Azamgarh News: आजमगढ़ में बढ़ रही राज्य पक्षी सारस की आबादी,जिले में संख्या बढ़कर 15 हुई, सुरक्षित आवास और जल स्रोत बने मुख्य कारण

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय

आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण की दिशा में आजमगढ़ जनपद ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। वन विभाग द्वारा 15 व 16 दिसंबर को कराई गई शीतकालीन गणना में जिले में सारसों की कुल संख्या 15 दर्ज की गई है। बीते छह महीनों में सारसों की संख्या में 6 की वृद्धि से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों में खुशी की लहर है।गणना के अनुसार जीयनपुर रेंज स्थित ताल सलोना में सर्वाधिक 9 सारस पाए गए, जिनमें 8 वयस्क एवं 1 अवयस्क शामिल है। वहीं आजमगढ़ रेंज के बड़ैला ताल में 6 सारस पाए गए, जिनमें 5 वयस्क एवं 1 अवयस्क हैं। रेंजों में अवयस्क सारसों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह क्षेत्र सारसों के सफल प्रजनन के लिए अनुकूल बन चुका है।वन विभाग द्वारा जून 2025 में कराई गई।ग्रीष्मकालीन गणना में जिले में 9 सारस पाए गए थे। उस दौरान बड़ैला ताल में 4 वयस्क व 1 अवयस्क तथा ताल सलोना में 4 वयस्क सारस दर्ज किए गए थे।
वहीं दिसंबर 2024 की शीतकालीन गणना में कुल 6 सारस पाए गए थे।
जिले की सभी वन रेंजों में गणना कराई गई। प्रत्येक स्थल पर सुबह 7 से 9 बजे एवं शाम 3 से 5 बजे के बीच निरीक्षण किया गया। दोनों समय में प्राप्त अधिकतम संख्या को वास्तविक माना गया।
गणना स्थलों का चयन ऐसे किया गया, जहां से अधिकाधिक सारस देखे जा सकें। प्रत्येक स्थल पर सारसों के डिजिटल फोटोग्राफ लिए गए तथा जीपीएस रीडिंग (अक्षांश-देशांतर) दर्ज की गई। गणना प्रपत्र एवं फोटो संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी को सौंप दिए गए हैं। जनपद में सारस मुख्य रूप से तालाबों, बांधों, नदियों और जलाशयों के भराव क्षेत्रों में पाए जाते हैं। विशेष रूप से नम भूमि (वेटलैंड) क्षेत्र इनके लिए अनुकूल माने जाते हैं, जहां इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। ऐसे क्षेत्रों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। सलोना ताल में सबसे अधिक सारस पाए जाने का मुख्य कारण वहां का अनुकूल पर्यावरण, पर्याप्त जल और सुरक्षित आवास बताया जा रहा है। सारस अपनी आकर्षक बनावट और जीवनभर के जोड़े के लिए भी जाना जाता है।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक, लखनऊ के निर्देश पर सारस की गणना वर्ष में दो बार कराई जाती है। ग्रीष्मकालीन गणना जून में तथा शीतकालीन गणना दिसंबर में होती है। रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), लखनऊ को भेजी जाती है। आजमगढ़ वन प्रभाग की डीएफओ आकांक्षा जैन ने बताया कि यह क्षेत्र बर्ड वॉचिंग के लिए एक उत्कृष्ट हॉटस्पॉट बन सकता है। वन विभाग शीघ्र ही यहां वर्ड वाचिंग फेस्टिवल आयोजित करने की योजना बना रहा है, जिसमें सिविल सोसायटी संगठनों एवं प्रकृति प्रेमियों से सक्रिय सहभागिता की अपील की जाएगी।

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