Azamgarh News: आम के बौर पर संकट, “बौर झड़े, सपने टूटे… इस साल सूने रह जाएंगे बाग”

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
आम के बौर पर संकट, “बौर झड़े, सपने टूटे… इस साल सूने रह जाएंगे बाग”
आजमगढ़ जनपद के बिलरियागंज विकासखंड अंतर्गत कभी आम की खुशबू से महकने वाले बागों में इस बार सन्नाटा पसरा है। जिन पेड़ों पर कुछ ही हफ्ते पहले तक बौर (मंजरी) लहलहा रहे थे, आज वही बौर काले पड़कर जमीन पर बिखरे दिखाई दे रहे हैं। किसान मायूस हैं, बागवानों की आंखों में चिंता साफ झलक रही है—क्योंकि इस बार आम की फसल लगभग पूरी तरह चौपट होती नजर आ रही है। गांव-गांव, बाग-बाग एक ही कहानी सुनाई दे रही है। शुरुआत में पेड़ों पर भरपूर बौर आए, जिससे किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी थी। लेकिन अचानक बौर पर हमला हुआ—पेड़ों से चिपचिपा पानी टपकने लगा, बौर काले पड़ गए और देखते ही देखते झड़कर जमीन पर गिर गए। जहां फल बनने की उम्मीद थी, वहां अब सूनी डालियां नजर आ रही हैं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि उन्होंने ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी। “पेड़ पर बौर खूब लगा था, लेकिन एक भी दाना नहीं बना। सब काला पड़कर गिर गया,” एक बागवान ने दर्द बयां करते हुए कहा। कई किसानों ने बताया कि उनके पूरे बाग में यही हाल है, जिससे उनकी सालभर की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
इस मामले में कृषि विभाग से बातचीत करने पर अधिकारियों ने बताया कि यह समस्या मुख्य रूप से मैंगो हॉपर (भुंगा कीट) या मिलीबग के प्रकोप के कारण हो रही है। ये कीट बौर का रस चूस लेते हैं और एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ते हैं, जिससे फफूंद पनपती है और बौर काले पड़ जाते हैं। परिणामस्वरूप फल लगने की प्रक्रिया रुक जाती है और बौर झड़ जाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस कीट से बचाव के लिए शुरुआती चरण में ही दवा का छिड़काव बेहद जरूरी होता है। लेकिन इस बार अचानक बढ़े प्रकोप और समय पर नियंत्रण न हो पाने के कारण नुकसान ज्यादा हो गया।
आजमगढ़ के बागों में इस समय जो दृश्य है, वह दिल को झकझोर देने वाला है। जहां हर साल आम के मौसम में खुशियां और मिठास होती थी, वहां इस बार निराशा और सन्नाटा है। किसान कहते हैं “इस बार आम नहीं, सिर्फ दुख ही मिलेगा।”
अगर यही हाल रहा तो इस साल आम की पैदावार लगभग शून्य रह सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय और बाजार पर पड़ेगा।



