Azamgarh News: नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग आधारित जिला सहकारिता सम्मेलन कार्यक्रम विकास भवन में सम्पन्न*

आजमगढ़ बलरामपुर /पटवध से बबलू राय
*नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग आधारित जिला सहकारिता सम्मेलन कार्यक्रम विकास भवन में सम्पन्न*
आजमगढ़ 14 मई 2026/ “धरती माता बचाओ अभियान” के तहत नैनो उर्वरकों के महत्व एवं उपयोग आधारित जिला सहकारिता सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन विकास भवन सभागार, जनपद आजमगढ़ में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जनपद के मुख्य विकास अधिकारी श्री परीक्षित खटाना उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, आजमगढ़ श्री संजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी, आजमगढ़ श्री गगनदीप सिंह, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता, आज़मगढ़ श्री अजय कुमार, श्री अखिलेश कुमार यादव, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा, आजमगढ़ और वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक, इफको, आजमगढ़ श्री जियाउद्दीन सिद्दीकी के साथ-साथ सहकारिता विभाग के समस्त अपर सहकारी अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी एवं 100 अधिक समितियों के सचिव उपस्थित रहें।
कार्यक्रम में “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत उर्वरक संतुलित उपयोग, रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता कम करने के लिए नैनो उर्वरक के उपयोग एवं महत्त्व, फार्मर आईडी आदि विषयों पर चर्चा की गयी।
मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा बताया गया कि हम बहुत बड़ी मात्रा में बाहर से केमिकल फर्टिलाइजर इंपोर्ट करते हैं। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से हमारी धरती माता को नुकसान पहुंच रहा है तथा खेतों की उर्वरा शक्ति लगातार प्रभावित हो रही है। यदि आज हम अपने खेतों को सुरक्षित नहीं रखेंगे तो भविष्य में फसलों के उत्पादन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि रासायनिक उर्वरकों की खपत को कम करते हुए प्राकृतिक एवं संतुलित खेती की ओर बढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि उर्वरकों का संतुलित उपयोग कर हम विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ अपनी भूमि की गुणवत्ता को भी सुरक्षित रख सकते हैं।
जिला विकास अधिकारी द्वारा बताया गया कि भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखने के लिए रासायनिक उर्वरक के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए वैकल्पिक उर्वरक नैनो उर्वरकों के उपयोग हेतु किसानों में जागरूकता बढ़ाते हुए अधिकाधिक नैनो उर्वरक के उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। साथ ही समिति के सचिवों को समिति से खोलने और किसानों को पारदर्शी तरीके से उर्वरक वितरण करने के निर्देश दिए गए ताकि किसानों को असुविधा न हो और शासन की मंशा के अनुसार कार्य करने हेतु निर्देश
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी, आजमगढ़ ने कहा कि मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने हेतु रासायनिक खादों का प्रयोग संतुलित मात्रा में करें, फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर उन्हें मिट्टी में मिलाएं, जैविक खादों का अधिकाधिक उपयोग करें तथा फसल चक्र अपनाएं। उन्होंने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील करते हुए कहा कि इससे धरती माता का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा। उनके द्वारा नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं आधुनिक, लाभकारी खेती को अपनाने हेतु सभी को प्रेरित किया गया।
साथ ही किसानों के लिए फार्मर आईडी की उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि फार्मर आईडी किसानों की एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान होगी, जो आधार कार्ड की तरह 12 अंकों की विशेष पहचान संख्या के रूप में विकसित की जा रही है। इसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण, बैंक खाता एवं आधार संख्या लिंक होगी। भविष्य में इसी फार्मर आईडी के माध्यम से रासायनिक खादों का वितरण किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी एवं वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंच सकेगा।
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता द्वारा बताया गया कि किसानों द्वारा फसलों में अनुशंसित मात्रा से अधिक उर्वरकों का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे लागत बढ़ने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। सामान्य उर्वरकों के स्थान पर नैनो उर्वरकों के प्रयोग से किसानों की लागत कम होगी, उत्पादकता में वृद्धि होगी तथा बेहतर गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त होगा। नैनो उर्वरक सामान्य उर्वरकों का एक बेहतर विकल्प हैं। इनके प्रयोग से कीट, बीमारी एवं खरपतवार का प्रभाव भी नियंत्रित रहेगा तथा उत्पादन लागत में कमी आएगी।
कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा द्वारा मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने हेतु संतुलित उर्वरक एवं पोषक तत्वों के उपयोग की सलाह दी गई। उन्होंने बायो डी-कंपोजर के माध्यम से फसल अवशेषों को सड़ाकर खाद बनाने तथा गोबर की खाद को बेहतर तरीके से तैयार कर मृदा शक्ति को मजबूत बनाने पर बल दिया।
वरिष्ठ क्षेत्र प्रबंधक, इफको, आजमगढ़ द्वारा बताया गया कि केवल दानेदार यूरिया एवं डीएपी के प्रयोग से अधिक उत्पादन प्राप्त नहीं किया जा सकता। बीजों की उत्पादन क्षमता के अनुरूप बेहतर उत्पादन प्राप्त करने हेतु नर्सरी गिराने के समय नैनो डीएपी 5-10 एमएल प्रति किलोग्राम बीज से शोधित करना चाहिए, जिससे प्रत्येक बीज को अंकुरण के समय ही फास्फोरस एवं नाइट्रोजन उपलब्ध होने लगता है। इससे जड़ों का विकास बेहतर होता है तथा स्वस्थ एवं समय से तैयार नर्सरी रोपाई के लिए आधार बनती है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की जानकारी दी गई। उन्होंने कृषकों को खेत की मृदा उर्वरता एवं स्वास्थ्य सुधार हेतु जल विलेय उर्वरक, सागरिका एवं बायो डी-कंपोजर के उपयोग एवं लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।
रोपाई के समय नैनो डीएपी 5-10 एमएल प्रति लीटर पानी के घोल में नर्सरी की जड़ों को शोधित करने एवं उचित दूरी पर रोपाई करने से कल्लों की संख्या अधिक होती है तथा फसल की बढ़वार तेजी से होती है। दानेदार यूरिया की अनुशंसित मात्रा के आधे भाग का प्रयोग खड़ी फसल में करने के उपरांत एक सप्ताह बाद जब फसल घनी हो जाए तब इफको नैनो यूरिया, नैनो डीएपी एवं सागरिका का स्प्रे करने से फसल लंबे समय तक हरी एवं स्वस्थ बनी रहती है, जिससे फसल का विकास तेजी से होता है।
श्री सतीश कुमार द्वारा कीटनाशक, फफूंदनाशक एवं खरपतवारनाशी उत्पादों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई तथा भविष्य में सभी समितियों को इफको एमसी व्यवसाय से जोड़ने हेतु सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारीता से आग्रह किया गया.
कार्यक्रम में श्री इलिहास अहमद,श्री सायरभ राय,मनोज कुमार यादव, प्रगतिशील कृष्णा श्री प्रमोद राय ने भी भाग लिया.



