Azamgarh news:बाढ़ प्रभावित परिवारों को कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने वितरित की राहत सामग्री

बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़ी है योगी सरकार, राहत सामग्री में नहीं होने दी जाएगी कमी-दारा सिंह चौहान

आजमगढ़, 08 सितम्बर; कारागार मंत्री, उ0प्र0 सरकार दारा सिंह चौहान द्वारा आज तहसील सगड़ी के बाढ़ प्रभावित 05 ग्रामों (मुखलिसपट्टी, आ0 अजगरा मगर्वी, मानिकपुर, देवारा गरीब दूबे एवं देवारा अचल सिंह) के 886 परिवारों को राहत शिविर- वर्मा श्याम दुलारी महाविद्यालय, आराजी देवारा नैनीजोर, सगड़ी में बाढ़ राहत सामग्री/किट का वितरण किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मा० सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।इस अवसर पर मा० कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कहा कि इस क्षेत्र के लोग वर्षों से बाढ़ की समस्या का सामना करते आ रहे हैं। प्राकृतिक आपदा को पूरी तरह नियंत्रित करना मानव के वश में नहीं है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने में सरकार कोई कमी नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। उनका स्पष्ट निर्देश है कि प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को भोजन, रहने, दवा अथवा अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए परेशानी न उठानी पड़े। इसी क्रम में प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं से युक्त राहत किट उपलब्ध कराई जा रही है।० मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा वितरित की जा रही राहत सामग्री में चावल, आटा, दाल, आलू, प्याज, तेल, नमक, मसाले सहित साबुन, मोमबत्ती, माचिस तथा अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। सरकार का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत उपलब्ध कराना है, ताकि आपदा की स्थिति में उन्हें भोजन एवं दैनिक जरूरतों के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा सदैव संकट की घड़ी में जरूरतमंदों की सहायता करने की रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने प्राकृतिक आपदाओं के समय जरूरतमंदों की सहायता को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार भी बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता से खड़ी है।० मंत्री ने जिलाधिकारी आजमगढ़ रविन्द्र कुमार की सराहना करते हुए कहा कि जिलाधिकारी गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं तथा जनपद में राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा पूर्व में ही संभावित प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे, नावों की व्यवस्था तथा एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नावों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे प्रभावित लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।

मंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए मांग-पत्र में छोटी पुलिया एवं रास्तों से संबंधित समस्याओं को जिलाधिकारी को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी द्वारा क्रिटिकल गैप फंड से आवश्यक कार्य कराए जाने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने इस संवेदनशील पहल के लिए जिलाधिकारी को बधाई दी।जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार ने कहा कि बाढ़ की वास्तविक पीड़ा वही समझ सकता है, जिसने स्वयं इसका सामना किया हो अथवा प्रभावित लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को देखा हो। मुख्यमंत्री जी द्वारा प्राकृतिक आपदाओं को लेकर कई माह पूर्व से ही प्रशासन को आवश्यक तैयारियां समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि तहसील सगड़ी क्षेत्र में बाढ़ एवं कटान की स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा पूर्व से ही प्रभावी तैयारियां की गई हैं। सहबदिया, सुल्तानपुर, देवारा खास राजा एवं गांगेपुर सहित प्रमुख कटान प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई विभाग द्वारा कटानरोधी कार्य कराए गए हैं। कहीं बोल्डर डम्पिंग, कहीं जियो बैग तथा कहीं पर्क्युपाइन स्ट्रक्चर के माध्यम से कटान को रोकने के प्रयास किए गए हैं।जिलाधिकारी ने बताया कि इस वर्ष तहसील सगड़ी के 16 ग्रामों में बाढ़ के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा नावों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ का पानी लंबे समय तक रहने पर उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को देखते हुए प्रभावित परिवारों को समय से राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को बाढ़ राहत किट उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें दैनिक उपयोग एवं खाद्य सामग्री शामिल है। किट में दाल, चावल, आटा, नमक, तेल, मसाले, आलू सहित साबुन, बाल्टी, मग, मोमबत्ती, माचिस, लाई, चना, चीनी आदि आवश्यक सामग्री रखी गई है।

जिलाधिकारी ने बताया कि बाढ़ की स्थिति गंभीर होने पर विद्यालयों को राहत केंद्र के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ की टीमों के ठहरने तथा राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए गोलाघाट क्षेत्र में लगभग एक हेक्टेयर सरकारी भूमि पर करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से कंट्रोल सेंटर विकसित किया जा रहा है। इसमें राहत एवं बचाव कार्य में आने वाली टीमों तथा अधिकारियों के ठहरने के साथ ही प्रभावित लोगों के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए उक्त क्षेत्र में छह शेड बनाए जाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है, जिससे आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन एवं शासन का उद्देश्य है कि बाढ़ के कारण जनसामान्य को न्यूनतम कठिनाई हो। उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों को आश्वस्त किया कि किसी भी समस्या की स्थिति में जिला प्रशासन तत्परता से सहायता उपलब्ध कराएगा। उन्होंने बताया कि जनपद स्तर पर प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक जनता दर्शन के माध्यम से आमजन की समस्याएं सुनी जाती हैं तथा उनके शीघ्र निस्तारण का प्रयास किया जाता है।कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी सगड़ी, तहसीलदार सगड़ी, बीडीओ सहित संबंधित अधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, राहत एवं बचाव कार्य से जुड़े कार्मिक तथा बड़ी संख्या में बाढ़ प्रभावित ग्रामीण उपस्थित रहे।

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