झारखंड को सही दिशा देनी है तो आंचलिक पत्रकारिता को संबल देना होगा
झारखंड सरकार प्रशासन को जवाबदेह बनाए और जनता के मन से भय को समाप्त करे

संजय पांडेय@ वरिष्ठ पत्रकार:
झारखंड को सही दिशा देनी है तो आंचलिक पत्रकारिता को संबल बनाना होगा
जवाबदेह प्रशासन, निर्भीक पत्रकारिता और भयमुक्त समाज से ही बनेगा बेहतर झारखंड। झारखंड आज विकास की अनेक संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध इस राज्य के सामने विकास, प्रशासनिक जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और सामाजिक विश्वास जैसी बड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी घोषणाओं, बैठकों और योजनाओं से नहीं होगा। इसके लिए प्रशासन को जनता के प्रति अधिक जवाबदेह और पत्रकारिता को अधिक मजबूत, स्वतंत्र तथा प्रभावशाली बनाना होगा।
विशेष रूप से झारखंड की आंचलिक पत्रकारिता को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राजधानी और बड़े शहरों की खबरें आसानी से सत्ता के गलियारों तक पहुंच जाती हैं, लेकिन गांवों, प्रखंडों और दूरदराज के जिलों में रहने वाले लोगों की समस्याएं अक्सर सरकारी फाइलों में दबकर रह जाती हैं। यहां आंचलिक पत्रकार ही जनता और प्रशासन के बीच सबसे महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है। यदि झारखंड को सही दिशा में आगे ले जाना है, तो सरकार और जिला प्रशासन को पत्रकारों को केवल सूचना प्राप्त करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि लोकतंत्र की निगरानी व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखना होगा। हर महीने जनता के सामने प्रशासन का रिपोर्ट कार्ड जिलों में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक नई व्यवस्था विकसित की जा सकती है। प्रत्येक जिला उपायुक्त को हर महीने जिले में चल रही प्रमुख विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों का एक विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार करना चाहिए।
इस रिपोर्ट कार्ड की हार्ड कॉपी जिले के मान्यता प्राप्त और सक्रिय पत्रकारों के बीच वितरित की जानी चाहिए। रिपोर्ट कार्ड में स्पष्ट रूप से बताया जाए—
कौन-सी योजनाएं चल रही हैं? योजनाओं के लिए कितना बजट स्वीकृत हुआ?
कितना कार्य पूरा हुआ? कौन-सी योजनाएं समय पर चल रही हैं और कौन-सी पिछड़ रही हैं? देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ कितना मिला? केवल कागजी रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होनी चाहिए। रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने के बाद पत्रकारों के साथ एक खुला संवाद आयोजित किया जाना चाहिए, जिसमें पत्रकार प्रशासन से सीधे सवाल पूछ सकें और उपायुक्त उन सवालों का स्पष्ट जवाब दें। यह व्यवस्था प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाने के साथ-साथ पत्रकारिता की रचनात्मक भूमिका को भी मजबूत करेगी। योजनाओं की सफलता और विफलता की जवाबदेही तय हो
आज अनेक सरकारी योजनाएं बड़े उत्साह के साथ शुरू तो होती हैं, लेकिन समय पर पूरी नहीं हो पातीं। कहीं बजट की समस्या बताई जाती है, तो कहीं विभागीय समन्वय की कमी सामने आती है। कई योजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं और इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।
इस स्थिति को बदलने के लिए जिला स्तर पर योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन की स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए।
जिला उपायुक्त को अपने जिले में प्रमुख सरकारी योजनाओं के समन्वय और प्रगति के लिए अधिक स्पष्ट रूप से जिम्मेदार बनाया जाना चाहिए। हर महत्वपूर्ण योजना की शुरुआत और समाप्ति की समय-सीमा तय हो तथा उसकी नियमित निगरानी की जाए। यदि कोई योजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं होती है, तो उसके कारणों की सार्वजनिक समीक्षा होनी चाहिए। जवाबदेही के बिना विकास केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह जाता है।
झारखंड को वास्तविक विकास की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए योजनाओं के उद्घाटन से अधिक महत्वपूर्ण उनका समय पर पूरा होना और जनता तक उनका लाभ पहुंचना है। भयमुक्त समाज प्रशासन की पहली जिम्मेदारी किसी भी लोकतांत्रिक राज्य की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और बड़ी परियोजनाओं से नहीं होती। उसकी वास्तविक पहचान इस बात से होती है कि वहां का आम नागरिक कितना सुरक्षित और निर्भीक महसूस करता है।
आज भी समाज के कई वर्गों में प्रशासन, अपराध, राजनीतिक दबाव अथवा सामाजिक परिस्थितियों को लेकर भय का वातावरण देखा जाता है। आम नागरिक को यह विश्वास होना चाहिए कि उसकी शिकायत सुनी जाएगी और उसे न्याय प्राप्त करने के लिए किसी प्रभावशाली व्यक्ति की मदद की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
झारखंड में ऐसा वातावरण बनाना होगा जहां आम आदमी निर्भीक होकर अपनी बात कह सके।
लोगों के मन से डर और भय का वातावरण समाप्त करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। पुलिस और प्रशासन को जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत करना होगा। भय से नहीं, विश्वास से मजबूत समाज बनता है। बेवजह मुकदमों पर हो सख्त निगरानी
किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना एक गंभीर कानूनी प्रक्रिया है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है कि किसी निर्दोष व्यक्ति को व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक दबाव, सामाजिक विवाद या किसी अन्य अनुचित कारण से कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। बिना पर्याप्त आधार के दर्ज होने वाले मामलों की निगरानी के लिए एक मजबूत प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
हर जिले में यह सुनिश्चित किया जाए कि— कानून का दुरुपयोग न हो। किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। शिकायतों और मुकदमों की निष्पक्ष जांच हो। प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई न की जाए। पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई की समय-समय पर समीक्षा हो।
कानून का उद्देश्य नागरिकों को डराना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है। आंचलिक पत्रकार बनें लोकतंत्र के मजबूत प्रहरी
झारखंड के दूरदराज क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार अक्सर सीमित संसाधनों के बावजूद जनहित के मुद्दों को सामने लाते हैं। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, भ्रष्टाचार, विस्थापन, बेरोजगारी और सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति जैसे मुद्दों को आंचलिक पत्रकारिता ही सबसे पहले उजागर करती है। लेकिन इन पत्रकारों को मजबूत करने की आवश्यकता है। पत्रकारों के लिए नियमित संवाद, प्रशासनिक सूचनाओं तक आसान पहुंच और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष संवाद की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। पत्रकारों को दुश्मन या विरोधी के रूप में नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को उजागर करने वाले जिम्मेदार प्रहरी के रूप में देखना होगा। सच्ची पत्रकारिता प्रशासन की आलोचना करने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सवाल करती है। इसलिए प्रशासन और पत्रकारिता के बीच संबंध टकराव का नहीं, बल्कि जवाबदेही और जनहित का होना चाहिए।
एक नए झारखंड की जरूरत झारखंड को आगे बढ़ने के लिए केवल नई योजनाओं की नहीं, बल्कि नई प्रशासनिक सोच की जरूरत है। ऐसा झारखंड, जहां— हर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेह हो। हर योजना समय पर पूरी हो। हर नागरिक भयमुक्त होकर जीवन जी सके। किसी निर्दोष व्यक्ति को बिना वजह कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े और हर पत्रकार निर्भीक होकर जनता की आवाज सत्ता तक पहुंचा सके।
झारखंड की असली ताकत उसके जंगलों, खनिजों और प्राकृतिक संपदा में ही नहीं, बल्कि उसके लोगों में भी है। जब प्रशासन जवाबदेह होगा, पत्रकारिता मजबूत होगी और जनता भयमुक्त होगी, तभी राज्य वास्तविक अर्थों में विकास की सही दिशा में आगे बढ़ेगा।
आज आवश्यकता है कि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करें जिसमें सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि लोकतंत्र की शक्ति माना जाए। झारखंड को सही दिशा देनी है तो आंचलिक पत्रकारिता को संबल देना होगा, प्रशासन को जवाबदेह बनाना होगा और जनता के मन से भय को समाप्त करना होगा। यही एक मजबूत, न्यायपूर्ण और विकसित झारखंड की वास्तविक बुनियाद हो सकती है।
(संजय कुमार पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार | प्रेस लॉ एक्सपर्ट | मीडिया एजुकेटर
राजनीतिक संपादक, The Emerging World)
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