Azamgarh News: सेवा की पहचान पर सवालों का साया” रेनबो हॉस्पिटल ने दी सफाई, बोले- यह मानवीय भूल थी, साजिश नहीं

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
“सेवा की पहचान पर सवालों का साया” रेनबो हॉस्पिटल ने दी सफाई, बोले- यह मानवीय भूल थी, साजिश नहीं
आजमगढ़ जनपद के सिधारी स्थित रेनबो हॉस्पिटल में नवजात शिशु के बदलने के मामले को लेकर पिछले दो दिनों से जिलेभर में चर्चा, आक्रोश और तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर आमजन के बीच इस घटना ने भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया। इसी बीच शुक्रवार को रोडवेज स्थित एक होटल में रेनबो हॉस्पिटल प्रबंधन और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से संयुक्त प्रेसवार्ता आयोजित कर पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा गया।
प्रेसवार्ता में अस्पताल प्रबंधन ने साफ तौर पर कहा कि यह घटना किसी साजिश या जानबूझकर किए गए कृत्य का परिणाम नहीं थी, बल्कि अस्पताल के एक स्टाफ से हुई “मानवीय भूल” थी। अस्पताल प्रबंधक शशि पांडेय ने कहा कि टैगिंग प्रक्रिया में हुई त्रुटि के कारण बच्चों की पहचान में गड़बड़ी की स्थिति उत्पन्न हुई, जिसे समय रहते संज्ञान में लेकर सुधार लिया गया।
उन्होंने कहा कि रेनबो हॉस्पिटल वर्षों से जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का एक भरोसेमंद नाम रहा है। यहां हजारों परिवारों के घरों में खुशियां पहुंची हैं और अस्पताल ने हमेशा मरीजों की सेवा को प्राथमिकता दी है। गरीब, असहाय और जरूरतमंद परिवारों की मदद के कई उदाहरण अस्पताल से जुड़े रहे हैं। ऐसे में इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन को भी भीतर तक आहत किया है।
शशि पांडेय ने कहा कि घटना सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल गंभीरता दिखाई और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की गई। साथ ही भविष्य में ऐसी किसी भी त्रुटि की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए अस्पताल की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने मीडिया और आमजन से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक बातों और लेन-देन जैसे आरोपों पर विश्वास न करें। अस्पताल की मंशा हमेशा पारदर्शिता और सेवा भावना की रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल समाचारों का विरोध नहीं करता, बल्कि केवल तथ्यों को सही तरीके से सामने आने की अपेक्षा रखता है।
वहीं आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. सुभाष सिंह ने कहा कि इस घटना को लेकर कई तरह की गलतफहमियां पैदा हो गई थीं, जिन्हें दूर करने के उद्देश्य से प्रेसवार्ता आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में सुरक्षा गार्ड और बाउंसर रखने को लेकर जो “गुंडागर्दी” जैसे आरोप लगाए जाते हैं, वे पूरी तरह गलत हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि कई बार मरीज के तीमारदार आवेश में आकर अस्पताल में हंगामा करने लगते हैं। कुछ लोग नशे की हालत में पहुंचकर स्टाफ के साथ अभद्रता और मारपीट तक करने लगते हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा बनाए रखने के लिए गार्ड रखना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कर्मियों को कभी भी तीमारदारों से दुर्व्यवहार करने का निर्देश नहीं दिया जाता। यदि किसी के व्यवहार को लेकर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई भी की जाती है।
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल डॉक्टरों या अस्पतालों के भरोसे नहीं चल सकतीं। इसमें प्रशासन, मीडिया और आमजन सभी की सकारात्मक भूमिका जरूरी होती है। उन्होंने अपील की कि किसी एक घटना के आधार पर पूरे संस्थान की वर्षों की सेवा भावना पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जाना चाहिए।
प्रेसवार्ता के दौरान आईएमए की ओर से डॉ. आसिफ और डॉ. अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे।
एक छोटी सी चूक ने भले ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हों, लेकिन रेनबो हॉस्पिटल की वर्षों पुरानी सेवा, गरीबों के प्रति सहयोग और मरीजों के विश्वास की कहानी भी इस शहर ने करीब से देखी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अस्पताल भविष्य में अपनी व्यवस्थाओं को कितना मजबूत बनाता है और लोगों का भरोसा किस तरह फिर से जीतता है।



