अमझर नदी पर पुल का इंतजार: चतरा-पलामू सीमा के गांवों की राह कब होगी आसान?

वर्षों से पुल की आस में सीमावर्ती गांव, बरसात में अमझर नदी बन जाती है बड़ी बाधा

संजय पांडेय, झारखंड। चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत डुमरवार पंचायत का अमझर नदी क्षेत्र आज भी एक ऐसे स्थायी पुल का इंतजार कर रहा है, जो आसपास के गांवों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ सके। ग्रामीणों के अनुसार नदी पर पुल नहीं होने के कारण सामान्य दिनों में भी आवागमन कठिन रहता है और बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है।अमझर नदी के आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी पर उपयुक्त स्थान पर पुल बन जाने से चतरा की ओर आने-जाने वाले कई गांवों के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। चतरा-पलामू सीमा क्षेत्र में स्थित डुमरवार पंचायत के लिए यह केवल एक पुल का सवाल नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार तक आसान पहुंच का भी सवाल है। नदी पार करना आज भी ग्रामीणों की मजबूरी ग्रामीणों के मुताबिक नदी के आसपास रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए नदी पार करनी पड़ती है। बरसात में जलस्तर बढ़ने पर यह रास्ता और कठिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चों की स्कूल तक पहुंच, मरीजों को अस्पताल ले जाना और कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से पुल की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। यही कारण है कि ग्रामीण अब यह जानना चाहते हैं कि अमझर नदी पर पुल निर्माण का प्रस्ताव कभी सरकारी स्तर पर तैयार हुआ या नहीं, यदि हुआ तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और निर्माण के लिए आगे की प्रक्रिया कब पूरी होगी? चतरा-पलामू सीमा का महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु: डुमरवार पंचायत भौगोलिक दृष्टि से चतरा-पलामू सीमा क्षेत्र में स्थित है। ऐसे इलाकों में सड़क और पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं केवल स्थानीय आवागमन को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि आसपास के कई गांवों के सामाजिक और आर्थिक संपर्क को भी प्रभावित करती हैं।

यदि अमझर नदी पर तकनीकी सर्वेक्षण के बाद उपयुक्त स्थान पर पुल का निर्माण होता है, तो इसके संभावित लाभ कई स्तरों पर दिखाई दे सकते हैं।

चतरा की ओर आवागमन सुगम हो सकता है।

सीमावर्ती गांवों को बाजार और प्रखंड मुख्यालय से बेहतर संपर्क मिल सकता है। बरसात में नदी पार करने की समस्या कम हो सकती है। विद्यार्थियों को विद्यालय-कॉलेज तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में समय कम हो सकता है। एबुलेंस और अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही बेहतर हो सकती है। किसानों को कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकती है। स्थानीय व्यापार और छोटे कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। गुरतुरी गांव भी पुल का इंतजार कर रहा

डुमरवार पंचायत में पुल की समस्या केवल अमझर नदी तक सीमित नहीं बताई जाती। पंचायत के गुरतुरी गांव स्थित नदी पर भी पुल नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन प्रभावित होता है। इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि सीमावर्ती और दुर्गम पंचायतों में नदी-पार संपर्क को लेकर प्रशासन की दीर्घकालीन योजना क्या है।

आश्वासन से आगे कब बढ़ेगा मामला?: स्थानीय ग्रामीणों के बीच यह धारणा भी है कि विभिन्न जनप्रतिनिधियों के समक्ष पुल की मांग रखी जाती रही है। अब ग्रामीण आश्वासन के बजाय प्रस्ताव, स्वीकृति, सर्वेक्षण और निर्माण की स्पष्ट समयसीमा चाहते हैं।

हालांकि, किसी भी जनप्रतिनिधि या विभाग पर यह आरोप लगाने से पहले सरकारी रिकॉर्ड से यह सत्यापित करना जरूरी होगा कि अमझर नदी पुल के लिए पूर्व में कौन-कौन से प्रस्ताव भेजे गए, कब भेजे गए और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है।

 

अमझर नदी पर पुल को लेकर अब यहां के ग्रामीण और समाजसेवियों के कुछ सीधे सवाल हैं जिनका जवाब वे चाहते हैं। क्या पुल निर्माण के लिए कोई सरकारी प्रस्ताव तैयार हुआ है? क्या स्थल का तकनीकी सर्वेक्षण कराया गया है? पुल निर्माण के लिए कितनी लागत का अनुमान है?

किस विभाग के माध्यम से इसका निर्माण प्रस्तावित है? यदि प्रस्ताव भेजा गया है तो वह किस स्तर पर लंबित है? क्या वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए कोई प्रावधान किया गया है? इन सवालों के जवाब सरकारी दस्तावेजों से सामने आने चाहिए।

 

स्थानीय कारोबारियों और ग्रामीणों का मानना है कि अमझर नदी पर पुल बनने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। बेहतर संपर्क होने पर किसान अपनी उपज आसानी से बाजार तक ले जा सकेंगे और ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करने की मजबूरी कम हो सकती है।

लेकिन किसी भी पुल निर्माण की व्यवहार्यता का अंतिम निर्णय तकनीकी सर्वेक्षण, यातायात आवश्यकता, स्थल की स्थिति, अनुमानित लागत और संबंधित विभाग की स्वीकृति के आधार पर ही किया जा सकता है। अमझर नदी पर पुल का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल नदी के दोनों किनारों को जोड़ने का मामला नहीं है। यह उन ग्रामीण परिवारों को बेहतर संपर्क देने का सवाल है, जो वर्षों से सड़क, बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब जरूरत इस बात की है कि अमझर नदी पुल की मांग को आश्वासन से निकालकर सरकारी रिकॉर्ड, तकनीकी सर्वेक्षण और ठोस कार्ययोजना तक पहुंचाया जाए। ग्रामीणों की निगाह अब इसी सवाल पर है—अमझर नदी पर पुल आखिर कब बनेगा?

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