Azamgarh News: जहां टूट चुकी थीं उम्मीदें, वहां श्याम हॉस्पिटल ने लौटाई जिंदगी की मुस्कान”

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
“जहां टूट चुकी थीं उम्मीदें, वहां श्याम हॉस्पिटल ने लौटाई जिंदगी की मुस्कान”
गंभीर मरीजों के सफल इलाज से परिजनों में खुशी, डॉक्टर करूण श्रीवास्तव को दिया आशीर्वाद
आजमगढ़। कहते हैं कि डॉक्टर धरती पर भगवान का रूप होते हैं, लेकिन यह सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। कुछ चिकित्सक केवल इलाज नहीं करते, बल्कि टूट चुकी उम्मीदों में फिर से जीवन भर देते हैं। जनपद आजमगढ़ के जुनैदगंज स्थित श्याम हॉस्पिटल ने बीते दिनों कई ऐसे गंभीर मरीजों को नई जिंदगी दी, जिन्हें बड़े शहरों और नामी अस्पतालों से भी जवाब मिल चुका था। आज वही मरीज अपने परिवार के बीच हंसते-मुस्कुराते जिंदगी जी रहे हैं और उनके परिजन डॉक्टर करुण श्रीवास्तव को दिल से दुआएं दे रहे हैं।
श्याम हॉस्पिटल में इलाज कराने पहुंचे कई मरीज ऐसे थे, जिन्हें जनपद से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक के अस्पतालों में दिखाया गया, लेकिन हालत में सुधार न होने पर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। निराश और टूट चुके परिजन जब अंतिम उम्मीद लेकर श्याम हॉस्पिटल पहुंचे, तो यहां डॉक्टर करुण श्रीवास्तव की देखरेख में मरीजों का इलाज शुरू हुआ और धीरे-धीरे चमत्कारिक सुधार देखने को मिला।
इसी क्रम में रोशनी राजभर का मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। रोशनी गंभीर मैनेजाइटिस बीमारी से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें कई अस्पतालों में लेकर गए, लेकिन हर जगह से रेफर कर दिया गया। हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि वह बेहोशी की स्थिति में थीं। अंततः परिजनों ने उन्हें श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां करीब 10 दिनों तक चले लगातार इलाज और निगरानी के बाद रोशनी को होश आया। धीरे-धीरे उन्होंने बातचीत शुरू की और स्वास्थ्य में सुधार होने पर परिजन खुशी-खुशी उन्हें घर लेकर गए। परिवार वालों की आंखों में खुशी के आंसू साफ दिखाई दिए।
वहीं राहुल कुमार भी गंभीर स्पाइन समस्या से जूझ रहे थे। हालत ऐसी थी कि उनके हाथ-पैर तक काम नहीं कर रहे थे। परिवार वालों ने लखनऊ तक इलाज कराया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्हें श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर करुण श्रीवास्तव की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। कुछ ही दिनों में राहुल की स्थिति में सुधार होने लगा और आखिरकार वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गए।
इसी तरह आजमपुर की रहने वाली आशा देवी भी गंभीर स्थिति में थीं। परिजनों के अनुसार अन्य अस्पतालों से उन्हें लगभग जवाब मिल चुका था, लेकिन श्याम हॉस्पिटल ने हार नहीं मानी। लगातार इलाज और देखभाल के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और आखिरकार वह स्वस्थ होकर अपने परिवार के बीच लौट आईं। परिवार ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया।
एक और मरीज रणविजय, जो लीवर एक्सेस हिमोट्यूमा जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, उनका इलाज दिल्ली तक चला लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। थक-हारकर परिजन उन्हें अपने जनपद स्थित जुनैदगंज के श्याम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर करुण श्रीवास्तव की टीम ने धैर्य और समर्पण के साथ इलाज किया और आज मरीज पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है।
इन सभी मरीजों के परिजन श्याम हॉस्पिटल पहुंचकर डॉक्टर करण श्रीवास्तव और पूरी मेडिकल टीम का आभार व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब बड़े अस्पतालों से उम्मीद टूट चुकी थी, तब श्याम हॉस्पिटल ने न सिर्फ इलाज किया, बल्कि मरीजों में जीने की नई उम्मीद भी जगाई।
आज के दौर में जहां चिकित्सा व्यवस्था को लेकर तमाम सवाल उठते रहते हैं, वहीं श्याम हॉस्पिटल जैसे संस्थान यह एहसास दिलाते हैं कि सेवा, समर्पण और इंसानियत आज भी जिंदा है। मरीजों के चेहरों पर लौटती मुस्कान और परिजनों की आंखों में दिखती राहत शायद किसी भी डॉक्टर के लिए सबसे बड़ा सम्मान होती है।



