Azamgarh News:मौसम की मार से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, खेतों में बिछी धान की फसल; कर्ज में डूबे अन्नदाता की बढ़ी चिंता

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय

मौसम की मार से किसानों की मेहनत पर फिरा पानी, खेतों में बिछी धान की फसल; कर्ज में डूबे अन्नदाता की बढ़ी चिंता

आजमगढ़, मौसम की बेरुखी और अर्णव तूफान के चलते विकासखंड बिलरियागंज क्षेत्र के किसानों पर आफत टूट पड़ी है। तेज हवाओं और बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल धराशायी हो गई है। कई खेतों में जलभराव होने से फसल सड़ने और पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा मंडराने लगा है। घर पहुंचने से पहले ही किसानों का अनाज खेतों में बर्बाद हो गया।

पटवध कौतुक गांव के किसान संतोष राय की करीब साढ़े चार बीघा धान की फसल खेत में गिरकर पूरी तरह बिछ गई है। खेत में करीब डेढ़ फीट तक पानी जमा है। उन्होंने दर्द बयां करते हुए बताया कि धान की खेती में भारी पूंजी लगाई गई थी। पहले से ही किसान कर्ज के बोझ तले दबे हैं, ऐसे में प्रकृति की इस मार ने कमर तोड़कर रख दी है। इसी गांव के किसान कविंद्र नाथ राय और अरुण राय की धान की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। धान की बालियां पूरी तरह पक चुकी थीं और महज दो से चार दिनों में कटाई शुरू होने वाली थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने किसानों के सपनों को चकनाचूर कर दिया।

वहीं चांदपुर निवासी किसान अशोक राय की करीब तीन बीघा धान की फसल भी बारिश की भेंट चढ़ गई। खेत में कटाई के लिए मशीन लगाई गई थी, लेकिन बारिश शुरू होने से महज एक बीघा फसल ही कट पाई। बाकी फसल खेत में ही रह गई, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इस प्राकृतिक आपदा का असर केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। श्रीनगर सियरहा, चांदपुर, मानपुर, पटवध कौतुक, गोसड़ी, सेठारी, तोहफापुर, हरखपुर, बिन्दवल और फुलवारी समेत आसपास के दर्जनों गांवों में धान की फसल को व्यापक नुकसान पहुंचा है। खेतों में दूर-दूर तक धराशायी धान की फसल किसानों की बेबसी और उनकी पीड़ा बयां कर रही है।

किसानों का कहना है कि गांवों में सड़क, चकरोड और अन्य निर्माण कार्य तो करा दिए गए, लेकिन बारिश के पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। इसके चलते खेतों में पानी भर गया है। जलनिकासी का रास्ता नहीं होने से किसान चाहकर भी अपनी फसल को बचाने में असमर्थ हैं।

पूरे साल खेतों में पसीना बहाकर परिवार के भरण-पोषण और कर्ज चुकाने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों के सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों की निगाहें अब शासन-प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत है कि राजस्व विभाग की टीम तत्काल गांवों में पहुंचकर फसलों के नुकसान का निष्पक्ष सर्वे करे और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा तथा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।

सवाल यह है कि अन्नदाता की मेहनत जब खेतों में ही बर्बाद हो गई है, तो संकट की इस घड़ी में सरकार किसानों का सहारा कब बनेगी?

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