करिश्मा, स्मृति, पीहू, कविता और कनक को राज्यपाल के हाथों मिला प्रशस्ति पत्र

राजभवन अलंकरण समारोह -अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजभवन में बेहतर कार्य करने वालीं “आधी आबादी” सम्मानित

 

अजीत कुमार सिंह बिट्टू जी ब्यूरो चीफ हिंद एकता टाइम्स

जनपद बलिया

बलिया : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजभवन में आयोजित अलंकरण समारोह में महर्षि भृगु की धरती की पांच महिलाओं को भी राज्यपाल के हाथों प्रशस्ति पत्र प्राप्त करके सम्मानित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बलिया जनपद से सम्मानित होने वाली महिलाओं में करिश्मा वार्ष्णेव (शिक्षक), स्मृति सिंह (पूर्व प्रधान), प्रतिमा उपाध्याय पीहू (शिक्षक), कविता सिंह (शिक्षक) व कनक चक्रधर (शिक्षक) रहीं।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रदेश भर की उन महिलाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर अलंकृत करने का निर्णय लिया था जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो। बलिया जनपद से भी पांच महिलाओं को इस सूची श्रेणी में स्थान मिला।

करिश्मा वार्ष्णेव : राज्यपाल के हाथों सम्मानित करिश्मा वार्ष्णेव श्री शिवप्रसाद गुप्त इंटर कालेज टीकादेवरी नगपुरा की शारिरिक शिक्षक हैं। करिश्मा ने विद्यालयी क्रीड़ा प्रतियोगिता में अंडर-19 यूपी महिला क्रिकेट टीम में कोच की भूमिका निभाते हुए एक बार यूपी को स्वर्ण पदक और एक बार रजत पदक लगातार दिलाया।

स्मृति सिंह : राज्यपाल के हाथों सम्मानित स्मृति सिंह सामाजिक राजनीतिक जीवन में हैं। वह ग्राम पंचायत रतसरकला की ग्राम प्रधान भी रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की कई योजनाओं की ब्रांड एंबेसडर भी वह रही हैं।

प्रतिमा उपाध्याय : राज्यपाल के हाथों सम्मानित प्रतिमा उपाध्याय पीहू परिषदीय शिक्षक हैं। पीहू उपाध्याय राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक भी हैं। पीहू उपाध्याय पीएमश्री विद्यालय की प्रधानाध्यापिका होते हुए जिला निर्वाचन विभाग में भी बतौर ब्रांड एंबेसडर सेवा देती हैं।

कविता सिंह : राज्यपाल के हाथों सम्मानित कविता सिंह भी परिषदीय शिक्षक हैं। कविता सिंह बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ सामाजिक कार्यों में भी विशेष रुचि रखती हैं। वह बलिया इनव्हीलर क्लब में फतौर अध्यक्ष बहुत बेहतर योगदान दिया है।

कनक चक्रधर : राज्यपाल के हाथों सम्मानित कनक चक्रधर बेसिक शिक्षक हैं। स्कूल में बेहतर शिक्षा के साथ साथ वह उन बच्चों को भी पढाती हैं जो कतिपय कारणों से स्कूल जाने से वंचित हैं। कनक विद्यालयी क्रीडा आयोजन में भी बेहतर सेवा देती हैं और वह बतौर फील्ड आफिसर (एसजीएफआई) अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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