मध्य वर्ग के बच्चो को पढ़ाना मध्यवर्गीय लोग के लिए एक सबब बना, शिक्षा

रिपोर्ट संजय सिंह बलिया

रसड़ा (बलिया)राज्य सरकार व केन्द्र सरकार फरमान था कि सब पढ़े सब बढ़े किन्तु जमीनी हकीकत कुछ और ही है शिक्षा इतनी मंहगी हो गयी है कि मध्यवर्ग के लोगो को बच्चो को पढ़ाने के लिए सोचना पड़ रहा है नीजि स्कूलो में पढ़ाने का होड़ लगा हुआ है

 

लेकिन सरकार के लाख जतन के बाद भी कापी किताब और ड्रेस पर खर्च होने वाली भारी भरकम, रकम अभिभावको को चुकाना पड़ रहा है जिससे परेशान है इसमे मध्य वर्गीय अभिभावको को बच्चो का पाठय पुस्तक समाग्री खरीदने मे पसीना छूट जा रहा है बता दे अन्य कक्षाओ की बात छोड़िये नर्सरी मे ही नामाकंन से लेकर किताब कापी बैग ड्रेसपर 10 से15 हजार से अधिकका बजट बन रहा है

 

जिनके पास एक से अधिक बच्चे पढ़ने योग्य है सोचना पड़ रहा है आजकल नीजि स्कूलो मे दाखिला की होड़ लगी है और लोग सरकालभरी स्कूलो के बजाय बढ़चढ़ कर ना लिखवाने के लिए बच्चो के साथ लाइन मे लग जा रहे हैऔर यह दिखाते की हम किसी कम नही मेरा बच्चा इंगलिस पढ़ेगा और फटाफट

 

इंगलिस बोलेगा जिसे नामनेशन तो करा लेते है किन्तु बाद मे सोचते है और पश्चताप करते है जिससे मध्य वर्ग के लिए एक सबब बन गया है।

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