Palamu News: पलामू में जमीन के सौदागरों का जाल, प्रशासन के लिए बने चुनौती

मधुलता मुख्य संवाददाता
​पलामू । जिले में इन दिनों विकास की चर्चाओं से कहीं अधिक भू-माफियाओं के आतंक की गूंज है। नीलांबर-पीतांबर की इस ऐतिहासिक धरती पर सफेदपोश भू-माफियाओं का नेटवर्क इतना सशक्त हो चुका है कि अब यह जिला पुलिस और प्रशासनिक तंत्र के लिए साख का विषय बन गया है। आम जनता की मेहनत की कमाई से खरीदी गई जमीनों पर माफियाओं की गिद्ध दृष्टि ने जिले के सामाजिक सौहार्द को भी खतरे में डाल दिया है।
​सरकारी दस्तावेजों से छेड़छाड़ का मामला भी प्रकाश में आने से हड़कंप मच गया है। ​जिले में भू-माफियाओं का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि वे सरकारी राजस्व अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करने से भी गुरेज नहीं कर रहे। फर्जी वंशावली बनाना, मृत व्यक्तियों के नाम पर जाली डीड तैयार करना और एक ही जमीन को कई बार बेचना अब पलामू में एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। अंचल कार्यालयों से लेकर रजिस्ट्री ऑफिस तक के मामले और भी चौंकाने वाले हैं। पलामू की भोली-भाली जनता को कागजी भूलभुलैया में फंसाकर उनकी जमीन हड़प रहे हैं। वहीं पलामू में ​न्यायालयों पर भी बोझ बढ़ता चला आ रहा है।
​प्रशासनिक स्तर पर न्याय की आस टूटने के कारण जिले के अधिकांश जमीन विवाद अब न्यायालयों की दहलीज पर हैं। पलामू सिविल कोर्ट में जमीन संबंधी मुकदमों का अंबार लगा है, जिससे न्याय प्रक्रिया पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है। शहर से लेकर गांव तक, शायद ही कोई दिन ऐसा जाता हो जब जमीन विवाद को लेकर निषेधाज्ञा लागू न करनी पड़ती हो। भू-माफियाओं के खिलाफ प्रशासन सख्त है। शिकायतों की जांच के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन जमीन के पेचीदा मामलों के कारण जनता को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
​पलामू पुलिस के सामने यह एक दोहरी चुनौती है। एक ओर उन्हें जमीन विवादों के कारण होने वाली हिंसा और कानून-व्यवस्था को संभालना है, तो दूसरी ओर माफियाओं के उस सिंडिकेट को तोड़ना है जिसे कथित तौर पर स्थानीय रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है। बाहुबल और धनबल के दम पर माफिया अब पुलिस की कार्रवाई को भी प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
​हर वर्ग में व्याप्त है आक्रोश
​पलामू का आम नागरिक आज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। मध्यमवर्गीय परिवार, जिन्होंने अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए जमीन के छोटे टुकड़े खरीदे थे, आज बाहुबलियों के डर से अपनी ही जमीन पर जाने से कतरा रहे हैं।

पलामू को जमीन माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए केवल आश्वासन काफी नहीं हैं। इसके लिए जिला प्रशासन को एक विशेष टास्क फोर्स गठित कर, राजस्व विभाग के भ्रष्टाचार पर लगाम कसनी होगी और फर्जी कागजातों के आधार पर हो रहे कब्जों पर ‘बुलडोजर’ जैसी कड़ी कार्रवाई की मिसाल पेश करनी होगी। वर्तमान पलामू पुलिस प्रशासन ने भी भू माफियाओं पर नज़र रखनी शुरू कर दी है। देखना है कि क्या वाकई कार्रवाई होती है या सिर्फ मीडिया की सुर्खियों तक ही कार्रवाई रह जाएगी।

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