आजमगढ़:चार घंटे में बदली असहाय वृद्धा की जिंदगी, प्लास्टिक के सहारे रहने वाली महिला को अंबिका सेवा संस्थान ने दी करकट की छत
Azamgarh: In four hours, the life of a helpless elderly woman changed; Ambika Seva Sansthan provided a tin roof made of rags to the woman who had been living on plastic.
गंभीरपुर /आजमगढ़। कड़कड़ाती धूप हो या मूसलाधार बारिश, रानीपुर रजमो की एक असहाय वृद्धा वर्षों से बांस और फटे प्लास्टिक के सहारे जिंदगी गुजारने को मजबूर थी। गरीबी और बेबसी के बीच उसका जीवन किसी चुनौती से कम नहीं था। बारिश में जहां सिर छिपाने की जगह नहीं थी, वहीं गर्मी में भी प्लास्टिक की अस्थायी छत ही उसका सहारा थी। ऐसे में अंबिका सेवा संस्थान के युवाओं ने आगे बढ़कर न केवल उसकी परेशानी देखी, बल्कि महज चार घंटे में उसके सिर पर सुरक्षित छत खड़ी कर दी।बताया गया कि करीब तीन दिन पहले अंबिका सेवा संस्थान की टीम रानीपुर रजमो के ग्रामीण क्षेत्र से गुजर रही थी। इसी दौरान मूसलाधार बारिश के बीच एक बांस के सहारे प्लास्टिक के नीचे भीगती महिला पर उनकी नजर पड़ी। महिला की स्थिति देखकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तत्काल उसकी मदद करने का निर्णय लिया।दो दिन बाद संस्थान के बैनर तले मदद अभियान शुरू किया गया। कार्यकर्ताओं ने गांव पहुंचकर बल्लियों के सहारे करकट (टिनशेड) की मजबूत छत तैयार की। करीब चार घंटे की मेहनत के बाद महिला को वर्षों बाद प्लास्टिक की जगह एक सुरक्षित छत नसीब हुई।संस्थान की ओर से महिला को कंबल, नई साड़ी व कपड़े तथा खाने-पीने की आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। इस दौरान संस्थान के प्रभारी अभिषेक उपाध्याय, प्रमोद सोनी, पवन अस्थाना, लकी श्रीवास्तव, रिंकू विश्वकर्मा और शैलेश प्रजापति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।स्थानीय ग्रामीणों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जरूरतमंद की मदद के लिए केवल बातें नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर काम करने की जरूरत है। अंबिका सेवा संस्थान के युवाओं ने कुछ घंटों में एक असहाय महिला को सुरक्षित आशियाना देकर मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल पेश की है।



