Jharkhand news:करोड़ जमा होने के बावजूद चाईबासा में खदान इलाकों की तस्वीर नहीं बदलना दुर्भाग्यपूर्ण : बाबूलाल मरांडी

चाईबासा जिले में DMFT फंड के दुरुपयोग पर बाबूलाल मरांडी ने जताई नाराजगी

मामले को विधानसभा में पूरजोर तरीके से उठाने की कही बात, DMFT फंड के खर्च की निष्पक्ष जांच की मांग

मधुलता पांडेय विशेष संवाददाता, झारखंड। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने चाईबासा जिले में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के सदुपयोग नहीं होने को लेकर घोर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस जिले सहित पूरे राज्य में इस फंड का सही ढंग से उपयोग नहीं किया जा रहा है। कहा कि जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने डीएमएफटी फंड बनाया ताकि खदान इलाकों में लोगों की जो कठिनाइयां है, उसका समाधान हो सके। परंतु राज्य सरकार इस फंड का सदुपयोग करने में पूरी तरह फिसड्डी साबित हुई है। श्री मरांडी दो दिवसीय पश्चिमी सिंहभूम के दौरे पर हैं। इस दौरे के दूसरे दिन सारंडा मंडल अंतर्गत बरायबुरु में उन्होंने उक्त बातें कहीं। यहां उन्होंने आयोजित जनसभा को संबोधित किया। साथ ही इस दौरान सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और स्थानीय मुद्दों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

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श्री मरांडी ने कहा कि चाईबासा और सारंडा के जंगलों से निकलने वाला लौह अयस्क देश के औद्योगिक विकास को गति देता है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में DMFT फंड की व्यवस्था की गई। इस फंड के तहत पिछले 10 वर्षों में चाईबासा को लगभग ₹3,700 करोड़ प्राप्त हुए। यह फंड खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए खर्च होना चाहिए, लेकिन इसके उपयोग में पारदर्शिता और प्रभावशीलता की भारी कमी दिखाई दे रही है।

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श्री मरांडी ने कहा कि 3700 करोड़ की राशि कम नहीं होती। यानी प्रति साल 300 करोड़ से अधिक की राशि चाईबासा जिले में डीएमएफटी फंड में जमा हुए। इस कारण लग रहा था कि इतनी बड़ी राशि जब जमा हुई है तो खदान इलाके में पांच-सात किलोमीटर की परिधि तक की जो समस्याएं हैं वह काफी हद तक दूर हो गई होगी। लेकिन दो दिनों से उन्हें इस इलाके में घूमने के दौरान कुछ बदलाव नजर नहीं आया। इस क्षेत्र में इस पैसा का अगर सदुपयोग किया जाता तो आज यह स्थिति नहीं होती और सारी व्यवस्था चकाचक होती लेकिन सरकार को इसकी कोई चिंता ही नहीं है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण क्षेत्र में अपेक्षित विकास आज भी दिखाई नहीं देता।

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श्री मरांडी ने कहा कि ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि इस समस्याओं को लेकर वे जिला प्रशासन से बात करेंगे और राज्य सरकार को भी तमाम बातों से अवगत कराएंगे। साथ ही विधानसभा में भी इस मामले को पुरजोर तरीके से उठाएंगे। इस इलाके के लोगों के हक के लिए, उनकी तकलीफों को दूर करने के लिए उनसे जो भी सहयोग हो पाएगा, इस दिशा में बढ़कर मदद करेंगे।

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साथ ही श्री मरांडी ने कहा कि खदान इलाकों में 25 साल पहले भी वे आए थे और तब भी उन्होंने कई इलाकों का दौरा किया था। उस समय इस इलाकों की जो समस्या थी, खासकर पेयजल की समस्या, जो आयरन युक्त लाल पानी पीने को लोग मजबूर थे, दुखद बात है कि 25 साल बाद आज भी कमोबेश वैसी ही समस्या बरकरार है। राज्य सरकार अक्सर फंड का रोना रोकर इन इलाकों की बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की दिशा में ध्यान नहीं देती थी इसलिए प्रधानमंत्री ने डीएमएफटी फंड की व्यवस्था की।

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श्री मरांडी जी ने कहा कि DMFT फंड के खर्च की निष्पक्ष जांच हो तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि राशि का उपयोग केवल खनन प्रभावित लोगों के हित और क्षेत्र के विकास के लिए ही किया जाए।इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई सहित काफी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे।

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