भाजपा के सीएम के लिए हमदर्दी,मुसलमानों पर खामोशी-ओवैसी का अखिलेश पर हमला
ओवैसी का अखिलेश पर बड़ा हमला-सपा का समाजवाद सिर्फ यादवों तक सीमित

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उज्जैन में कथित जमीन खरीद-फरोख्त के मामले में लगे आरोपों के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उनके समर्थन में दिए गए बयान पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका समाजवाद केवल “यादव समाजवाद” बनकर रह गया है।
Anil Mishra’s message of positivity to society on a rainy Mumbai morning
ओवैसी ने लिखा, “मोहन जी के सम्मान में अखिलेश भैया मैदान में। एक भाई बस अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में आए दिन मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, उन पर झूठे इल्जाम लगाकर जेल भेजा जाता है। अखिलेश उनके लिए कभी कुछ नहीं कहते। लेकिन भाजपा के एक मुख्यमंत्री के लिए देखिए कितनी हमदर्दी है। सपा का ‘समाजवाद’ असल में यादव समाजवाद है।
घरेलू विवाद की सूचना पर पहुंची पुलिस पर हुआ पथराव
दरअसल, उज्जैन में कथित जमीन खरीद-फरोख्त के आरोपों को लेकर घिरे मुख्यमंत्री मोहन यादव के समर्थन में अखिलेश यादव सामने आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ यह पूरा विवाद भाजपा की अंदरूनी साजिश का हिस्सा है। अखिलेश यादव का कहना था कि भाजपा मोहन यादव को मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहती है, इसलिए उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा जल्द ही मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन कर सकती है।
जब फैशन मिले व्यक्तित्व से: शीना चौहान का दमदार और एलिगेंट पावर-ड्रेसिंग स्टेटमेंट
वहीं, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री के परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर 335 एकड़ भूमि खरीदी गई, जिसमें वर्ष 2021 से 2025 के बीच लगभग 253 एकड़ भूमि शामिल है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।ओवैसी की टिप्पणी के बाद यह मामला अब केवल मध्य प्रदेश की राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी सियासी बहस का विषय बन गया है।



