काम क्रोध मद लोभ से विरक्त रहने पर ही भगवान की भक्ति संभव, पंडित विनय मिश्र ।

विनय मिश्र, जिला संवाददाता।
बरहज ,देवरिया। शुक्ल में चल रहे तीन दिवसीय श्री राम कथा के विश्राम दिवस के अवसर पर आश्रम बरहज से पधारे हुए पंडित विनय मिश्रा ने कहा कि अन्य युगों की अपेक्षा कलयुग सबसे उत्तम है इसमें भक्ति कम दिनों के साधना में ही प्राप्त हो जाती है भक्ति मार्ग को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को जीवन में कुछ चीज ऐसी हैं जो छोड़ने होती है जैसे काम ,क्रोध, लोभ, मोह, यह सब भगवत प्राप्ति में बाधक है, काम क्रोध मोह और मोह के बिच, रहकर विभीषण जी ने भगवान का चिंतन किया लेकिन तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ा । जीव रूपी विभीषण जब मोह रूपी रावण के द्वारा लात मारकर भगाया जाता है तब भगवान की याद आती है ठीक उसी प्रकार जीवन में जब मनुष्य को काम क्रोध लोभ मोह बार-बार सताता है तो मनुष्य यह तय करता है कि अब मुझे भगवान की शरण में जाना चाहिए और तब चौथ पन में मनुष्य भगवान का भजन करने लगता है अगर शुरू से ही किया जाए तो मनुष्य के लिए सरल और सुगम रास्ता बन जाए भगवत प्राप्ति का भगवान ने बड़ी कृपा करके मनुष्य का सुंदर तन दिया है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह इस सुंदर तन मैं सुंदर मां स्थापित कर भगवान का स्मरण करें जिससे कि मनुष्य का संपूर्ण जीवन सुखमय शांति में व्यतीत हो कथा के दौरान विद्याभूषण जी महाराज छपरा, हरि ओम शरण जी महाराज मऊ ,सुरेश मिश्रा आजमगढ़ ,श्याम नारायण शाहीआजमगढ़ ,उमेश रामायणी बरेली ने भावपूर्ण, भगवान की कथा का रसपान कराया। इस अवसर पर आयोजक अंगद प्रसाद द्विवेदी प्रभाकर द्विवेदी प्रिंस त्रिवेदी रामनिवास उपाध्याय गजेंद्र शुक्ला सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे कथा के विश्राम दिवस पर, आयोजक अंगद प्रसाद द्विवेदी ने आए हुए सभी कथा वाचको एवं क्षेत्र की सम्मानित जनता के प्रति आभार व्यक्त किया ।



