आजमगढ़ में पुलिस पर गंभीर आरोप:भूमाफियाओं से गरीब की जमीन कब्जा कराई, पीड़ित परिवार पर ही दर्ज किया मुकदमा

पैसे के खेल में कानून बेबस? निजामाबाद पुलिस पर भूमाफियाओं का साथ देने का आरोप

जमीन भी गई, मुकदमा भी झेला: निजामाबाद पुलिस पर गरीब परिवार के उत्पीड़न का आरोप

आजमगढ़ जनपद के निजामाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत बढ़या ग्राम सभा में पुलिस पर एक गरीब परिवार की जमीन भूमाफियाओं से कब्जा कराए जाने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि थाना प्रभारी ने कथित रूप से मोटी रकम लेकर दबंगों का साथ दिया और न्याय दिलाने के बजाय उन्हीं के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया।

पीड़ित लालबहादुर सिंह निवासी बढ़या ग्राम सभा ने आरोप लगाया है कि उनकी बंजर जमीन, गाटा संख्या 272 पर भूमाफिया शंकर सिंह पुत्र शुद्धी, रमेश पुत्र शुद्धी निवासी बढ़या तथा बबलू पुत्र बलभद्र निवासी डोडोपुर (थाना निजामाबाद) ने करीब 35-40 लोगों के साथ मिलकर कब्जा करने की कोशिश की।आरोप है कि इस पूरे मामले में स्थानीय थाना प्रभारी की मिलीभगत रही।लालबहादुर सिंह का कहना है कि विपक्षी पक्ष द्वारा लगभग 35 मिस्त्रियों को बुलाकर सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक जमीन पर बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया।

इस दौरान उन्होंने पहले ही थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर कब्जे की आशंका जताई थी,लेकिन बार-बार फोन करने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि फोन उठाने पर भी थाना प्रभारी ने थाने पर न होने की बात कहकर टाल दिया।पीड़ित के पुत्र संतोष के अनुसार, मजबूरी में 112 नंबर पर चार-पांच बार कॉल करने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची,तब जाकर निर्माण कार्य रुकवाया गया। इसी दिन रात करीब 8 बजे दीवार पर ईंट रखते समय दीवार गिर गई, जिसमें शंकर सिंह की पत्नी घायल हो गई।आरोप है कि इस घटना के बाद निजामाबाद पुलिस ने कब्जा कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उल्टा लालबहादुर सिंह और उनके दोनों बेटों पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार पुलिस दबिश के कारण वे पिछले चार दिनों से घर छोड़कर इधर-उधर रहने को मजबूर हैं। हाल ही में जमानत मिलने के बाद भी परिवार में भय का माहौल बना हुआ है।लालबहादुर सिंह ने बताया कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक, मंडलायुक्त और जिलाधिकारी सहित अन्य उच्च अधिकारियों को पूरे मामले की लिखित शिकायत दे दी है।अब पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि उच्च अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय दिलाएंगे।इस मामले ने एक बार फिर जब रक्षक ही भक्षक बन जाए जैसी स्थिति को उजागर कर दिया है।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है।

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