Azamgarh News: आजमगढ़ में भाईचारे की मिसाल बनी ईद,खुशियों के बीच दुनिया की हलचल का भी दिखा असर

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय
आजमगढ़ में भाईचारे की मिसाल बनी ईद,खुशियों के बीच दुनिया की हलचल का भी दिखा असर
आजमगढ़ जनपद में पवित्र माह रमजान के समापन के साथ मनाया जाने वाला पावन पर्व ईद उल फितर इस वर्ष आजमगढ़ जनपद में हर्षोल्लास, सौहार्द और भाईचारे के अनूठे संगम के रूप में मनाया गया। सुबह से ही पूरे आजमगढ़ जिले में उत्सव का माहौल देखने को मिला, जहां 636 ईदगाहों और मस्जिदों में हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नमाज अदा की।
नमाज के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी और आपसी प्रेम व सद्भाव का संदेश दिया। इसके बाद घर-घर जाकर सेवइयों की मिठास के साथ रिश्तों को और भी मजबूत किया गया। बच्चों में ईद को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया—नए कपड़े, खिलौने और मीठे पकवानों ने उनकी खुशियों को दोगुना कर दिया।
बिलरियागंज क्षेत्र के ईदगाह में भारी भीड़ उमड़ी, जहां शांतिपूर्ण ढंग से नमाज अदा की गई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। थाना अध्यक्ष सुनील कुमार दुबे, सीओ सगड़ी, पीएसी के जवानों सहित भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे पूरा आयोजन सकुशल संपन्न हुआ।
जनपद में कुल 358 ईदगाहों और 278 मस्जिदों में नमाज अदा की गई। इसके लिए लगभग 1200 सिविल पुलिस, 3 कंपनी पीएसी, 24 क्यूआरटी टीमें, एलआईयू, 600 होमगार्ड, 350 पीआरडी जवान और डायल 112 पुलिस को तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में पूरे जिले में शांति और व्यवस्था बनी रही।
बिलरियागंज क्षेत्र के छिहीं, छिछोरी, विन्दवल, जयराजपुर, शेखूपुर, अशरफपुर और भावापुर सहित विभिन्न गांवों में अलग-अलग स्थानों पर नमाज अदा की गई। इस दौरान हिंदू-मुस्लिम एकता की सुंदर झलक भी देखने को मिली, जहां विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे को बधाई देने पहुंचे।
पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष आरिफ, गोपालपुर विधायक नफीस अहमद, समाजसेवी मोहम्मद फैज, सभासद अनवार, ग्राम प्रधान फैजान अहमद और अन्य गणमान्य लोगों ने भी लोगों से मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ की।
हालांकि इस खुशी के मौके पर कुछ लोगों के दिलों में वैश्विक हालात को लेकर चिंता भी नजर आई। ईरान और फिलिस्तीन से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर कुछ लोगों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताया और अल-अक्सा मस्जिद में नमाज पर रोक के मुद्दे को उठाया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि स्थानीय खुशियों के साथ लोग वैश्विक मुद्दों से भी भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।
तीस रोजों की इबादत के बाद आई ईद ने जहां एक ओर खुशियों की सौगात दी, वहीं इंसानियत, भाईचारे और शांति का संदेश भी पूरे जनपद में गूंजता रहा। रमजान की रहमतों और बरकतों के साथ विदाई लेते इस पर्व ने हर दिल में नई उम्मीद और नई रोशनी भर दी।



