केंद्र प्रायोजित योजनाओं से संबंधित समीक्षात्मक बैठक का आयोजन
Organizing review meetings related to centrally sponsored schemes
चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय स्थित प्रकोष्ठ में जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला मत्स्य कार्यालय, जिला भूमि संरक्षण कार्यालय, जिला उद्यान कार्यालय एवं जिला गव्य विकास कार्यालय के माध्यम से संचालित राज्य/केंद्र प्रायोजित योजनाओं से संबंधित समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। समीक्षा के दौरान उपायुक्त के द्वारा स्पष्ट निर्देश दिया गया कि उक्त विभागों के माध्यम से संचालित योजनाओं का बेहतर एवं उचित क्रियान्वयन कर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को बढ़ावा देते हुए अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना है। अतएव सभी पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि योजनाओं का जमीनी स्तर पर पारदर्शी तरीके से संचालन हो एवं अहर्ताधारी जनों को इसका लाभ देते हुए उन्हें रोजगार/स्वरोजगार से जोड़ कर क्षेत्र में पलायन पर पूर्णता रोक लगाया जाए। इस दौरान उपायुक्त के द्वारा वित्तीय वर्ष में निर्धारित किए गए लक्ष्य को शत प्रतिशत प्राप्त करने तथा सभी योजनाओं में फर्जी लाभुकों पर विशेष निगरानी रखने का भी निर्देश दिया गया।
बैठक में मत्स्य कार्यालय के माध्यम से संचालित योजनाओं की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि विभाग अंतर्गत जिले में कुल 498 तालाब हैं, जिनमें से 472 तालाब का बंदोबस्ती किया गया है। इसके अलावा जिले में कुल 34 कोऑपरेटिव समिति पंजीकृत है तथा 3 मत्स्य बीज प्रक्षेत्र का संचालन किया जा रहा है। इस दौरान उपायुक्त के द्वारा जिला अंतर्गत विभिन्न तालाबों, बंद खदानों में केजकल्चर और सतही जगहों पर बायोफ्लाक के माध्यम से किया जा रहे हैं मछली पालन कार्यों, उत्पादन की स्थिति, बाजार परिदृश्य, मत्स्य पालकों के बीच दो पहिया, तीन पहिया, चार पहिया वाहन व आइस बॉक्स का वितरण, कार्यालय के माध्यम से किसानों को उपलब्ध करवाए जा रहे विभिन्न संसाधन, वेदव्यास आवास वितरण की भौतिक स्थिति, मत्स्य पालकों का राज्य से बाहर प्रशिक्षण आदि से संबंधित प्रतिवेदन का क्रमशः अवलोकन किया गया। अवलोकन के क्रम उपायुक्त के द्वारा जिला मत्स्य पदाधिकारी को प्रखंड व पंचायत स्तरीय मत्सयजीवी समिति की संख्या को बढ़ाने, अधिक से अधिक किसानों को कोऑपरेटिव समिति से जोड़ने, मई माह के अंत में मत्स्य किसानों/पालकों के लिए वृहद कार्यशाला आयोजित करने, साथ ही जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर तैयार करने के संदर्भ में निर्दिष्ट किया गया।
जिला भूमि संरक्षण कार्यालय के माध्यम से संचालित योजनाओं की समीक्षा के क्रम में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग के द्वारा निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 50 तालाबों का जीर्णोद्धार करवाया गया है। जिस पर उपायुक्त के द्वारा जीर्णोद्धार किए गए तालाबों की गहराई का जांच करने, सभी तालाबों के किनारे पौधारोपण व खेती कार्य कराने के संदर्भ में निर्देश दिया गया। इस दौरान अमृत सरोवर, परकोलेशन टैंक, कार्यालय के माध्यम से डीप बोरिंग आदि के भौतिक प्रगति प्रतिवेदन का भी जायजा लिया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ट्रैक्टर वितरण योजना के तहत निर्धारित पृथक-पृथक पैकेज के तहत अधिक कृषक समूह को जोड़ते हुए, विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। ताकि ग्रामीण स्तर पर छोटे किसानों को कृषि कार्य में सहूलियत मिले और लागत को कम कर उनके आमदनी को बढ़ाया जा सके।
बैठक में उपायुक्त के द्वारा जिला गव्य विकास कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत 2/5/10 दुधारू गाय वितरण की स्थिति का समीक्षा करते हुए निर्देश दिया गया कि जिला अंतर्गत दुग्ध उत्पादक क्षेत्र को चिन्हित कर बीएमसी का क्रियान्वयन एवं क्षेत्र में मिल्क बुथ का अधिष्ठापन करने के संदर्भ में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा कार्यालय के माध्यम से संचालित खोआ मेकिंग यूनिट, बर्मी कंपोस्ट यूनिट आदि से संबंधित प्रतिवेदन का भी अवलोकन किया गया।
समीक्षा के क्रम में उपायुक्त के द्वारा जिला उद्यान कार्यालय के माध्यम से केंद्र एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं में प्रगति का बिंदु वार अवलोकन किया गया। जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती, ड्रैगन फ्रूट की खेती, फूलों की खेती, पॉलीहाउस निर्माण, सब्जी की खेती, किसानों का एक्सपोजर विजिट, उद्यान मित्र, गृह वाटिका आदि के संदर्भ में भी विस्तृत जानकारी प्राप्त की गई। समीक्षा के क्रम में उपायुक्त के द्वारा जिला उद्यान पदाधिकारी को योजना के तहत आच्छादित लाभुकों का फोटो सहित विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने, संचलित योजनाओं का सतत अनुश्रवण करने सहित क्षेत्र में अर्बन फार्मिंग एवं आयुष हर्बल गार्डन का निर्माण और जिला स्तर पर उद्यान मेला का आयोजन कराने के संदर्भ में आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया।



