Azamgarh news:भ्रष्टाचार और फर्जी साक्ष्यों के सहारे रिपोर्ट लगाने का आरोप, नायब तहसीलदार की कार्यशैली पर उठे सवाल-मामला पहुंचा मुख्यमंत्री दरबार

फर्जी दस्तावेजों के सहारे रिपोर्ट लगाने का आरोप, नायब तहसीलदार पर भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के गंभीर आरोप :मामला पहुंचा मुख्यमंत्री दरबार

निजामाबाद तहसील के ग्राम पंचायत आवंक में तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित मोहम्मद राशिद पुत्र हकीमुद्दीन ने नायब तहसीलदार पर भ्रष्टाचार, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट लगाने और एक पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।पीड़ित के अनुसार, उनके पुश्तैनी मकान पर वर्षों से घरौनी दर्ज थी और शासन द्वारा आवासीय लाभ भी प्रदान किया गया था। इसके बावजूद गांव के एजाज और फैयाज पुत्र जैहीरुद्दीन द्वारा पोखरी की भूमि पर दो मंजिला पक्का मकान निर्माण कर लिया गया और अब मोहम्मद राशिद की घरौनी हटवाकर अपने निर्माण को वैध साबित कराने का प्रयास किया जा रहा है।मोहम्मद राशिद पुत्र मोहम्मद आसिफ ने बताया कि एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय में 30 जुलाई 2024 को निजामाबाद तहसील से एक आख्या तत्कालीन लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम द्वारा भेजी गई थी। आरोप है कि विपक्षी पक्ष ने उक्त फाइल को एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय से गायब करवा दिया। जब इस मामले की जानकारी जिला अधिकारी को हुई तो एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय में हड़कंप मच गया और दोबारा रिपोर्ट मांगी गई।इसके बाद एसडीएम निजामाबाद द्वारा नायब तहसीलदार की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई। पीड़ित का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने चार महीने तक मामले को लंबित रखा लेकिन पीड़ित पक्ष की एक भी बात नहीं सुनी। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एकतरफा रिपोर्ट तैयार कर एडीएम वित्त एवं राजस्व न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई।पीड़ित पक्ष ने नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने मोटी रकम लेकर बिना अभिलेखागार में सत्यापन कराए ही फर्जी नकल के आधार पर रिपोर्ट लगा दी। तहसील सूत्रों के अनुसार, पूरी रिपोर्ट नायब तहसीलदार की स्वयं की लिखावट में तैयार की गई और बाद में लेखपाल व कानूनगो से हस्ताक्षर कराकर उसे वापस जमा करा दिया गया।विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अभिलेखागार की नकल आने पर उसका अभिलेखागार में जाकर सत्यापन किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दस्तावेज वास्तविक हैं या फर्जी। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई सत्यापन नहीं किया गया। यही नहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि न तो उनके साक्ष्यों को देखा गया और न ही उनका पक्ष सुना गया। जब भी पीड़ित पक्ष बातचीत का प्रयास करता था, तब नायब तहसीलदार द्वारा धमकी भरे व्यवहार का सामना करना पड़ता था।इस पूरे मामले को लेकर गांव और क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि तहसील स्तर पर ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रिपोर्ट लगाई जाएगी, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा।अब पीड़ित मोहम्मद राशिद ने मुख्यमंत्री से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों एवं भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। यह मामला वर्तमान समय में पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच एवं न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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आजमगढ़ जिले की निजामाबाद तहसील के ग्राम पंचायत आवंक से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित मोहम्मद राशिद पुत्र हकीमुद्दीन का आरोप है कि नायब तहसीलदार ने भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एकतरफा रिपोर्ट तैयार कर अपने पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की।मोहम्मद राशिद बेटे का कहना है कि उनके पुश्तैनी मकान पर वर्षों से घरौनी दर्ज थी और सरकार द्वारा उन्हें आवासीय लाभ भी प्रदान किया गया था। इसके बावजूद गांव के एजाज और फैयाज पुत्र जैहीरुद्दीन ने पोखरी की भूमि पर अपना दो मंजिला पक्का मकान बना लिया और राशिद की घरौनी हटवाकर अपने मकान को वैध दिखाने की कोशिश की।

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पीड़ित ने बताया कि एजाज और फैयाज ने मुकदमा संख्या 1061 के आदेश को अपने पक्ष में प्रस्तुत किया, जबकि वास्तविक मुकदमा “आबू ताल्हा बनाम ग्राम पंचायत” से संबंधित था, जिसका आदेश वर्ष 2009 का था। जांच में यह पाया गया कि न्यायालय में उस नाम से कोई फाइल नहीं थी। बावजूद इसके नायब तहसीलदार ने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एडीएम (एफआर) अदालत में गलत रिपोर्ट पेश कर दी।राशिद का आरोप है कि पूर्व में प्रभावशाली लोगों द्वारा उनके असली अभिलेख गायब करवा दिए गए और नायब तहसीलदार को फर्जी साक्ष्यों की जानकारी देने के बावजूद कोई निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई।गांव और क्षेत्र के लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है।

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लोग प्रशासन से निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पीड़ित ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत अपील की है।इस मामले ने तहसील स्तर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना लिया है।

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