“ग़ाज़ा में जलते घर, भूखे बच्चे और निष्क्रिय विश्व: हमास ने कहा- ये कैसा न्याय?”,हमास बोला- शांति नहीं, दबाव है यह”,हमास ने कहा- संघर्षविराम नहीं, पहले न्याय”
"हथियार नहीं छोड़ेंगे जब तक संप्रभुता नहीं मिलेगी: हमास का दो टूक संदेश"

यरूशलेम की आज़ादी तक संघर्ष जारी रहेगा: हमास ने हथियार डालने से किया इनकार, फिलिस्तीन के संप्रभुता के लिए लड़ाई जारी रखने का ऐलान
गाज़ा/यरूशलेम, 3 अगस्त — इज़राइल और हमास के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष में एक बार फिर शांति की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है। हथियारबंद प्रतिरोध छोड़ने के अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव को हमास ने ठुकरा दिया है और दो-टूक शब्दों में साफ किया है कि जब तक “यरूशलेम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र, पूर्ण संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य” की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक वह हथियार नहीं डालेगा।
हमास का स्पष्ट रुख
रॉयटर्स के हवाले से आई जानकारी के अनुसार, हमास ने बयान जारी करते हुए कहा,
“हम सशस्त्र प्रतिरोध के अधिकार को तब तक नहीं छोड़ सकते जब तक कि फिलिस्तीन की जमीन, उसकी पहचान और यरूशलेम की पवित्रता की रक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में कतर, फ्रांस और मिस्र की मध्यस्थता में हमास और इज़राइल के बीच अप्रत्यक्ष शांति वार्ता संपन्न हुई थी। प्रस्ताव में 60 दिन के संघर्षविराम के बदले में हमास से हथियार छोड़ने और उन्हें फिलिस्तीनी प्राधिकरण को सौंपने की मांग की गई थी।
फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय की अवहेलना?
हमास ने साफ कर दिया है कि इस प्रकार का कोई भी प्रस्ताव फिलिस्तीनी जनता के ऐतिहासिक अधिकारों और स्वतंत्रता की भावना के विरुद्ध है। संगठन का कहना है कि जब तक गाज़ा और वेस्ट बैंक के नागरिकों को पूरी संप्रभुता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार नहीं मिल जाता, हथियार डालना आत्मसमर्पण के समान होगा।
इज़राइली हमले और मानवीय त्रासदी
इस बीच, गाज़ा में इज़राइली हवाई हमलों का कहर लगातार जारी है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक हजारों लोग इन हमलों में मारे जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या मासूम बच्चों और महिलाओं की है। लाखों नागरिक बेघर हो चुके हैं और गंभीर मानवीय संकट झेल रहे हैं, खाद्य आपूर्ति ठप है, स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त हो चुकी हैं और लोग कुपोषण व भुखमरी की कगार पर हैं।
दोहरे मानदंडों की आलोचना
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कुछ हिस्सों में इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि मध्यस्थ ताकतें केवल हथियारबंद प्रतिरोध को समाप्त करने पर ज़ोर दे रही हैं, जबकि इज़राइली बमबारी और फिलिस्तीनी भूमि पर कब्ज़ा जैसे मूल कारणों पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो रही। हमास और फिलिस्तीनी समर्थक समूह इस दोहरे मानदंड की आलोचना करते हुए इसे “शांति के नाम पर आत्मसमर्पण” करार दे रहे हैं।
हमास का संदेश दुनिया के लिए
अपने हालिया बयान में हमास ने वैश्विक समुदाय से अपील करते हुए कहा है कि
“यह संघर्ष केवल एक राजनीतिक सीमा या संगठन की जिद नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्र की आज़ादी, उसके आत्मसम्मान और अपने पवित्र स्थलों की रक्षा की लड़ाई है।”
इज़राइल और हमास के बीच जारी यह भीषण टकराव फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। जहां एक ओर इज़राइल शांति के नाम पर हथियारबंद प्रतिरोध के समर्पण की शर्त रख रहा है, वहीं हमास स्पष्ट कर चुका है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक फिलिस्तीनी जनता को उनकी जमीन, पहचान और राजधानी के रूप में यरूशलेम वापस नहीं मिल जाता।


