Azamgarh News: एक शाम गोपालपुर के नाम” में गूंजे अदब, मोहब्बत और देशभक्ति के स्वर, रातभर शेरो-शायरी पर झूमता रहा बिलरियागंज

आजमगढ़ बलरामपुर पटवध से बबलू राय
“एक शाम गोपालपुर के नाम” में गूंजे अदब, मोहब्बत और देशभक्ति के स्वर, रातभर शेरो-शायरी पर झूमता रहा बिलरियागंज
आजमगढ़ जनपद के गोपालपुर विधानसभा अंतर्गत एक समर्पित भव्य मुशायरा एवं कवि सम्मेलन “एक शाम गोपालपुर के नाम” गुरुवार की रात बिलरियागंज के कासिमगंज बाईपास रोड स्थित मैदान में अदबी उत्सव के रूप में यादगार बन गया। रात आठ बजे शुरू हुआ यह कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद हजारों की संख्या में पहुंचे साहित्य प्रेमियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। शेरो-शायरी, गजल, नज़्म और कविताओं की मधुर प्रस्तुति ने पूरे माहौल को साहित्य और संवेदनाओं के रंग में रंग दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कवि और शायर समाज के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। उनकी कलम समाज की आवाज़ बनकर लोगों को जागरूक करने का कार्य करती है। उन्होंने समकालीन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर भी अपने विचार रखे तथा केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की संपत्तियों का निजीकरण और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने विशेष रूप से नीट परीक्षा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों विद्यार्थियों का भविष्य अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से पहुंचे नामचीन कवियों और शायरों का स्वागत क्षेत्रीय विधायक नफीस अहमद तथा नगर पालिका अध्यक्ष मीना पासवान ने अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। सम्मान पाकर साहित्यकारों ने भी गोपालपुर की सरज़मीं और यहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुशायरे की शुरुआत होते ही मंच से निकले अल्फाज सीधे श्रोताओं के दिलों तक पहुंचते रहे। राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव, भाईचारे और देशभक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं ने पूरे वातावरण को भावनात्मक बना दिया। जब मशहूर शायर उसैद प्रतापगढ़ी ने यह पंक्तियां पढ़ीं—
“वतन की शान हम जाने न देंगे, जान दे देंगे गुलामी कभी आने न देंगे, चमन के फूल हैं हिंदू-मुसलमां, इसे मुरझाने न देंगे…”
तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। श्रोताओं ने खड़े होकर उनके कलाम का स्वागत किया और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो गए।
मंच पर मौजूद मल्लिका-ए-तरन्नुम ने अपनी दर्दभरी प्रस्तुति “वक्त भी नहीं कटता, नींद भी नहीं आती…” सुनाकर लोगों को भावुक कर दिया। वहीं प्रसिद्ध शायर रफीक गड़बड़ ने “हर मुश्किल आसान बना दे या मौला…” पेश कर खूब वाहवाही बटोरी। कवयित्री हिमांशी बाबरा की रचना “अब मुझे याद तेरी नहीं आती…” ने युवाओं और साहित्य प्रेमियों के दिलों को छू लिया।
इसके अलावा अख्तर आजमी, नौशाद अशहद, अब्दुल रहीम, शाइस्ता सना, निकहत अमरोहवी सहित कई नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। हर रचना पर श्रोताओं की तालियां और दाद यह साबित कर रही थीं कि साहित्य आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
देर रात तक चले इस भव्य अदबी आयोजन में बिलरियागंज सहित आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से भारी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव, विधायक अखिलेश यादव, विधायक डॉ. संग्राम यादव, विधायक डॉ. एच.एन. पटेल, विधायक पूजा सरोज, पूर्व एमएलसी राकेश कुमार यादव गुड्डू, सपा जिलाध्यक्ष हवलदार यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष विजय यादव, अभय नारायण पटेल, दिवाकर यादव, जगदीश यादव, तारकेश्वर तिवारी, पंकज मिश्र, पूर्व चेयरमैन मोहम्मद आरिफ खान, रमंटू उपाध्याय, कोमल पासवान, दिलवर यादव, राम विजय यादव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जावेद अख्तर ने की, जबकि संचालन नदीम फर्रुख ने अपनी शानदार शैली में किया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थाना प्रभारी अमित कुमार मिश्रा अपनी टीम के साथ पूरी रात मुस्तैद रहे।
यह आयोजन केवल एक मुशायरा नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का ऐसा संगम साबित हुआ, जिसने गोपालपुर की धरती पर अदब और मोहब्बत की एक यादगार शाम लिख दी।



