ग्राम प्रधान-लेखपाल जिम्मेदार:क्षेत्र में पराली जली तो होगी कार्रवाई:आजमगढ़ में पराली जलाने पर कार्रवाई तेज, 11 किसानों पर ₹17,500 जुर्माना,
Village Head-Lekhpal Responsible: Action will be taken if stubble burns in the area

आजमगढ़ 18 नवम्बर– उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने बताया है कि जिलाधिकारी आजमगढ़ महोदय ने जनपद में पराली जलाने की बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए सख्त निर्देश जारी किया कि बिना पराली प्रबन्धन यन्त्र के साथ कम्बाईन चलाते हुए पायी जाती है तो सीज किया जायेगा।
माननीय राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के अनुसार फसल अवशेष जलाया जाना कानूनी रूप से निषिद्ध है। इसके उल्लंघन पर संबंधित के विरुद्ध विधिक कार्यवाही का प्रावधान है। जनपद में धान की कटाई प्रगति पर है। एवं किसानों द्वारा फसल अवशेषों को जलाने की भी घटनाएं परिलक्षित हो रही हैं। ऐसे में सख्त रवैया अपनाते हुए जनपद में अब तक खरीफ 2025 सत्र में पराली जलाने वाले 11 किसानों के विरूद्ध जुर्माने की कार्यवाही की गयी है। कृषक भानी पुत्र रामदेव, जितेन्द्र पुत्र रामदेव, जयराम पुत्र राघुपति, अशोक कुमार पुत्र राधेश्यामपर वीपूल ओझा पुत्र अवध कुमार तथा अन्य दोषी कृषकों के ऊपर राजस्व विभाग द्वारा नियमानुसार कुल 17500 रू0 का अर्थदण्ड आरोपित किया गया है।मा0 सर्वोच्च न्यायालय एवं मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा निर्गत आदेशों के अनुपालन में पराली/फसल अवशेष जलाये जाने से हो रहे प्रदूषण की रोकथाम के दृष्टिगत जनपद स्तर पर एक सेल का गठन किया गया है। जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक ग्राम प्रधान एवं क्षेत्रीय लेखपाल की जिम्मेदारी होगी कि अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने की घटनायें बिल्कुल न होने दें अन्यथा उनके विरूद्ध भी कार्यवाही की जायेगी। जिलाधिकारी महोदय द्वारा किसानों से अपील गयी कि कृषि विभाग के कार्मिकों से सुझाव प्राप्त कर फसल अवशेष को कृषि यंत्रों एवं वेस्टडी-कम्पोजर के माध्यम से उप चारित करते हुए कम्पोस्ट खाद बनाकर अपनी फसलों में प्रयोग करें। उप कृषि निदेशक द्वारा अवगत कराया गया कि कृषक बन्धु पराली को निराश्रित गौशालाओं भेज कर खाद्य प्राप्त कर सकते हैं। मा0 राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम की धारा 24 के अर्न्तगत क्षतिपूर्ति की वसूली एवं धारा 26 के अर्न्तगत उल्लघंन की पुनरावृत्ति होने पर सम्बन्धित के विरूद्ध अर्थदण्ड तथा भारतीय न्याय सहिंता की धारा 126 एवं 135 के अर्न्तगत विधिक कार्यवाही भी सम्पादित की जायेगी। उनके द्वारा बताया गया कि कृषि निदेशालय उ0प्र0 से प्राप्त निर्देश के क्रम में पराली जलने से रोकने के प्रचार-प्रसार हेतु 03 प्रचार वाहन प्रति दिवस जनपद में चक्रमित हैं। जिलाधिकारी महोदय द्वारा प्रदत्त निर्देश के अनुसार जिन क्षेत्रों में विगत 03 वर्ष में पराली जलने की घटनाएँ प्रकाश में आयी हैं, उन क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर रोस्टर तैयार कर प्रचार वाहन संचालित कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कन्ट्रोल रूम नम्बर-9454417172 पर कृषक बन्धु फसल अवशेष प्रबन्धन के सम्बन्ध में कोई भी जानकारी/शिकायत कर सकते है।



