हिंदू मुस्लिम एकता को मजबूत करने का आहान,नफरत नहीं संवाद से दूर होगा भरम:मौलाना अरशद मदनी 

Maulana Arshad Madani calls for strengthening Hindu-Muslim unity, dispels misconceptions about madrasas, and promotes harmony and transparency.

लखनऊ। जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने समाज में आपसी विश्वास, भाईचारे और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कहा कि मदरसों को लेकर यदि लोगों के मन में किसी प्रकार का भ्रम है, तो उसे संवाद और खुलेपन के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि वर्ष में दो बार आसपास के सभी समुदायों के लोगों को मदरसों में आमंत्रित किया जाए, ताकि वे स्वयं देखें कि वहां क्या शिक्षा दी जाती है और किसी भी प्रकार की गलतफहमी का अंत हो।

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लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द का उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। उन्होंने सभी धर्मों और समुदायों के समान विचार वाले लोगों से एक मंच पर आकर नफरत और विभाजन की राजनीति का शांतिपूर्ण ढंग से मुकाबला करने का आह्वान किया।मौलाना मदनी ने कहा कि भारत की साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन देश एक है और उसकी तरक्की तभी संभव है जब सभी नागरिक मिल-जुलकर आगे बढ़ें। उनके अनुसार, समाज में विश्वास बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका संवाद, पारदर्शिता और आपसी सम्मान है।उन्होंने आजादी की लड़ाई में मदरसों और उलेमा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि अनेक इस्लामी विद्वानों और धार्मिक संस्थानों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की और देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि यह इतिहास देश की साझा विरासत का हिस्सा है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।

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मौलाना मदनी ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए युवाओं के भविष्य की रक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है।सम्मेलन में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने भी राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया। वक्ताओं ने संविधान, भाईचारे और आपसी सम्मान की भावना को आगे बढ़ाने पर बल दिया।मौलाना अरशद मदनी का यह संदेश स्पष्ट करता है कि संवाद, पारदर्शिता और प्रेम के माध्यम से ही समाज में फैली गलतफहमियों को दूर कर एक मजबूत, शांतिपूर्ण और समरस भारत का निर्माण किया जा सकता है।

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