स्मृति शेष शरत: ‘नेताजी के ‘द ग्रेट एस्केप’ के प्रणेता, नहीं रोक पाए विभाजन

Smriti Shesh Sharat: The pioneer of 'Netaji's 'The Great Escape', could not stop the partition

 

नई दिल्ली: भारतीय इतिहास में कई ऐसे लोग हुए, जिनका जीवन हमारे लिए प्रेरणादायक रहा है। कई ऐसे नाम हैं, जो हर दिन गौरव के साथ लिए जाते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई ऐसे चेहरे सामने आए, जो आज भी हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन्हीं में से एक नाम है शरत चंद्र बोस। 6 सितंबर 1889 को पैदा हुए शरत जी स्वतंत्रता सेनानी और बैरिस्टर थे। वह ‘नेताजी’ सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई थे। आज उनकी जयंती है। इस कारण उनका जिक्र करना बेहद खास है।शरत चंद्र बोस की जिंदगी में कई उपलब्धियां रही, कई प्रसंगों से उनका प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़ाव रहा। उनकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है सुभाष चंद्र बोस के ‘द ग्रेट एस्केप’ की योजना से।

कहा जाता है कि नेताजी के ‘द ग्रेट एस्केप’ की योजना सिलीगुड़ी के निकट दार्जिलिंग के कर्सियांग में स्थित गिद्धा पहाड़ के ‘हॉलिडे होम’ में बनाई गई थी। यह घर नेताजी का था, जिसमें आखिरी बार वह साल 1939 में पधारे थे। यह जगह सिलीगुड़ी से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गिद्धा पहाड़ पर नेताजी का ऐतिहासिक घर म्यूजियम की शक्ल में आज भी मौजूद है।मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय लोगों की मानें तो यह घर शरत चंद्र बोस ने 1922 में एक अंग्रेज से खरीदा था। यह घर नेताजी के परिवार के लिए एक ‘हॉलिडे होम’ था, जहां पर उनका परिवार छुट्टियां बिताने आया करता था। शरत चंद्र बोस अपने परिवार के साथ अक्सर इसी घर में रहने के लिए पहुंचते थे।कोलकाता के एल्गिन रोड पर बोस के घर के बाहर एक गाड़ी अभी भी खड़ी है। 1937 की ऑडी का सुभाष चंद्र बोस के ‘द ग्रेट एस्केप’ से खास कनेक्शन है। ऐतिहासिक तथ्यों की मानें तो बोस परिवार ने भारत की पहली ऑडी खरीदी थी। जिस घर के बाहर यह गाड़ी है, वहीं से नेताजी अंग्रजों को चकमा देकर फरार हुए थे। माना जाता है कि नेताजी के ‘द ग्रेट एस्केप’ की प्लानिंग शरत चंद्र बोस ने की थी। कहा जाता है कि फरार होने के बाद नेताजी झारखंड के गोमो रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। इसके बाद ‘आजाद हिंद फौज’ का गठन करके अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई तेज की थी।शरत चंद्र बोस की उपलब्धियों पर काफी-कुछ लिखा गया है। उनके बारे में शिशिर कुमार बोस ने ‘शरत चंद्र बोस : रिमेम्बरिंग माई फादर’ में लिखा है, “यह जीवनी दो असाधारण भाइयों की कहानी है। एक जाने-माने बैरिस्टर और सार्वजनिक व्यक्ति, जो ब्रिटिश भारत में एक प्रभावशाली शक्ति थे और दूसरे इस देश के एक क्रांतिकारी और राष्ट्रीय नायक, जिन्हें दुनिया ‘नेताजी’ के रूप में याद करती है और उनका आज भी बेहद सम्मान करती है।”महान विभूति शरत चंद्र बोस की बात करें तो वह 1947 तक कांग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य थे। वह 1946 में बनी अंतरिम सरकार में भी शामिल हुए। उन्होंने विभाजन का विरोध किया था और कांग्रेस से भी इस्तीफा दे दिया था। उनकी तमाम कोशिश भी विभाजन को नहीं टाल सकी। इस शानदार शख्सियत का निधन 20 फरवरी 1950 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था।

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