Azamgarh News: सैकड़ों वर्षों बाद जगा आस्था का दीप, पटवध सुधाकर में मां काली मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद

आजमगढ़ बलरामपुर/पटवध से बबलू राय
सैकड़ों वर्षों बाद जगा आस्था का दीप, पटवध सुधाकर में मां काली मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया प्रसाद
आजमगढ़ जनपद के विकासखंड बिलरियागंज अंतर्गत पटवध सुधाकर गांव में आस्था, श्रद्धा और सामूहिक एकजुटता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जहां वर्षों से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पड़ा मां काली का प्राचीन मंदिर अब भव्य रूप में पुनर्जीवित हो उठा है। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों के अथक प्रयासों और अटूट श्रद्धा के चलते इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर उसे एक दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया।
बताया जाता है कि यह मंदिर सैकड़ों वर्षों से उपेक्षा का शिकार था। समय के साथ इसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि वहां पूजा-अर्चना भी लगभग बंद हो चुकी थी। लेकिन गांव के लोगों ने इसे अपनी आस्था और पहचान से जोड़ते हुए एकजुट होकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और उसे साकार कर दिखाया।
मंदिर निर्माण के पश्चात 29 अप्रैल को विद्वान पंडित श्रीकांत महाराज, सोनू पांडे और राहुल पांडे के नेतृत्व में विधि-विधान के साथ मां काली की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस दौरान पूरे गांव में भक्ति और उत्साह का वातावरण रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजन-अर्चन और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा।
प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसके समापन पर 2 मई को एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जो शाम 5:00 बजे से शुरू होकर रात्रि 10:30 बजे तक चला। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और मां काली के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना के लिए ग्रामीणों द्वारा अशोक राय उर्फ मान राय को पुजारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिससे अब यहां नियमित धार्मिक गतिविधियां संचालित होंगी।
इस पुण्य अवसर पर सीडब्ल्यूसी बेंच आफ मजिस्ट्रेट अखिलेश सिंह, ग्राम प्रधान पति सुरेश्वरी दत्त उपाध्याय, भाजपा मंडल अध्यक्ष बिलरियागंज रुद्रप्रकाश राय, पूर्व मंडल अध्यक्ष उमेश गौड़, राहुल सिंह, मनोज राय, डिंपल राय, अशोक राय, अरविंद पाठक, नरेंद्र राय, चंद्रकांत राय, सरवन यादव, चंद्रपाल सिंह सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सहयोग की मिसाल भी प्रस्तुत कर गया। मां काली के मंदिर का यह पुनर्जागरण आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और प्रेरणा का केंद्र बनेगा।



