Azamgarh News:भावुक माहौल में दी गई संयुक्त निदेशक अभियोजन शमशाद हसन को विदाई, कार्यशैली और उपलब्धियों को याद कर छलक पड़े सहकर्मियों के आंसू
आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
भावुक माहौल में दी गई संयुक्त निदेशक अभियोजन शमशाद हसन को विदाई, कार्यशैली और उपलब्धियों को याद कर छलक पड़े सहकर्मियों के आंसू
प्रदेश में 72वें स्थान से आजमगढ़ को नंबर एक पर पहुंचाने में निभाई अहम भूमिका, तीन महीने में 80 गैंगस्टर की कार्रवाई और हजारों मामलों में प्रभावी पैरवी बनी पहचान
आजमगढ़ जनपद के अभियोजन विभाग में अपने सरल स्वभाव, मृदुभाषी व्यक्तित्व, अनुशासन और प्रभावशाली कार्यशैली से अलग पहचान बनाने वाले संयुक्त निदेशक अभियोजन शमशाद हसन शनिवार को सेवानिवृत्त हो गए। यह मूल रूप से लखीमपुर खीरी के रहने वाले हैं। उनकी विदाई के अवसर पर विभागीय कार्यालय परिसर में आयोजित समारोह भावनाओं से भर उठा। वर्षों तक साथ काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों ने जब उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को याद किया तो कई लोगों की आंखें नम हो गईं। हर किसी की जुबां पर उनके मार्गदर्शन, सहयोग और विभाग के प्रति समर्पण की चर्चा थी।
शमशाद हसन ने वर्ष 2023 में आजमगढ़ में संयुक्त निदेशक अभियोजन के पद पर कार्यभार ग्रहण किया था। उनके आने के बाद जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला जज तथा एडी अभियोजन बीपी पांडेय के आपसी समन्वय और सहयोग से अभियोजन कार्यों में तेजी आई। बताया गया कि जिस आजमगढ़ जनपद की प्रदेश में रैंकिंग पहले 72वें स्थान पर थी, वह बेहतर समन्वय, प्रभावी पैरवी और कार्यों की नियमित समीक्षा के चलते प्रदेश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया।
उनके कार्यकाल में अभियोजन की प्रभावी पैरवी का परिणाम कई महत्वपूर्ण मामलों में देखने को मिला। महज तीन महीने के भीतर जनपद में 80 गैंगस्टर की कार्रवाई की गई तथा बीएनएस और आईपीसी के तहत 14,574 मामलों में कार्रवाई की गई। इसके साथ ही गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी कर बड़ी संख्या में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में अभियोजन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन उपलब्धियों के चलते शमशाद हसन की कार्यशैली और नेतृत्व की चर्चा प्रदेश स्तर तक होने लगी।
विदाई समारोह का सबसे भावुक क्षण उस समय आया जब अभियोजन अधिकारी विपिन चंद्र भास्कर ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने विभाग में काम शुरू किया था, तब उनकी स्थिति शून्य के बराबर थी। उन्हें काम की जानकारी नहीं थी और इस कारण अक्सर डांट भी सुननी पड़ती थी। लेकिन शमशाद हसन सर के मार्गदर्शन और संरक्षण ने उन्हें शून्य से उठाकर 99 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि सर कुछ दिन और विभाग में रह गए होते तो शायद वह 100 प्रतिशत तक पहुंच जाते। उनके इन शब्दों ने समारोह में मौजूद सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भावुक कर दिया।
इस अवसर पर एडी अभियोजन बीपी पांडेय सहित एपीओ, पीओ और एसपीओ ने भी शमशाद हसन के साथ बिताए अनुभव साझा किए। सभी ने उनकी कार्यशैली, अनुशासन, सरल व्यवहार और कर्मचारियों को आगे बढ़ाने की भावना की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि एक अधिकारी के रूप में उन्होंने केवल विभागीय जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि अपने अनुभव और मार्गदर्शन से कई लोगों का भविष्य भी संवारा।
समारोह में अधिकारियों और कर्मचारियों ने शमशाद हसन को फूल-मालाओं और अंगवस्त्रम से सम्मानित किया तथा उनके स्वस्थ, सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर उनके तीनों पुत्र भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में प्रभारी संयुक्त निदेशक अभियोजन सुभाष, प्रवीण कुमार चौधरी, अभियोजन अधिकारी नवनीत कुमार त्रिपाठी, अरविंद कुमार, विपिन चंद्र भास्कर, शशिकांत, कृष्ण मुरारी राय, विमलेश कुमार पांडेय, कपिल त्रिपाठी, मुरारी प्रसाद, लक्ष्मण गुप्ता, सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक अभियोजन शिव प्रसाद पांडेय, अविनाश यादव सहित समस्त कोर्ट मोहर्रिर उपस्थित रहे।
शमशाद हसन के लिए यह समारोह महज सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस विश्वास, सम्मान और अपनत्व का प्रमाण था, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल में अर्जित किया। पद और जिम्मेदारियां एक दिन समाप्त हो जाती हैं, लेकिन अपने व्यवहार, कार्यशैली और दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच से बनाई गई पहचान लंबे समय तक याद रखी जाती है। आजमगढ़ अभियोजन विभाग के लिए उनका योगदान और सहकर्मियों के दिलों में उनके प्रति सम्मान लंबे समय तक याद किया जाएगा।



