आजमगढ़:नातिया कलाम से गूंजी शहर की फिजा, अमन-चैन की मांगी दुआ
Azamgarh: Naatiya Kalam filled the city, prayers were offered for peace.

आजमगढ़। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी (बारावफात) का त्योहार शहर में उत्साह के साथ मनाया गया। शहर की दो दर्जन से ज्यादा अंजुमनों ने जुलूस निकाला और इस दौरान नातिया कलाम पेश करने के साथ अमन-चैन की दुआ की। अंजुमनों के स्वागत के लिए शहर में जगह-जगह द्वार बनाए गए थे, तो कई स्थानों पर नातिया पेश करने वाली अंजुमनों को उपहार देकर सम्मानित किया गया।
आयोजन के लिए अंजुमनों ने अपनी ओर से एक दिन पहले ही तैयारी पूरी कर ली थी। पर्व को देखते हुए जगह-जगह पंडाल व स्वागत द्वार बनाए गए थे और विभिन्न मोहल्लों की अंजुमनों की ओर से अपने क्षेत्र में आकर्षक सजावट की गई थी। निस्वां कालेज परिसर में अंजुमनों के पहुंचने का सिलसिला दोपहर बाद से ही शुरू हो गया था। सभी अंजुमनों के पहुंचने के बाद नात पढ़ते हुए जुलूस निकाला गया। मरकजी सीरत कमेटी के अध्यक्ष ख्वाजा तारिक के नेतृत्व में जुलुश पहाड़पुर, शिब्ली चौराहा, तकिया, कोट, टेढिय़ा मस्जिद, बाजबहादुर, किला कोट, दलालघाट, पुरानी कोतवाली होते हुए मुख्य चौक पहुंचा। वहां सलाम पढऩे और अमन-चैन की दुआ के बाद पुरानी सब्जीमंडी, कटरा, बदरका, पांडेय बाजार होते हुए अंजुमनें जामा मस्जिद पहुंचीं, जहां मौलाना ने तकरीर पेश की। इस दौरान नारे तकबीर नारे रेसालत की सदा से पूरी फिजा गूंज उठी। उधर जुलूस में शामिल अंजुमनों के जलपान के लिए जगह-जगह स्टाल लगाए गए थे। यहां पर चाय-काफी के अलावा सभी अंजुमनों को उपहार भी प्रदान किया जा रहा था। एहतियात के तौर पर सुरक्षा की भी मुकम्मल व्यवस्था थी। जुलूस में आगे-आगे सुरक्षा कर्मी चल रहे थे। महिला पुलिस को भी सुरक्षा में लगाया गया था। सुरक्षा कर्मी जुलसे के रास्ते को खाली कराते आगे बढ़ रहे थे।



