भिवंडी पश्चिम इंडिया गठबंधन के साथियों का कांग्रेस को नहीं मिल रहा सहयोग

Bhiwandi Paschim India alliance's allies did not get the support of the Congress

हिंद एकता टाइम्स भिवंडी

रवि तिवारी

भिवंडी -भिवंडी लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाताओं ने सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा को भारी मतो से जीत दिलाई थी। पर विधान सभा चुनाव में सांसद के कार्य शैली पर मतदाताओं ने प्रश्न चिंन्ह खडा़ कर दिया है। जिन मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव मेंं पुर्व केन्द्रीय मंत्री कपिल पाटील को हराकर उन्हे सांसद बनाया आज उसी क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी कांग्रेस उम्मीदवार दयानंद चोरघे अपने आप को अककेला महसूस कर रहे हैं।भिवंडी पश्चिम विधानसभा क्षेत्र लोकसभा चुनाव के दौरान सांसद सुरेश म्हात्रे को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई उसी विधान सभा क्षेत्र इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी कांग्रेस के दयानंद चोरघे को आ आज नदारत कर सिर्फ भिवंडी पुर्व विधानसभा को अपना खास बनाकर पश्चिम क्षेत्र को लावारिस छोड़ दिया है। चुनाव के दौरान मामा के समर्थन में नारे लगाते हुए मुस्लिम मतदाताओं के वीडियो सोशल मीडिया पर छाए थे। लेकिन आज वही मतदाता सवाल पूछ रहे हैं, “मामा, हमारे वोट का क्या हुआ ?” हम कहां जाये!?आज शनिवार १६ नवंबर को मामा ने अपने निवास पर इलेक्ट्रॉनिक व सोशल मीडिया के युटुबर के पत्रकारों को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। इस प्रेस काॅन्फ्रेंस में अखबारों के पत्रकारों को जानबूझकर दूर रखा गया और भिवंडी पूर्व के सपा उम्मीदवार रईस कासम शेख के कामों की तारीफों के पुल बांध दिए। इतना ही नहीं, उन्होंने मतदाताओं से शेख को जिताने की अपील भी कर डाली। सवाल ये है कि क्या मामा ने पश्चिम क्षेत्र के मतदाताओं को सिर्फ इस्तेमाल किया था ? जिसके बारे में उनके जुबान से कुछ नहीं निकला।भिवंडी पश्चिम में महाविकास आघाड़ी कांग्रेस के दयानंद चोरघे को उम्मीदवार बनाया गया है। लेकिन मामा ने सपा के रियाज़ आजमी का समर्थन करके गठबंधन तोड़ने का इशारा दे दिया। कांग्रेस के अपने ही नेता, विलास आर.पाटिल और आस्मां जव्वाद चिखलेकर ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे है। इस गड़बड़ी के बीच, मामा ने पश्चिम के मतदाताओं को पूरी तरह अनदेखा कर दिया। पश्चिम क्षेत्र के मतदाताओं का कहना है कि मामा को केवल चुनाव के वक्त उनकी याद आती है। एक मतदाता ने गुस्से में कहा, “हमने सोचा था कि मामा हमारे लिए आवाज उठाएंगे। लेकिन अब तो वो हमारे हाल पर छोड़कर पूर्व की राजनीति में मस्त हैं।” सवाल यह है कि क्या सुरेश म्हात्रे ने पश्चिम क्षेत्र के मुस्लिम मतदाताओं को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया ? लोकसभा चुनाव में जिन लोगों ने उनके लिए कपिल पाटिल को हराया, उन्हीं को आज उन्होंने भुला दिया और लावारिस छोड़ दिया आखिरकर वें 6 विधानसभाओ के सांसद हैं। जिसमें भिवंडी पश्चिम का इलाका भी आता है। मामा की इस दोगली राजनीति से पश्चिम क्षेत्र की जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यह आक्रोश आने वाले विधानसभा चुनाव में मामा और उनकी पार्टी के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
भिवंडी की जनता के बीच मामा की राजनीति को लेकर गुस्सा और नाराजगी का माहौल है। पश्चिम क्षेत्र के मतदाता यह तय कर चुके हैं कि अगली बार उनकी राजनीति का जवाब वोट की ताकत से दिया जाएगा।सांसद सुरेश म्हात्रे उर्फ बाल्या मामा के लिए अब मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सवाल यह है कि क्या वह पश्चिम क्षेत्र के मतदाताओं का भरोसा फिर से जीत पाएंगे, या यह ‘लावारिस’ जनता उनकी राजनीतिक जमीन खिसका देगी?

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