माउंट आबू की वादियों में एक अजीब सी खामोशी है, जो मन के शोर को शांत कर देती है
There is a strange silence in the valleys of Mount Abu, which calms the noise of the mind.
माउंट आबू से लौटकर संजय पांडेय वरिष्ट पत्रकार
माउंट आबू। माउंट आबू महज एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के चंद पल बिताने और प्रकृति के साथ एकाकार होने का एक जीवंत माध्यम है। यहां की वादियों में एक अजीब सी खामोशी है, जो मन के शोर को शांत कर देती है। पहाड़ों पर तैरते बादल, चीड़ और देवदार के वृक्षों से छनकर आती ठंडी हवाएं और यहां की अनूठी संस्कृति हर मुसाफिर के दिल पर एक अमिट छाप छोड़ जाती है। रेगिस्तान के सीने पर हरी-भरी वादियों का यह ठिकाना कुदरत का एक अनमोल तोहफा है।”जब हम राजस्थान की कल्पना करते हैं, तो आंखों के सामने थार का रेगिस्तान, तपती रेत और चिलचिलाती धूप की तस्वीरें उभरती हैं। लेकिन इसी मरुभूमि के आंचल में एक ऐसा कोना भी है, जिसे कुदरत ने अपने हाथों से संवारा है। समुद्र तल से करीब 1,220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट आबू, अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा एक ऐसा स्वर्ग है जो न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के सैलानियों को अपनी ठंडी हवाओं और हरी-भरी वादियों से सराबोर कर देता है।
हाल ही में इस खूबसूरत हिल स्टेशन की यात्रा के दौरान जो अनुभव मिले, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि आखिर क्यों इसे ‘राजस्थान का शिमला’ और ‘अरावली का मुकुट’ कहा जाता है।
नक्की झील: जहां प्रकृति और मिथक मिलते हैं
माउंट आबू के केंद्र में स्थित नक्की झील यहां का मुख्य आकर्षण है। इस झील के बारे में एक बेहद दिलचस्प लोककथा प्रचलित है कि देवताओं ने अपने नाखूनों (नख) से खोदकर इस झील का निर्माण किया था, इसीलिए इसका नाम ‘नक्की’ पड़ा।
शाम के वक्त जब डूबते सूरज की किरणें झील के शांत पानी पर पड़ती हैं, तो पूरा परिदृश्य किसी कैनवास पर उकेरी गई पेंटिंग जैसा नजर आता है। झील में रंग-बिरंगी नावों में बोटिंग करते पर्यटक और किनारे पर टहलते लोग यहां के खुशनुमा माहौल को जीवंत बनाते हैं। झील के ठीक पास स्थित ‘टॉड रॉक’ (मेंढक के आकार की एक विशाल चट्टान) प्रकृति की अनूठी कारीगरी का एक बेहतरीन नमूना है, जो सैलानियों को अचंभित करती है।
सनसेट पॉइंट: रंगों का एक अद्भुत उत्सव
माउंट आबू की शाम का सबसे बड़ा आकर्षण ‘सनसेट पॉइंट’ है। सूर्यास्त के समय यहां हजारों की तादाद में लोग इकट्ठा होते हैं। जैसे ही सूरज अरावली की गगनचुंबी पहाड़ियों के पीछे धीरे-धीरे छिपता है, पूरा आसमान हल्के पीले, नारंगी और गहरे लाल रंगों की चादर ओढ़ लेता है। हवा में तैरती हल्की धुंध और पहाड़ियों के बीच से छनकर आती धूप की आखिरी किरणें एक ऐसा समां बांधती हैं कि लोग कुछ पलों के लिए सब कुछ भूलकर बस उस नजारे में खो जाते हैं।
गुरु शिखर: बादलों से ऊपर का अहसास
यदि आप माउंट आबू की वास्तविक ऊंचाई और उसकी विशालता को महसूस करना चाहते हैं, तो आपको गुरु शिखर जाना होगा। यह अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 1,722 मीटर है।
यहां पहुंचने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो आप बादलों के ऊपर खड़े हैं। ठंडी और तेज हवाओं के बीच यहां से नीचे फैली गहरी घाटियों और दूर-दूर तक फैले हरे-भरे मैदानों का जो विहंगम नजारा (बर्ड्स आई व्यू) दिखता है, वह थकावट को पल भर में दूर कर देता है। चोटी पर स्थित भगवान दत्तात्रेय का मंदिर इस जगह को आध्यात्मिक महत्व भी प्रदान करता है।
दिलवाड़ा मंदिर और ब्रह्माकुमारीज: आस्था और वास्तुकला की पराकाष्ठा
माउंट आबू सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए भी जाना जाता है। दिलवाड़ा के जैन मंदिर: 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बने ये मंदिर स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण हैं। बाहर से बेहद साधारण दिखने वाले इन मंदिरों के भीतर जब आप प्रवेश करते हैं, तो संगमरमर पर की गई नक्काशी देखकर आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। पत्थरों पर तराशी गई इतनी बारीक कलाकृति दुनिया में शायद ही कहीं और देखने को मिले। ब्रह्माकुमारीज संस्थान: यहां का शांत वातावरण और वैश्विक मुख्यालय ‘शांतिवन’ आने वाले हर मुसाफिर को मानसिक शांति और ध्यान का एक अनूठा अनुभव कराता है।



