देवरिया:घाटों पर उमड़ा आस्था का सैलाब, अस्ताचलगामी सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्घ्य

रिपोर्ट:भगवान उपाध्याय
देवरिया:क्षेत्र में छठ पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। परिवार में सुख शांति और संपन्नता के लिए महिलाओं ने रविवार को निर्जला व्रत रखा। शाम को स्नान के बाद श्रृंगार कर पारंपरिक गीत ‘ कांच ही बांस के बहगियां,बहंगी लचकत जाए’ गाती हुई तालाब, सरोवर के तटों पर प्रस्थान किया। इसके बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। व्रती महिलाएं तीन-चार बजे से अपने- अपने घरों से टोली बनाकर घाट के लिए निकली। इस दौरान पारंपरिक गीत ‘ हथवा में फुलवा डलिया छठ पूजन जाय’ । ‘ उग हे सुरुज देव भीन भिनसरवा,अरघ के बेरवा,पूजन के बेरवा हो’। ‘सुगना के मरबो तीर धनुहिया’। छठी माई के घटवा पे आज बाजन … गुनगुनाते हुए घाटों पर पहुंची। शाम होते होते घाटों पर श्रद्धालुओं का जमघट लग गया। आलम यह रहा कि घाटों पर पैर रखने की जगह नहीं रही। इस दौरान व्रती महिलाओं ने पोखरा,तालाबों एवं सरोवरों के तट पर पहुंच भगवान भास्कर का पूजन-अर्चन किया। कुछ व्रती महिलाओं ने तालाब,सरोवर आदि में खड़े होकर पूजन किया। इसके बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न घाटों पर व्रती दंडवत कर घाट पर पहुंचे। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रत्येक वर्ष की भांति भगवान भास्कर को प्रसन्न करने के लिए महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा मुख्य रूप से यह पर्व सूर्य उपासना के लिए किया जाता है, ताकि पूरे परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहे। साथ ही यह व्रत संतान के सुखद भविष्य के लिए भी किया जाता है। मान्यता है कि छठ का व्रत करने से निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।छठ पर्व में महिलाओं के साथ पुरुषों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया जिसमें मुख्य रूप से देऊवारी के प्रवीण उपाध्याय, डब्लू उपाध्याय, ऋषिकेश उपाध्याय, अश्वनी उपाध्याय, के साथ सैकड़ो ग्रामीण के साथ अन्य लोग उपस्थित रहे।

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