Azamgarh News:तबादले की राहों में बिछड़ने का दर्द, यादों के संग मिली सम्मानभरी विदाई “रुख़्सत तो जिस्म होते हैं, रिश्ते नहीं… मुसाफ़िर बदलते हैं, यादें नहीं।”

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

तबादले की राहों में बिछड़ने का दर्द, यादों के संग मिली सम्मानभरी विदाई

“रुख़्सत तो जिस्म होते हैं, रिश्ते नहीं… मुसाफ़िर बदलते हैं, यादें नहीं।”

आजमगढ़ दिनांक 07-07-2026

“कुछ लोग दफ्तर नहीं, दिलों में अपनी जगह बना जाते हैं… और जब उनकी विदाई होती है तो आंखें नम और दुआएं साथ चल पड़ती हैं।” कुछ ऐसा ही भावुक माहौल मंगलवार को संयुक्त निदेशक अभियोजन कार्यालय, आजमगढ़ में आयोजित विदाई समारोह के दौरान देखने को मिला, जहां लंबे समय तक साथ काम करने वाले दो अभियोजन अधिकारियों को पूरे सम्मान और आत्मीयता के साथ विदाई दी गई। स्थानांतरित होने वाले अधिकारियों में पीओ शैलेश कुमार (मूल निवासी प्रयागराज) का स्थानांतरण आजमगढ़ से मेरठ तथा पीओ प्रभास रंजन गुप्ता (मूल निवासी जौनपुर) का स्थानांतरण आजमगढ़ से चित्रकूट जनपद के लिए हुआ है। वहीं अन्य जनपदों से तीन नए अधिकारियों की तैनाती आजमगढ़ में की गई है। विदाई समारोह में संयुक्त निदेशक अभियोजन शमशाद हसन, संयुक्त अभियोजन निदेशक ए.डी. भानु प्रताप पांडे, एसपीओ सुभाष सहित सभी एसपीओ, पीओ, एपीओ एवं कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। समारोह के दौरान जेडी शमशाद हसन ने दोनों अधिकारियों को माला पहनाकर, अंगवस्त्रम और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान के इन पलों में उनकी भावनाएं भी छलक उठीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “स्थानांतरण सरकारी सेवा का एक स्वाभाविक पड़ाव है। नई जगह नई जिम्मेदारियां, नए अनुभव और आगे बढ़ने के नए अवसर लेकर आती है। आजमगढ़ में दोनों अधिकारियों ने जिस ईमानदारी, निष्ठा और टीम भावना से कार्य किया, वह हमेशा याद रखा जाएगा।”

उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों अधिकारी अपने नए जनपदों में भी उत्कृष्ट कार्य कर विभाग का नाम रोशन करेंगे और सफलता की नई ऊंचाइयों को छुएंगे।

इस अवसर पर एसपीओ सुभाष ने भी दोनों अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि “कार्यस्थल बदल सकता है, लेकिन साथ बिताए गए पल और अपनापन हमेशा दिलों में जीवित रहते हैं। आपकी सफलता ही हम सबके लिए सबसे बड़ी खुशी होगी।”

समारोह के अंत में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दोनों स्थानांतरित अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, सफल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पूरे कार्यक्रम में आत्मीयता, सम्मान और अपनापन ऐसा झलका कि विदाई के क्षण यादगार बन गए।

“मिलना-बिछड़ना जिंदगी का दस्तूर हो, हर विदाई में छिपा नई शुरुआत का नूर हो।

दुआ है जहां भी रहें, कामयाबी कदम चूमे, हर सफर उनका खुशियों से भरपूर हो।”

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