स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी कैलाश पति मिश्र “पहाडी “की पुण्यतिथि पर दी गयी भावभीनी श्रद्धांजलि।

रिपोर्ट विनय मिश्रा

देवरिया । महान स्वतन्त्रता सेनानी कैलाश पति मिश्र ” पहाडी” की पुण्य तिथि पर जनपद स्थित उनके पैतृक गांव पिपराभुल्ली मे श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया जिसमे क्षेत्र के बुद्धिजीवियों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया ।

कार्यक्रम की शुरुआत मे कैलाश पहाडी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गयी ।कार्यक्रम का संचालन पहाडी जी के प्रपौत्र “नाती” अमित पहाडी ने किया। कार्यक्रम मे उपस्थित लोगों ने पहाडी के ब्यक्तित्व और कृतित्व तथादेश की आजादी के लिए उनके द्वारा किये गये संघर्षों पर ब्यापक प्रकाश डाला।

इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के जिलासचिव एवं समाजवादी चिंतक रामविलास प्रजापति ने भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के कुछ महत्वपूर्ण घटनाओ का जिक्र करते हुए उनके संघर्षो का विस्तृत उल्लेख किया । गौरतलब है कि प्रजापति की गिनती उनके अत्यंत निकटतम लोगों मे की जाती है । उन्होंने ऐतिहासिक सहजनवा ट्रेन डकैती काण्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय क्रांतिकारियों के भोजन और हथियार खरीदने के लिए रुपयों की शख्त जरूरत थी इसलिए सरकारी खजानों को लूटने की योजना बनायी गयी ।इस क्रम मे गोरखपुर मन्दिर के बगीचे मे क्रांतिकारियों की एक बैठक हुई ।बैठक मे सहजवां मे ट्रेन को रोककर खजाना लूटने का निश्चय किया गया ।तिथि और जगह भी तय कर दिया गया ।इस घटना को अंजाम देने की जिम्मेदारी गाजीपुर के बालरूप शर्मा और कैलाश पहाडी को दी गयी ।

24 मार्च 1942 को सहजनवां” गोरखपुर ” मे आमी नदी के निकट ट्रेन की जंजीर खींचकर रोक दिया गया और गार्ड को कब्जे मे लेकर खजाने के बक्शे को तोड दिया गया।इस दौरान सहजनवां गांव के सैकडों लोग लाठी भाला लेकर वहां आ गये गांव के उमड़ हुजूम को देखकर मोर्चा संभालने के लिए पहाडी से कहा गया ।वहां पहाडी ने बडी बुद्धिमानी से काम लिया ,उन्होंने ग्रामीणों के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि हमलोग भगतसिंह और चन्द्रशेखर के आदमी है डकैत नहीं हैं ।क्रांतिकारियों के भोजन और उन्हे हथियार खरीदने के लिए सरकारी पैसा लूट रहे है। गांव के लोग उनकी बात मान गये और वापस चले गये । गौरतलब है कि वहां थोडी सी चूक होने पर सभी क्रातिकारियों की जान जा सकती थी ।इस घटना मे बकौल पहाडी छोटक ऊ मिश्र गोरखपुर, रामनारायण गाजीपुर, बैजनाथ सिंह भउवापार गोरखपुर, बालरूप शर्मा(कुशवाहा) गाजीपुर, हरिप्रताप तिवारी वाराणसी, कैलाश पति मिश्र पहाडी सहित ग्यारह क्रांतिकारियों ने हिस्सा लिया। इस लूटपाट मे सोलह हजार रुपए प्राप्त हुए थे ।

सभी क्रांतिकारी सकुशल वहां से भाग निकले किन्तु बाद मे सभी पकड लिये गये ।पहाडी को गोरखपुर जेल मे डाल दिया गया । दो साल कडी यातना सहने के बाद अपने साथियों की मदद से दिन मे बारह बजे पैर मे लगी बेडी सहित जेल की दीवार फांदकर भाग निकले और नगवानरायनपुर गांव मे पहुंचे।वहां उनके पैरों की बेटियां काटी गयीं वे फरारी जीवन बिताने लगे ।उनके ऊपर ब्रिटिश हुकूमत ने इनाम रखा और ऐलान किया गया कि पहाडी को जिन्दा या मुर्दा पकड़वाने वालेको इनाम दिया जायेगा ।

उस समय देवरिया जनपद के जरार गांव के एक क्रांतिकारी फतेहगढ जेल मे बन्द थे जो कैलाश को जानते थे ,उनसे कहा गया कि यदि कैलाश को गिरफ्तार करवा दोगे तो तुम्हे रिहा कर दिया जायेगा ।बकौल पहाडी उनकी मुखबिरी से चार थाना की पुलिस और अन्य 250 लोगों ने मुझे घेर लिया और पहाडी गिरफ्तार कर लिये गये गये ।उन्हे पुन: जेल मे डाल दिया गया ।बडी मार पडी थी ।अंग्रेजों ने इन्हे डकैत घोषित किया ।उनके मुकदमे की सुनवाई जेल मे होती थी ।उनके नाक और पेशाब मार्ग से खून आ रहा था ।उस समय जेल मे सिम्बनलाल सक्सेना जैसे सत्याग्रही उस जेल मे बन्द थे ।पहाडी की हालत देखकर सभी अनशन पर बैठ गये और सही इलाज करने की मांग की ।दवा की ब्यवस्था हुई और इन्हे लखनऊ जेल मे भेज दिया गया ।

इसके पूर्व पहाडी ने खोडा के सकलदेव सिह के साथ वाराणसी मे लंका पोस्ट आफिस तथा देवरिया के गडेर गांव के पोस्ट आफिस को लूटा था ।पहाडी एक खूंखार क्रांतिकारी थे ।इनके नाम से अंग्रेज अधिकारी कांपते थे । पहाडी को विभिन्न मुकदमा मे दोहरे कालापानी की सजा हुई थी ।उनके जेल मे रहते देश आजाद हो गया ।सभी क्रांतिकारी जेल से रिहा हो गये किन्तु सहजनवां काण्ड के अभियुक्त नही छुटे। तत्कालीन गृहमंत्री ने रिहाई परवाना जारी किया किन्तु हैलट साहब अंग्रेज ने अपना हस्ताक्षर नही किया ।इसपर गृहमंत्री ने इस्तीफा दे दिया ।काफी हंगामा हुआ और जगह जगह अनशन प्रदर्शन होने लगा ।यह मुद्दा राष्ट्रीय मुद्दा बन गया अन्त मे गृहमंत्री का इस्तीफा वापस हु आ तथा सभी की रिहाई हो गयी । देश की आजादी के लिए किये गये पहाडी के संघर्षो को भुलाया नही जा सकता ।हम आज के दिन उन्हे शत शत नमन करते हैं और उनके श्री चरणो मे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते है ।इस अवसर पर अंजनी कुमार उपाध्याय, भगवान उपाध्याय, कवि रामेश्वर प्रसाद यादव, रमेश तिवारी अनजान सॅजय प्रजापति,आद्यामिश्र, होसिला मिश्र,डाक्टर बृजेन्द्र मोहन त्रिपाठी,देवेन्द्र मिश्र, दलसिंगार यादव, मुलायम यादव, मंगेश मिश्र, आशुतोष मिश्र, लालचंद गोंड, प्रिंसतिवारी, सुन्दरम मिश्र, सन्तोष यादव, हरिसंगम तिवारी, मुक्तीनाथ, मोहन यादव प्रघान आदि उपस्थित रहे ।

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