिक चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और कथित वसूली बंद नहीं हुई तो इसका असर आगामी विधानसभा चुनावों में दिखाई देगा।उन्होंने लिखा कि केवल जनता ही नहीं बल्कि वे कार्यकर्ता भी नाराज हो जाएंगे, जो वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत करते आए हैं। ऐसे कार्यकर्ता चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।राजभर ने कहा कि यदि स्थिति नहीं बदली तो समाजवादी पार्टी के लिए नेता प्रतिपक्ष बनने लायक सीटें बचाना भी मुश्किल हो सकता है।
हम आपको दुश्मन नहीं, मित्र मानते हैं
पत्र का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जिसमें ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि भले ही अखिलेश यादव उन्हें अपना राजनीतिक विरोधी मानते हों, लेकिन वे उन्हें अपना मित्र मानते हैं।
उन्होंने लिखा
आप सोच रहे होंगे कि कार्यकर्ता आपके हैं, वसूली आपकी है, घेरा आपका है तो उसमें हम क्यों बीच में आ गए। दो वजह से हमें आना पड़ा। पहली वजह यह है कि आप हमें चाहे दुश्मन समझें, लेकिन हम आपको अपना मित्र मानते हैं। दूसरी वजह यह है कि आपके कार्यकर्ता अपना दर्द लेकर मेरे पास आए। उन्होंने कहा कि मंत्री जी, आप यह बात अखिलेश भइया तक पहुंचा दीजिए। शायद आपकी बात वह सुन लें।”
राजभर ने आगे लिखा कि कार्यकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर थे, इसलिए उन्होंने उनकी पीड़ा को गंभीरता से लिया और मित्र होने के नाते यह सलाह देना अपना दायित्व समझा।
मीटिंग का सौदा बंद कराइए
पत्र के अंत में ओम प्रकाश राजभर ने बेहद तीखे शब्दों का प्रयोग करते हुए लिखा
मित्र के रूप में आपको समझा रहा हूं। अपनी मीटिंग का सौदा बंद करवाइए, वरना बहुत महंगा पड़ सकता है।यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और राजनीतिक हलकों में इसकी काफी चर्चा हो रही है।
पहले भी कई बार आमने-सामने आ चुके हैं दोनों नेता
यह पहला मौका नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर इस तरह का हमला बोला हो। पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी बयानबाजी देखने को मिली है।एक समय समाजवादी पार्टी के सहयोगी रहे राजभर अब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा हैं और लगातार समाजवादी पार्टी की नीतियों तथा नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं।वहीं अखिलेश यादव भी कई मौकों पर राजभर के राजनीतिक रुख और बयानों पर पलटवार कर चुके हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा का विषय बना रहता है।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
राजभर का यह पत्र सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई। समर्थकों और विरोधियों ने अपने-अपने तरीके से इस पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने राजभर के आरोपों की जांच की मांग की, जबकि कई लोगों ने इन आरोपों को चुनावी बयानबाजी करार दिया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी आगे भी और तेज हो सकती है।
सपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
समाचार लिखे जाने तक समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की ओर से ओम प्रकाश राजभर के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा इन दावों का क्या जवाब देती है और क्या इन आरोपों का खंडन करती है या किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई पर विचार करती है।



