मायावती ने भरी चुनावी हुंकार, बोलीं-संगठन की मजबूती और जनविश्वास के दम पर पांचवीं बार बसपा की सरकार बनाने का लक्ष्य

Mayawati raised the electoral slogan, saying – the goal is to form the BSP government for the fifth time on the basis of organizational strength and public trust.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रदेश, मंडल और जिला स्तर के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर संगठन की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि बदलते राजनीतिक हालात के बीच बसपा को बूथ स्तर तक मजबूत करते हुए पूरी गंभीरता और रणनीतिक तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरना होगा।मायावती ने कहा कि चुनाव में विरोधी दलों की ओर से अपनाए जाने वाले साम, दाम, दंड, भेद जैसे तमाम हथकंडों का मजबूती से मुकाबला करने के लिए संगठन को हर स्तर पर तैयार रहना होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते हुए कहा कि बसपा का लक्ष्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जनता के विश्वास के आधार पर पांचवीं बार उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनाना है।

जिताऊ ही नहीं, टिकाऊ प्रत्याशी को मिलेगा टिकट

बैठक में प्रत्याशी चयन को लेकर भी मायावती ने पार्टी की रणनीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि टिकट देते समय केवल चुनाव जीतने की क्षमता को ही आधार नहीं बनाया जाएगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि संबंधित प्रत्याशी पार्टी के प्रति कितना समर्पित, निष्ठावान और लंबे समय तक संगठन के साथ मजबूती से खड़ा रहने वाला है।मायावती के इस संदेश को पार्टी की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों से संभावित प्रत्याशियों के संबंध में जमीनी फीडबैक लेने और स्थानीय परिस्थितियों का गंभीरता से आकलन करने को कहा।बताया जा रहा है कि बसपा अब तक करीब 100 प्रत्याशियों के नाम तय कर चुकी है और सितंबर माह में यह संख्या बढ़कर 150 से अधिक हो सकती है। पार्टी की ओर से प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को समय से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में पर्याप्त समय मिल सके।

बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर

बैठक में मायावती ने बूथ स्तर पर संगठन के पुनर्गठन की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश और मंडल पदाधिकारियों तथा सभी जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए कि सेक्टर स्तर पर बैठकें आयोजित कर संगठनात्मक कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।बसपा प्रमुख ने स्पष्ट किया कि चुनावी सफलता की वास्तविक नींव बूथ स्तर पर मजबूत संगठन से तैयार होती है। इसलिए कार्यकर्ताओं को जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने, उनकी समस्याओं को समझने और पार्टी की नीतियों एवं विचारधारा को प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जरूरत है।मायावती की कार्यशैली में संगठन को विशेष महत्व दिया जाता रहा है। इस बैठक में भी उन्होंने बड़े राजनीतिक दावों के साथ-साथ जमीनी संगठन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देकर यह संकेत दिया कि बसपा चुनावी तैयारी को केवल नारों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे बूथ स्तर तक व्यवस्थित रूप से पहुंचाना चाहती है।

चुनावी वादों को लेकर विपक्ष पर मायावती का हमला

मायावती ने भाजपा, सपा समेत अन्य राजनीतिक दलों की चुनावी घोषणाओं और वादों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय महिलाओं, युवाओं और विभिन्न वर्गों को आकर्षित करने के लिए तरह-तरह के लुभावने वादे और घोषणाएं की जाती हैं, लेकिन सरकार बनने के बाद अक्सर इन वादों को पूरा नहीं किया जाता।उन्होंने कहा कि चुनावी वादाखिलाफी का सबसे अधिक असर नई पीढ़ी पर पड़ रहा है। जेन-जी और जेन-अल्फा के सामने रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में जनता को राजनीतिक दलों के चुनावी वादों को लेकर सजग और जागरूक करना जरूरी है।बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे जनता को किसी भी प्रकार के राजनीतिक छलावे से बचाने का काम करें और मतदाताओं को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए जागरूक करें।

कांशीराम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में होगा बड़ा कार्यक्रम

बैठक में बसपा संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को लेकर भी जानकारी दी गई। मायावती ने बताया कि आगामी 9 अक्टूबर को लखनऊ स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि यूपी-दिल्ली सीमा पर स्थित बहुजन प्रेरणा केंद्र में फिलहाल निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण इस बार कार्यक्रम लखनऊ में ही आयोजित किया जाएगा। तीन सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मायावती इस कार्यक्रम की तैयारियों और स्वरूप के संबंध में विस्तार से जानकारी दे सकती हैं।कांशीराम की पुण्यतिथि का कार्यक्रम बसपा के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में चुनावी वर्ष में होने वाले इस आयोजन को पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच नई ऊर्जा पैदा करने वाले कार्यक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है।नेपाल की बाढ़ पर जताई चिंता, यूपी के बाढ़ पीड़ितों की मदद की मांगमायावती ने नेपाल में आई बाढ़ पर भी चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि उत्तर प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित लोगों की तत्काल मदद की जाए और राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।उन्होंने सरकारों से प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने और संकट की घड़ी में संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की।उमाशंकर सिंह के पुत्र यूकेश की बैठक में मौजूदगी से बढ़े राजनीतिक कयास बैठक में बसपा के पूर्व विधायक उमाशंकर सिंह के पुत्र यूकेश सिंह की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। उमाशंकर सिंह के निधन के बाद मायावती ने उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था कि वह हमेशा उनके साथ रहे और यदि परिवार चाहेगा तो उनके बेटे को राजनीति में आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया जाएगा।ऐसे में यूकेश सिंह की बसपा की महत्वपूर्ण बैठक में मौजूदगी के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि वह अपने पिता की विधानसभा सीट रसड़ा से आगामी चुनाव में बसपा के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।

आकाश आनंद बैठक में नहीं पहुंचे

बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद बैठक में मौजूद नहीं रहे। उनकी गैरमौजूदगी भी पार्टी के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी रही।

मायावती के नेतृत्व में चुनावी रणनीति को धार देने में जुटी बसपा

कुल मिलाकर सोमवार की बैठक से यह स्पष्ट संकेत मिला कि बसपा आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर गंभीरता से तैयारी कर रही है। मायावती ने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का प्रयास किया, वहीं प्रत्याशी चयन, बूथ संगठन, सेक्टर स्तर की सक्रियता और जनता के बीच राजनीतिक संदेश पहुंचाने की रणनीति पर भी जोर दिया।मायावती का लंबा राजनीतिक अनुभव और उत्तर प्रदेश की राजनीति की गहरी समझ बसपा की चुनावी रणनीति की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। उन्होंने एक बार फिर कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा देते हुए संगठन को अनुशासित, सक्रिय और मजबूत बनाने का संदेश दिया है।बसपा प्रमुख का लक्ष्य स्पष्ट है।जनता के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय करना और अपने सामाजिक-राजनीतिक आधार के दम पर उत्तर प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर मजबूत वापसी करना।चुनावी तैयारियों के इस दौर में मायावती का यह सक्रिय रुख बसपा कार्यकर्ताओं के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है। अब आने वाले महीनों में पार्टी की यह संगठनात्मक सक्रियता कितनी प्रभावी साबित होती है और चुनावी मैदान में बसपा किस तरह अपनी रणनीति को आगे बढ़ाती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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