Azamgarh News:भटौली इब्राहिमपुर की रामलीला में गूंजा परशुराम-लक्ष्मण संवाद, अंश सिंह के अभिनय ने दर्शकों को किया भावविभोर

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
पिता की 20 वर्षों की लक्ष्मण की भूमिका को पुत्र ने संभाला, मां पूनम सिंह के स्नेह और समर्पण से मंच पर जीवंत हो उठे रामायण के प्रसंग
आजमगढ़ सगड़ी/अजमतगढ़ विकासखंड अजमतगढ़ अंतर्गत ग्राम सभा भटौली इब्राहिमपुर में चल रही पारंपरिक रामलीला में धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का अत्यंत रोचक एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। संवादों की ओजस्विता, कलाकारों के शानदार अभिनय और सजीव प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामलीला देखने के लिए आसपास के कई गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे।
भटौली इब्राहिमपुर की रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका मंचन गांव के ही बच्चों और स्थानीय कलाकारों द्वारा राधेश्याम स्वर के शब्दों एवं संवादों के आधार पर किया जाता है। लगभग 30 से 40 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी गांव की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। यहां के कलाकार जिस लगन और आत्मीयता से रामायण के प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत करते हैं, वह दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है।
इस बार रामलीला में लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे अंश सिंह ने अपने प्रभावशाली अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से खूब वाहवाही बटोरी। खासकर परशुराम-लक्ष्मण संवाद के दौरान उनके चेहरे के भाव, बोलने का अंदाज और अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उल्लेखनीय है कि अंश सिंह के पिता भास्कर सिंह उर्फ रिंकू सिंह पिछले लगभग 20 वर्षों तक इसी मंच पर लक्ष्मण की भूमिका निभाते रहे हैं। वर्तमान में वह चाणक्य न्यूज़ इंडिया लाइव टीवी के आजमगढ़ मंडल ब्यूरो चीफ एवं मंडल प्रभारी हैं। पिता ने अपनी वर्षों पुरानी अभिनय परंपरा और जिम्मेदारी को अब अपने पुत्र अंश सिंह को सौंपा है। पिता से अभिनय की बारीकियां सीखकर अंश सिंह उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में अंश सिंह की मां पूनम सिंह का भी विशेष योगदान है। वह अपना बहुमूल्य समय निकालकर स्वयं राम और लक्ष्मण का श्रृंगार करती हैं तथा कलाकारों को वेशभूषा पहनाकर मंचन के लिए तैयार करती हैं। एक मां का यह समर्पण और परिवार का सांस्कृतिक जुड़ाव गांव की रामलीला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सुंदर उदाहरण बन रहा है।
मंचन में जनक की भूमिका अजीत सिंह मास्टर, विश्वामित्र की अर्जुन गोड़, राम की छोटू सिंह तथा लक्ष्मण की अंश सिंह ने निभाई। वहीं बंदीजन की भूमिका चंदन सिंह ने अदा की। धनुष यज्ञ के दौरान राजा के रूप में शिबू सिंह, शेरू सिंह, अक्षत सिंह सहित करीब 20 कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं से मंचन को जीवंत बना दिया।
रामलीला समाप्त होने के बाद दर्शक कलाकारों के अभिनय की सराहना करते नजर आए। लोगों का कहना था कि भटौली इब्राहिमपुर की रामलीला में जिस तरह गांव के बच्चे रामायण के संवादों को याद कर भावपूर्ण अभिनय करते हैं, वह अपने आप में सराहनीय है। आधुनिकता के दौर में भी गांव के लोग अपनी पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को संजोए हुए हैं।
भटौली इब्राहिमपुर की यह रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी संस्कार, संस्कृति और पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने का मंच भी बन गई है। पिता से पुत्र तक पहुंची लक्ष्मण की भूमिका और मां के समर्पण ने इस बार के मंचन को और भी यादगार बना दिया।



