उजड़ गया अगले दिवस कस्तूरी का गांव……विराट कवि सम्मेलन का सफल आयोजन

राष्ट्रभाषा एवं लोकोत्थान समिति (रजि.) आज़मगढ़ के तत्त्वावधान में 13/4/2024, शनिवार को खजुरी (अहरौला बाज़ार) में एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंग्यकार साहित्यभूषण राजाराम सिंह ने की । दीप प्रज्वलन तथा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन के बाद 5 वर्षीय बाल कलाकार वांग्मय
‘वसु’ सहाय द्वारा नवरात्रि के शुभ अवसर पर महिसासुर मर्दिनी भाव नृत्य की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया । लखनऊ से पधारी श्रेष्ठ कवयित्री वर्षा श्रीवास्तव की वाणी वन्दना ‘ नमामि मातु शारदे’ के पश्चात मखमली आवाज़ के शायर नंद किशोर ‘बेचैन’ ने सुनाया – आदमी सहमा हुआ बैठा है अपने आप में जाने फिर तूफान का रुख, कब किधर हो जाएगा । साहित्यकार राजेंद्र त्रिपाठी ‘राहगीर’ ने – उजियारा पाख लिए हर कोई अंदर है , मुख में सुकरात यहां पेट में सिकंदर है सुनाया । अंबेडकर नगर के आर्य हरीश कोशलपुरी ने वर्तमान पर प्रहार करते हुए सुनाया –
अब ना परिवर्तनों की पहल चाहिए ,एक गिरते हुए को संभल चाहिए। रोजी-रोटी के संकट बढ़े जा रहे , आज जनता को स्थाई हल चाहिए अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि डंडा बनारसी ने लोगों को हंसा हंसा कर लोटपोट कर दिया लोग देर तक उन्हें सुनते रहे । मऊ के श्रेष्ठ भोजपुरी गीतकार डॉ. कमलेश राय ने – “ओकरे सपनो में न आवै लड्डू मोतीचूर कै, ऊ धरती कै धूर बोहरै लइका हवे मजूर कै सुनाकर लोगों को भावविभोर कर दिया । प्रतापगढ़ के हास्य कवि दिनेश सिंह गुक्कज ने पढ़ा – पत्नी ने पूछा जी ये विश्वासघात कैसा होता है , मैने कहा जो तेरे बाप ने मेरे साथ किया बस वैसा ही होता है ।

 

 

युवा रचनाकार हेमंत त्रिपाठी ने मन को मत मुरझाने देना शीर्षक से संदेशपरक गीत सुनाया तो अरविंद पथिक ने जनवादी छंद सुनए। गीतकार विजयेंद्र प्रताप ‘करुण’ ने बसंत का मनोहारी वर्णन किया । कवयित्री वर्षा श्रीवास्तव का गीत –
तुम बिन कितना सूना सूना था मेरा जीवन एक तुम्हारे आ जाने से छम छम नाचे मन सुनकर लोग झूम उठे। संचालक वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. बजरंग श्री सहाय “रवि” ने अपने व्यंग्य ग़ज़ल और दोहों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया उनका यह दोहा – मृग ने भटके सिंह को दिया कुंज में ठांव, उजड़ गया अगले दिवस कस्तूरी का गांव। लोगो ने पसंद किया । गीतकार भालचंद त्रिपाठी ने गीत सुनाया तो साहित्य भूषण राजाराम सिंह ने अपने चुटीले व्यंग्य से सामाजिक व्यवस्था पर करारा प्रहार किया । संयोजक वर्तमान सदी के श्रेष्ठ गजलकारों में शुमार कवि हंसमुख आर्यावर्ती ने अपने संग्रह से सुनाया हमारे गम का ये ग्लेशियर है जो कतरा कतरा पिघल रहा है नई सदी के ही जैसे हंसमुख मिजाज अपना बदल रहा है। कवि डॉ. अंकुर सहाय ‘अंकुर’ ने अपने अनूठे अंदाज में – फेंट कर फिर से ताश बैठे हैं हम तेरे आस पास बैठे हैं। तू नज़र से पिला दे अच्छा है, ले कर खाली गिलास बैठे हैं।सुनाकर लोगों को मन्त्रमुग्ध कर दिया । देर रात तक चले कार्यक्रम में राजेश श्रीवास्तव, जयप्रकाश लाल , मुख्य आयोजक एडवोकेट सौरभ सहाय,राहुल, रामबरन मौर्य,रणविजय मिश्र, डॉ.सुमन , वागर्थ सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे ।पूरा पांडाल श्रोताओं से भरा रहा । अंत में इस कार्यक्रम के संयोजक गीतकार अंकुर सहाय ने सबका धन्यवाद ज्ञापित दिया।

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