Mumbai news:आधुनिक भारत के निर्माता स्‍वामी दयानंद सरस्‍वती ने समाज सुधार के लिए उठाए थे कई कदम

मुंबई से संवाददाता भरत कुमार की रिपोर्ट

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आधुनिक युग के महान समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती के २०० वें जन्मजयंती वर्ष को मनाने की दिशा में अग्रसर होते हुए प्रसिद्ध सामाजिक संगठन ‘आर्य वीर दल मुंबई ‘ द्वारा आर्य समाज घाटकोपर , आर्य समाज वाशी, आर्य समाज सांताक्रुज और आर्य समाज वसई में एक दिवसीय चरित्र निर्माण शिविर का आयोजन किया गया । इन सभी शिविरों का ध्येय वाक्य था “आओ आर्य ( श्रेष्ठ/उत्तम/अपराजेय) वीरों का निर्माण करे,२६ से ३० अप्रैल २०२३ के विभिन्न शिविरों में मुख्य शिक्षक श्री हरि सिंह जी(दिल्ली) उपस्थित रहे। शिविर के सहयोगी के रूप में आर्यवीर अनुज आर्य, आर्य वीर दल मुंबई के युवा एवं ओजस्वी संचालक श्री नरेंद्र शास्त्री जी, कर्मठ महामंत्री श्री धर्मधर जी आर्य, आर्य समाज घाटकोपर के पुरोहित श्री संजय शास्त्री जी, श्री तेजवीर शास्त्री, श्री सुनील गुप्ता जी, श्रीमती नेहा बेन पटेल, प्रतीक्षा बेन पटेल एवं समाज के सेवक उपस्थित रहे।

प्रत्येक शिविर में मुंबई के कोने कोने से लगभग 45 से 50 बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों को इस शिविर में हवन, ध्वज वंदन,सर्वांग सुंदर, कराटे, आसन ,प्राणायाम, तीरंदाजी बंदूक से निशानेबाजी आदि का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद घाटकोपर के विभाग माणिकलाल विस्तार में रैली आर्य वीरों ने की और बौद्धिक प्रशिक्षण के साथ-साथ शारीरिक आत्मिक और मानसिक विचारों को कैसे परिवार, समाज और राष्ट्र तक विकसित करें यह इस शिविर के माध्यम से सभी शिविरार्थियों को सिखाया गया।

आचार्य धर्मधर जी ने धर्म के वास्तविक रूप को समझाते हुए बताया कि धर्म तो धारण किया जाता है। जो व्यवहार हमारे लिए अच्छा नहीं है वैसा दूसरे के साथ नहीं करना चाहिए ।संचालक श्री नरेंद्र शास्त्री जी ने बच्चों को अभिवादन का सही मतलब बताते हुए कहा कि नमस्ते ही हमारा शास्त्र सम्मत अभिवादन है। साथ में सेवा की भावना भी रहे जिससे चार चीजों की वृद्धि होती है आयु विद्या यश और बल ।आर्य समाज के सुयोग्य पुरोहित श्री किशन शास्त्री ने विद्यार्थी जीवन की सफलता के पांच लक्षण बताए – “काक चेष्टा बको ध्यानम् श्वान निद्रा तथैव च, अल्पाहारी गृह त्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम् ।।

नवी मुंबई के उपनगर वाशी में आर्य समाज के सभी अधिकारियों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया ।आर्य समाज वसई के अधिकारीयों ने शिविर में उपस्थिति रह कर सभी गतिविधियों पर ध्यान रखा ।

आर्य समाज सांताक्रुज में सत्संग में बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदशन कर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया ।
शिविर के उपरांत बच्चों ने अपने मनोभाव रखते हुए शिविर की प्रशंसा की और कहा कि शिविर में बहुत कुछ सीखने को मिला है। माता पिता की सेवा, बड़ों का सम्मान,संस्कृति की रक्षा, और खुद को जीवन में हम कैसे आगे बढ़ाएं और उन्नति करें यह विचार आर्य समाज द्वारा हमें मिले हैं जिनका हम सम्मान करते हैं और अपने जीवन में हमेशा धारण करेंगे ऐसे मनोभाव शिविरार्थियों ने व्यक्त किए।आर्य प्रतिनिधि सभा मुंबई ने सभी कार्यक्रमों की अपार सफलता के लिए बधाई दी एवं सभी गणमान्य अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया।

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