Azamgarh news:रानी की सराय कस्बे में कई दशक से होता है मूर्तियों का निर्माण

In the town of Rani Ki Sarai, idols have been made for decades

रिपोर्ट चन्दन शर्मा
रानी की सराय
शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो चुका है वहीं पंडाल समितियां द्वारा पंडाल को आकर्षक बनाने के लिए भी तैयारियां तेज हो गई है नवरात्रि के पहले दिन ही प्रतिमाओं को रख करके पूजन अर्चन भी शुरू हो गया है कहीं-कहीं प्रतिमाएं नवरात्र प्रारंभ होने के एक दिन पहले तो‌ कहीं दशहरे के दिन से ही प्रतिमाओं को स्थापित कर दिया जाता है समितियां द्वारा नवरात्रि की पूर्वी पंडालों में देवी प्रतिमाओं को स्थापित कर दिया है। दशहरे के साथ शुरू हुए विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न तिथियां को मेले का आयोजन किया जाता है वहीं बंगाल के कारीगरों द्वारा बुकिंग हुए देवी प्रतिमाओं को अंतिम रूप से दिया जा रहा है

कई साल से बंगाल के कारीगर बना रहे हैं दुर्गा प्रतिमा

रानी की सराय कस्बे के एक समिति के सदस्य ने बताया कि पहले स्थानीय लोगों द्वारा देवी प्रतिमाओं को बनाया जाता और इसकी तैयारी लगभग एक दो महीने पहले से की जाती थी लेकिन लगभग कईसाल से बंगाल से आए कार्यक्रमों द्वारा ही देवी प्रतिमाओं को बनाया जा रहाहै ।

बांस बल्ली के सहारे बनता था पंडाल

इन दोनों जहां आधुनिक तरीके से देवी प्रतिमाओं रखने के लिए पूजा पंडाल समिति द्वारा पंडालो को दो दिन से ही तैयारी की जाती थी जिसके लिए गांव-गांव में जाकर के पास लकड़ी आदि की व्यवस्था की जाती थी और पंडालों को भव्य रूप दिया जाता था लेकिन आज जगह की कमी और समय की बचत के लिए मात्र दो या तीन दिन में पंडाल बन जाते हैं

सामग्री के दाम बढ़ने से मूर्तियों के दाम बढ़े

बंगाल से आए कारीगर ने बताया कि मूर्तियों को बनाने के लिए दो-तीन महीने पहले से मिट्टी बस आदि की व्यवस्था की जाती है इनमें होने वाले सामग्री जैसे तट बस कच्चा पेंट कपड़ा साथ सजा डी के दाम बढ़ जाने से मूर्तियों के दाम भी बढ़ाना पड़ रहा है जो मूर्तियां 3 हजार में मिलती है वह अब 7 से 8 रुपए में मिलती है

बंगाल के कारिगर 8 महीने रह करके मूर्तियों का करते हैं निर्माण

रानी की सराय में कस्बे में लगभग एक दर्जन से अधिक मूर्तियां बनाने का कारखाना है लोग वर्ष में 8 महीने बंगाल से आकर के इन कारखानों में बांस और बल्ली के सहारे मंडई बनाते हैं जिसमें तिरपाल रखकर की मूर्तियों का निर्माण करते हैं

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